दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन


केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आज दिल्लीवासियों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने दिल्लीवासियों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए 2019 में पीएम-उदय योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने के वर्तमान निर्णय से निवासियों को अपनी संपत्तियों के पंजीकरण के लिए आगे आने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।

अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय

अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।

इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।

जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।

सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।

पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।

31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।

योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।

इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय

इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।

• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।

• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।

• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।

• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।

• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।

• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया

  • आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
  • अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
  • चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
  • यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
  • यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
  • यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
  • जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।

नजरिया जीने का: जीवन के मूल्यों के प्रतीक हैं शिव, सीखें जीवन की ये महत्वपूर्ण बातें

 



देवों के देव अर्थात महादेव का व्यक्तित्व सम्पूर्ण रूप से रहस्यों से भर हुआ है।भगवान शंकर, भोले शंकर भोले नाथ जैसे अनेकों नामों से अपने भक्तों में पूजे जाने वाले महादेव केवल संहार के देव नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन, संतुलन, ध्यान और आत्म-विकास के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और संतुलन से मिलती है।

भक्त एक तरफ उन्हे भोलानाथ कहते हैं जिसका मतलब हीं निकलता है सादगी, दया और करुणा से भरपूर हैं जिन्हे प्रसन्न करना भक्तों के लिए काफी आसान है। भगवान शिव का जीवन बहुत सरल है—ना महल, ना आडंबर। सच तो यह है कि भगवान शंकर की जीवन का सार हीं यही हैं कि सफल व्यक्ति वही है जो कम संसाधनों में भी संतुष्ट और केंद्रित रह सके। आडंबर और दिखावा ने हमारे जीवन को सबसे अधिक बर्बाद किया है जहां हम दूसरों को देखकर अपना सुख चैन गवां देते हैं 
 वहीं दूसरी तरफ भगवान शिव सत्यम, शिवम, सुंदरम, यानी सत्य, अच्छाई और सुंदरता के रूप में महत्वपूर्ण अच्छाई का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। 

भगवान शिव को “आदियोगी” कहा जाता है। उनका ध्यानमग्न स्वरूप हमें सिखाता है कि सफलता की शुरुआत मन को नियंत्रित करने से होती है। जब मन शांत होता है, तो निर्णय सही होते हैं और जीवन में स्पष्टता आती है।

भगवान शिव सब पर काफी दया और प्रेम रखने वाले हैं चाहे वह देवता हों, असुर हों या साधारण मनुष्य। और यही वजह है कि राक्षसों और दानवों ने भी प्रेम पूर्वक उनका पूजन कर उनसे हीं वरदान लेकर उनके हीं अंत का उपाय अर्थात खुद के विनाश की तैयारी कर लेते थे। 

"महज एक देवता नहीं,
जीवन के मूल्यों के प्रतीक भी हैं शिव। 
भस्म और बाघंबर मे रमे हुए,
संतोष और सादगी के प्रतीक भी हैं शिव। 
समुद्र मंथन से निकले विष को पी जाने वाले,
धैर्य और सहनशीलता के प्रतीक भी हैं शिव। 
बाहरी कोलाहल और तांडव से परे,
ध्यान और समाधि के प्रतीक भी हैं शिव। 
देवता, असुर या हों सामान्य भक्त सब पर ,
एक समान दृष्टि के प्रतीक भी हैं शिव। "

नजरिया जीने का : अपनों की कीमत को पहचाने, घृणा, लालच और उपेक्षा से नहीं करें संबंधों की हत्या


najariya jine ka inspiring thoughts point of view

नजरिया जीने का : हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम कुछ अपने गलत आदतों या मानवीय दुष्कृतियों जैसे लोभ, लालच, द्वेष आदि के कारण उन अपनों से मुँह मोड़ लेना जिनके बगैर कभी हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे. आये दिन आप  यह पढ़ते हैं कि छोटे-छोटे विवादों में भाई न भाई पर आघात किया, क्या इसे प्रासंगिक कही ना सकती है. वही दोनों भाई जब छोटे होते हैं तो एक के बगैर दूसरा नहीं रह पाता लेकिन घृणा, लालच और उपेक्षा जब दोनों के बीच में आ जाती है तो एक दूसरे के वे शत्रु बन जाते हैं वह भी तब जब वे समझदार हो जाते हैं. क्या यही है हमारी शिक्षा और नैतिकता की चरम स्थिति. 

