जैव प्रौद्योगिकी में नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका : बलराम पाणी


 दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में "जीव विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका: एक सतत भविष्य" विषय पर आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय , बलराम पाणी जी ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी में नवीन प्रयोग अत्यंत आवश्यक हैं। इससे मानव स्वास्थ्य में काफी मदद मिलेगी।

तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अग्रणी वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने जैव प्रौद्योगिकी में नवीनतम प्रगति पर चर्चा की। उद्घाटन सत्र में मिरांडा हाउस की प्राचार्या प्रो. बिजयलक्ष्मी नंदा ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि सभी प्रतिभागियों को नवाचार और सतत विकास के लिए अनुसंधान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। 

प्रो. रूप लाल (आईएनएसए सीनियर साइंटिस्ट, एएनडीसी) ने जीव ई-3 की अवधारणा प्रस्तुत की, जो जैव-उद्यमिता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है उन्होंने कहा कि हमारी आंत में मौजूद सूक्ष्मजीव हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, और उन्हें समझकर हम अपने शरीर को स्वस्थ और जीवन को अधिक शांतिपूर्ण बना सकते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय मिश्रा (डीबीटी) ने वैज्ञानिक अनुसंधान में अंतःविषय दृष्टिकोण की महत्ता पर प्रकाश डाला। 

एम्स से प्रो. सुजाता मोहंती ने अपनी प्रस्तुति में विटिलिगो और कॉर्निया उपचार में स्टेम सेल अनुप्रयोगों की नवीनतम तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "ऊतक इंजीनियरिंग की सहायता से एलएससीडी में एक्स-वीवो संवर्धित लिम्बल उपकला का उपयोग करके नेत्र सतह की मरम्मत संभव है, जिससे पारंपरिक उपचारों और कॉर्नियल प्रत्यारोपण की सीमाओं को दूर किया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि प्रो. मोहम्मद अफशार आलम वीसी, जामिया हमदर्द ने विषय के चयन और आवश्यकता पर बोलते हुए कहा कि इन विषयों से आगामी पीढ़ी का नई जानकारियों से  परिचय होगा। 

 प्रो. अनुराग अग्रवाल (अशोका विश्वविद्यालय) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा जैव विज्ञान में किए जा रहे क्रांतिकारी बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, कृत्रिम बुद्धि एजेंटों द्वारा नैनोबॉडीज़ को डिज़ाइन किया जा रहा है और उनका प्रयोगशाला में सत्यापन किया गया है।  इसके अलावा, डॉ. सौविक मैती (सीएसआईआर-आईजीआईबी, नई दिल्ली) ने स्वदेशी तकनीक और उसकी सटीक जीन थेरेपी में भूमिका पर व्याख्यान दिया। जैव प्रौद्योगिकी में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए डॉ. तरुणा मदान (आईसीएमआर, नई दिल्ली), डॉ. एलोरा सेन (एनबीआरसी, मानेसर), डॉ. गीता अंजलि यादव (एनआईपीजीआर, नई दिल्ली), प्रो. बिजयलक्ष्मी नंदा (मिरांडा हाउस) और प्रो. साधना शर्मा (मिरांडा हाउस) ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।


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