आज की इस व्यस्त जीवन शैली में मौजूद परेशानियों ओर जीवन के भागदौड़ में अक्सर हम अपनों से दूर होते जा रहे हैं। निसंदेह आज के इस दौड़ में जहां जीवन की प्रगति का माध्यम भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मापी जाती है, ऐसी स्थिति में यह स्वाभाविक भी है। 

लेकिन क्या जीवन में संबंधों की गलाघोंटने और उन्हें खत्म करने के लिए सिर्फ व्यस्त जीवनशैली ही जिम्मेदार है? क्या यह सच नहीं कि हम अपने कर्मों और अपने आचरणों से इन संबंधों की हत्या कर अपने संबंधियों से दूर नही होते जा रहे।

सच तो यह  है कि सम्बन्धों की कभी भी अपनी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती है बल्कि इनकी हत्या सदैव मनुष्य ही अपने कर्मों या असामान्य और कभी कभी कभी जान बूझकर अपने कलुषित आचरणों से इनकी हत्या करता है।

आखिर ये मानवीय भूल या आचरण ही तो हैं जिन्हे हम घृणा कहें या क्रोध या लालच, को अक्सर हमारे अपनों को हमसे दूर करते हैं।

कभी हम उपेक्षा करके या कभी भ्रम या संदेह से तो इन संबंधों का पलीता लगाते हैं जो न केवल हमें अपनों से दूर करते हैं बल्कि हमें अकेला बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जहरीला परिवेश का निर्माण करते हैं।

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नजरिया जीने का: प्रेम में समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है

 

 

स्पर्श की कोमलता को, हम जानते हैं बाद में,
हृदय के गहरे संबंधों को पहले जानना भी जरूरी है।

हाँ, नि: शब्द तो होता है प्रेम, लेकिन
समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है।

यह विश्वास हीं तो है, जो लाती है करीब हमें,
फिर भी, सहमति की हद भी जानना जरूरी है।

हाँ, सच्चा प्रेम बिल्कुल निःस्वार्थ हीं होता है।
पर अपेक्षा की सीमा का जानना भी जरूरी है।

भावनाओं की गहराई में उतरना तो प्रेम है, पर,
मौन वार्तालाप की संवेदना को जानना भी जरूरी है।







शेखा झील पक्षी अभयारण्य बना भारत का 99वाँ रामसर स्थल: जानें खास बातें

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित किया गया है। इसके साथ हीं भारत में ऐसे अभयारण्यों की कुल संख्या 99 और राज्य में 12 हो गई है। शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सर्दियों के मौसम में हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावास प्रदान करती है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने यह घोषणा किया। 

श्री भूपेंद्र यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी देते हुए लिखा- “उत्तर प्रदेश ने देशभर के इस आंकड़ें को 99 तक ले जाने का श्रेय प्राप्‍त कर लिया है! शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) को रामसर स्थल घोषित करते हुए मुझे बेहद प्रसन्‍नता का अनुभव हो रहा है।” उन्होंने कहा कि इस घोषणा से स्थानीय आजीविका और वैश्विक जैव विविधता के साथ-साथ जल और जलवायु सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और यह “भारत की 99वीं वर्षगांठ” का प्रतीक है, जो हमें ऐतिहासिक शताब्दी के और निकट ले जाता है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्विकसित करने अभियान के अंतर्गत आर्द्रभूमि और पशुओं, विशेष रूप से पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को वैश्विक समुदाय से एक बार फिर सराहना मिली है।"

इस स्थल के पारिस्थितिक महत्व का उल्‍लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सर्दियों के मौसम में हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावास प्रदान करती है। मंत्री महोदय ने लोगों को इस स्थल का भ्रमण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।


आधार ऑफलाइन सत्यापन में शामिल हुए ये 100 नए संगठन, पढ़ें विस्तार से


एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में तीन महीनों के भीतर कम से कम सौ संगठन ओवीएसई के रूप में पंजीकृत हुए हैं। यह उपलब्धि आधार ऑफलाइन तंत्र के माध्यम से सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागज रहित सत्यापन को सक्षम बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है – जिसके माध्यम से सेवा प्रदाताओं और आम जनता दोनों को समान रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

इन संगठनों में केंद्र और राज्य दोनों के सरकारी विभाग, फिनटेक कंपनियां, इवेंट मैनेजमेंट और आतिथ्य-सत्कार संगठन, शिक्षा तथा परीक्षा संबंधी संस्थाएं, पहचान सत्यापन, पृष्ठभूमि सत्यापन संगठन एवं कार्यबल सत्यापन कंपनियां शामिल है।

आधार के ऑफलाइन सत्यापन में इन संगठनों के शामिल होने से सेवा वितरण की समयबद्धता में सुधार होने, परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी आने और भौतिक दस्तावेज़ प्रबंधन और मैन्युअल सत्यापन प्रक्रियाओं से जुड़ी लागतों में कमी आने की उम्मीद है।

इन ओवीएसई भागीदारों का जुड़ना आधार-आधारित, गोपनीयता-प्रथम डिजिटल सत्यापन ढांचों में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है जो उपयोगकर्ता नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए पहुंच में आसानी सुनिश्चित करते हैं।

ये संगठन आधार ऑफलाइन सत्यापन विधियों जैसे कि क्यूआर कोड-आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों का लाभ उठाकर, अब यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बिना पहचान संबंधी जानकारी "दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने" में सक्षम होंगे।

यह दृष्टिकोण निवासियों पर विशेष ध्यान देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आधार नंबर धारक केवल न्यूनतम आवश्यक जानकारी ही साझा कर सकें, और इस प्रकार गोपनीयता को बढ़ावा मिलता है। यह सत्यापन प्रक्रिया जटिलता को कम करती है और पारदर्शी एवं सहमति-आधारित बातचीत के माध्यम से विश्वास को बढ़ावा देती है।

यह वितरित मॉडल लचीलापन, विस्तारशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जो समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण और लोगों को अपनी जानकारी पर नियंत्रण रखने और स्वेच्छा से अपनी इच्छा अनुसार जानकारी साझा करने की व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

यह पहल सेवा प्रदाताओं के साथ लोगों की बातचीत को सरल बनाकर "जीवन की सुगमता" को बढ़ाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के चल रहे प्रयासों की पूरक है, जिससे आधार धारकों को शीघ्र पंजीकरण, कम कागजी कार्रवाई और अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण का लाभ मिलेगा।

जानें कैसे करें अपने महंगे फर्नीचर की देखभाल: एक्सपर्ट टिप्स

आपके घर के अंदर रखी गई महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को मेंटेन रखना सिर्फ उनकी लंबी उम्र के लिए नहीं बल्कि घरों में शांति और सकारात्मकता के लिए भी जरूरी है। घरों को सुन्दर और व्यवस्थित रखना न केवल आपको शांति और खुशगवार माहौल प्रदान करता है बल्कि वास्तु के हिसाब से भी यह पॉजिटिव और सकारात्मक  ऊर्जाओं की प्रवेश के लिए जरुरी होता है. जाहिर है कि आपके घर के अंदर रखी गई महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को  व्यवस्थित और सजाकर रखने आपके घर को शोभा बढ़ाने के साथ ही शांति और प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करता है. इसके साथ ही आपके घरो में मौजूद महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को उचित रूप से देखभाल की भी जरुरत होती है ताकि आपके घर को यह हमेशा की तरह रौनक प्रदान करती रहे. 

मानसून लगभग हमेशा उमस भरी गर्मी से राहत चाहता है. यह एक ऐसा मौसम है जो  उदासीनता के साथ ही भावनात्मक रूप से एक शांत ठहराव की अभियक्ति देता है. इसके लिए जरुरी है की हम अपने घरों के अंदर  मानसून के दौरान आंतरिक सजावट में कुछ चेंज करें ताकि हम मानसून के दौरान घर को व्यस्थित करें. जानें इस सम्बन्ध में विशेषज्ञों का क्या कहता है ताकि हम मानसून के दौरान अपने घरों के फर्नीचर और आंतरिक साज सजा को कैसे करें व्यवस्थित. 

नमी, कवक और बैक्टीरिया से कैसे बचें?
जैसा कि आप जानते हैं कि मानसून के दौरान एक साथ रखे गए फर्नीचर नमी को अवशोषित करते हैं और कवक और बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं. इसके लिए यह जरुरी है कि फर्नीचर को एक-दूसरे से दूर रखे साथ हीं अगर संभव हो सके तो घरों के अंदर रखे गए फर्नीचर को दीवार और खिड़कियों से भी दूर रखें ताकि मॉइस्चर से उन्हें बचाया जा सके. 

सामान्यत: इसके लिए सबसे सही जगह होगा कमरे के अंदर फर्नीचर को ऐसे जगह स्थान देना जहाँ प्राकृतिक प्रकाश समुचित रूप से पहुँच सके. इसके साथ ही हवा का हमेशा आना भी जरुरी है ताकि फर्नीचर को मॉइस्चर से बचाई जा सके. 

गीले कपड़ों से बचें
फर्नीचर को साफ करने के लिए गीले कपड़ों के इस्तेमाल से हमेशा बचें. ध्यान रखें कि गीले कपडे मॉइस्चर का कारण बन सकते हैं जो आपके फर्नीचर में बरसाती फंगस और बैक्टेरिया का कारन बन समते हैं. गीले कपड़े के बजाय, धूल के संचय से बचने के लिए एक हल्का , सूखे कपड़े का उपयोग करें धूल नमी को अवशोषित करती है जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ फर्नीचर नरम हो सकता है.

खिड़कियों के बहुत पास न जाएं- 
अपने फर्नीचर को खिड़कियों से दूर रखने की कोशिश करें. मानसून के दौरान बाहर से आने वाले हवा के माध्यम से घर के अंदर नमी आ सकती है जो आपके महंगे फर्नीचर के लिए घातक हो सकती है. खिड़कियों के माध्यम से आने वाले नमी के कारण  फर्नीचर का रंग भी फीका हो सकता है.

नवीनीकरण या रिनोवेशन के कार्यो से बचे- मानसून के दौरान किसी भी प्रकार के नवीनीकरण या रिनोवेशन के कार्यो को ना कहना ज्यादा सही कदम हो सकता है. 

 हवा में नमी न होने पर इमारत का रेनोवेशन, पेंटिंग और बढ़ईगीरी आदि के कार्यों पर असर पड़ता है. इस हिसाब से  मॉनसून के दौरान आवशयकता है कि आपके फर्नीचर  को आवश्यक रखरखाव देकर उनके सुंदरता और मजबूती को बढ़ाने का उपक्रम किया जाए. 

नजरिया जीने का: भगवन राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

Najariya jine ka Qualities of Lord Ram

नजरिया जीने का:  यदि आप जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं और इस जीवन में कुछ नया और अच्छा करना चाहते हैं तो हम आपके लिए लाए हैं भगवान राम के जीवन से कुछ ऐसा टिप्स जिसके माध्यम से आपके जीवन में सकारत्मक और फलदाई परिवर्तन हो सके। तो आइए जानते हैं कि भगवान राम के जीवन की उन विशेषताओं के बारे में जो उन्हे मर्यादा पुरुषोतम बनाती है और जिन्हें अपनाकर हम अपना जीवन संवार सकते हैं। 

भगवान राम के चरित्र की ये पांच महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। भगवान राम ने विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहेऔर धर्म का मार्ग उन्होंने कभी नहीं छोड़ा । उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की तथा अपने निकट आने वाले सभी का कल्याण किया चाहे वह पशु रूप में हो, पक्षी रूप में हो, अमीर  हो गरीब हो । स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। बाली का वध करने, रावण का संहार करने या पिता के वचन की रक्षा के लिए वन का मार्ग चुनने जैसे अनेक उदाहरण है जहाँ भगवान् राम ने धर्म और न्याय का मार्ग कभी नहीं छोड़ा. 

भगवान राम के चरित्र की ये  महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

सत्य:

 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सत्य के पुजारी थे। उन्होंने अपने जीवन में चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, उन्होंने झूठ कभी नहीं बोलै। उन्होंने अपने पिता दशरथ के वचन का पालन करने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया लेकिन पुत्र धर्म का त्याग नहीं किया।

धर्म: 

भगवान राम धर्म के पालनकर्ता थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास किया। भाईयों के लिए त्याग और समर्पण के लिए भी वे हमेशा तैयार रहे. उन्होंने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया। धर्म का पालन करना उन्होंने तब भी नहीं छोड़ा और  उन्होंने रावण जैसे अत्याचारी का वध करके धर्म की रक्षा की। 

दया: 

भगवान राम दयालु और करुणावान थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश की। उन्होंने सुग्रीव और हनुमान जैसे अनेकों लोगों की मदद की।  भगवान राम ने अपनी दयालुता के कारण उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया।

बेहतर प्रबंधक

भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि वे अपने सभी स्वजनों और सहकर्मियों को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया और इसी वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था। 

नैतिकता: 

भगवान राम नैतिकता के आदर्श थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा नैतिकता का पालन किया। उन्होंने रावण के साथ युद्ध करते समय भी उसके साथ नैतिकता का पालन किया।

भगवान श्रीराम के अनमोल वचन 

  • "सत्य ही धर्म है और धर्म ही परम तत्व है।"
  • "मन पर विजय ही सच्ची विजय है।"
  • "जो अपने वचन पर अडिग रहता है, वही सच्चा राजा होता है।"
  • "धन और बल क्षणिक हैं, परंतु धर्म और सत्य शाश्वत हैं।"
  • "जो अपने पिता की आज्ञा का पालन करता है, वही सच्चा पुत्र है।"
  • "दया, क्षमा और नम्रता ही मानव की सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।"
  • "संकट में धैर्य न छोड़ना ही वीरता है।"
  • "अहंकार विनाश का कारण है। विनम्रता ही सच्चा बल है।"
  • "जो धर्म के मार्ग पर चलता है, वही सच्चा विजयी होता है।"
  • "शत्रु पर विजय से पहले अपने भीतर के विकारों पर विजय आवश्यक है।"

Women Reservation Bill (महिला आरक्षण विधेयक) MCQs GK Quiz


1. महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या ?
A. शिक्षा बढ़ाना
B. महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देना 
C. रोजगार देना
D. स्वास्थ्य सुधार
 Ans: B

2. हाल ही में पारित Women Reservation Bill का नाम क्या है?
A. Shakti Act
B. Nari Shakti Vandan Adhiniyam
C. Women Power Act
D. Mahila Adhikar Act
 Ans: B

3. यह विधेयक किस संविधान संशोधन से संबंधित है?
A. 105th
B. 106th
C. 107th
D. 108th
Ans: B
4. यह बिल किन संस्थाओं में आरक्षण देता है
A. केवल संसद 
B. केवल विधानसभाएं 
C. दोनों 
D. पंचायत
 Ans: C
5.आरक्षण की अवधि कितनी है?
A. 10 वर्ष
B. 15 वर्ष
C. 20 वर्ष
D. स्थायी 
Ans: B
6. Delimitation का क्या मतलब है?
A. चुनाव 
B. क्षेत्र निर्धारण
C. कानून बनाना 
D. आरक्षण देना
Ans: B
7. इस बिल को सबसे पहले किस सरकार ने पेश किया?
A. Atal Bihari Vajpayee सरकार
B. H. D. Deve Gowda सरकार
C. Manmohan Singh सरकार
D. Narendra Modi सरकार
 Ans: B
8. पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए आरक्षण कितने प्रतिशत है?
A. 33%
B. 50% (कई राज्यों में)
C. 25%
D. 40%
Ans: B
9.Women Reservation Bill लागू होने के लिए आवश्यक शर्तें कौन सी हैं?
Census
Delimitation
Presidential Rule
A. 1 and 2
B. 2 and 3
C. 1 only
D. All
Ans: A
10. निम्नलिखित में से कौन सही है?
Bill promotes gender equality
It increases political participation
It reduces democracy
A. 1 and 2
B. 2 and 3
C. 1 only
D. All
 Ans: A

Address To Nation : जानें अब तक PM नरेंद्र मोदी ने कब और कितनी बार राष्ट्र को किया है सम्बोधन, देखें लिस्ट


आज अर्थात अप्रैल 18, 2026  को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे। ऐसी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कई सारे विषयों में से कल महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कब संबोधन किया था। इसके पहले प्रधानमंत्री ने 21 सितंबर, 2025 को राष्ट्र को संबोधित किया और नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव की पहली पूजा यानी नवरात्रि की शुरुआत के साथ जीएसटी सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य के सपनों के अनुरूप जीएसटी सुधारों, बचत उत्सव और स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार-प्रसार और खरीद पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि केवल पाँच से 18 प्रतिशत कर स्लैब देश के लोगों के हित में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री कई मौकों पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं और नोटबंदी, मिशन शक्ति, अनुच्छेद 370 का उन्मूलन, लॉकडाउन की घोषणा, टीकाकरण अपडेट आदि सहित कई सुधारों/जानकारियों का खुलासा कर चुके हैं।

निःसंदेह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन एक महत्वपूर्ण घटना है जो न केवल भारत के लोगों का, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अब तक दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधनों के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं-


  • नोटबंदी - 8 नवंबर, 2016
  • मिशन शक्ति - 27 मार्च, 2019
  • अनुच्छेद 370 का निरसन - अगस्त 2019
  • कोविड महामारी 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज - 12 मई, 2020-21
  • लॉकडाउन की घोषणा 30 जून, 2020
  • टीकाकरण अपडेट 07 जून, 2021
  • तीन कृषि कानूनों का निरसन - 19 नवंबर, 2021
  • ऑपरेशन सिंदूर, 12 मई, 2025
  • जीएसटी सुधार बचत उत्सव - 21 सितंबर, 2025

नजरिया जीने का : संसार सिर्फ आपके लिए नही बनी है, परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखें


नजरिया जीने का Inspiring thoughts: संसार सिर्फ आपके लिए नही बनी है, परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखें

नजरिया जीने का : परिस्थितियों से सामना करना एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल है और इनसे निबटने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप इन्हे स्वीकार करें और उनसे डरने की बजाय उनका सामना करने का निर्णय लें। आप इन विपरीत परिस्थितियों को ऐसे लें कि यह हमें कठिन समय में भी धैर्य और दृढ़ता बनाए रखने में मदद करता है। परिस्थितियों से सामना करना सीखने के लिए आप कुछ टिप्स की मदद ले सकते हैं:

परिस्थिति को स्वीकार करें। सबसे पहले, हमें यह स्वीकार करना होगा कि परिस्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं है। हम इसे बदल नहीं सकते, लेकिन हम इसका सामना कर सकते हैं.

परिस्थिति को स्वीकार करें। 
सबसे पहले, हमें यह स्वीकार करना होगा कि परिस्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं है और इसे बदल तो नहीं सकते, लेकिन इसका सामना कर सकते हैं और इसे आप ।

परिस्थिति का विश्लेषण करें- अगला, हमें परिस्थिति का विश्लेषण करना होगा। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि यह परिस्थिति कैसे उत्पन्न हुई और इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
एक योजना बनाएं- एक बार जब हम परिस्थिति को समझ लेते हैं, तो हमें एक योजना बनानी चाहिए। हमें यह तय करना होगा कि हम इस परिस्थिति का सामना कैसे करेंगे।
अपनी योजना पर अमल करें- अंत में, हमें अपनी योजना पर अमल करना होगा। हमें धैर्य और दृढ़ता रखनी होगी, भले ही परिस्थिति कठिन हो।
परिस्थितियों से सामना करने के लिए कुछ विशिष्ट तरीके यहां दिए गए हैं:

सकारात्मक दृष्टिकोण रखें- कठिन समय में भी, सकारात्मक दृष्टिकोण रखना महत्वपूर्ण है। इससे हमें धैर्य और दृढ़ता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अपने आप को समर्थन दें। कठिन समय में, अपने आप को समर्थन देना महत्वपूर्ण है। हम ऐसा अपने परिवार, दोस्तों, या किसी पेशेवर सलाहकार से बात करके कर सकते हैं।
स्वस्थ आदतें अपनाएं। स्वस्थ आदतें अपनाने से हमें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत रहने में मदद मिल सकती है। इन आदतों में अच्छी नींद लेना, स्वस्थ आहार खाना, और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल हैं।
परिस्थितियों से सामना करना सीखना एक समय लेने वाली प्रक्रिया है। लेकिन, इस कौशल को विकसित करने से हमें जीवन में सफल होने में मदद मिलेगी।

जीवन की खूबसूरती इसके साथ निरंतर घटने वाली प्रत्येक घटनाओं का लुत्फ उठाते हुए जीने में होती है और जब हम इसमें आनंद उठाने किंकला सीख जाते हैं, हमारे लिए जीवन का मायने हीं बदल जाती है।।।।

याद रखें, जीवन में घटनाओं पर आपका नियंत्रण हमेशा नही होती है।।।।पर आप उन घटनाओं से प्रभावित अवश्य होते हैं।।

उठना है तुझे नहीं गिरना है, जो गिरा तो फिर से उठना है,
अब रुकना नहीं इक पल तुझको, बस हर पल आगे बढ़ना है,
राहों में मिलेंगे तूफ़ान कई, मुश्किलों के होंगे वार कई,
इन सबसे तुझे न डरना है, तू लक्ष्य पे अपने जोर दे,
घुट-घुट कर जीना छोड़ दे.
-नरेंद्र वर्मा

अगर आपकी कार की स्टेयरिंग आपके हाथ में हैं और होने वाले किसी एक्सीडेंट के लिए आप खुद को दोष दे सकते हैं और यह स्वाभाविक भी है।।।।अगर गाड़ी की स्टेयरिंग आपके हाथों में है तो आपके साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी से आप कैसे बच सकते हैं।।।।
वो कहते हैं ना, "परिस्थितियां हमेशा तुम्हारे अनुकूल रहे ऐसी आशा नहीं कारों क्योंकि यह संसार सिर्फ तुम्हारे लिए थोड़े ही बना है।"

लेकिन रेल गाड़ी या हवाई जहाज या अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में भी तो हम यात्रा करने को बाध्य होते हैं जहां की स्टेयरिंग हमारे हाथो में नही होती है और फिर दुर्घटना तो कहीं भी होती है।।।


याद रखें दोस्तों, जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटनाएं हमें कुछ सीखाने के लिए आती है, बुद्धिमान लोग लेसन लेकर आगे बढ़ जाते हैं।




याद रखें दोस्तों, जीवन एक निरन्तर बहती धारा है। हर दिन अनोखा है और हर काम की अपनी चुनौतियाँ हैं। हमें अपने काम से प्यार करना सीखना चाहिए और इसके हर क्षण का आनन्द लेना चाहिए।
तू छोड़ ये आंसू उठ हो खड़ा,
मंजिल की ओर अब कदम बढ़ा,
हासिल कर इक मुकाम नया,
पन्ना इतिहास में जोड़ दे,
घुट-घुट कर जीना छोड़ दे,
-नरेंद्र वर्मा


नजरिया जीने का: पढ़ें और भी...

रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से

इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

स्व-अनुशासन के महत्त्व को समझे और जीवन को बनाएं सार्थक 

रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती



English Is Easy : जानें किलिंग, मर्डर और एसेसिनेशन शब्द के प्रयोग में अंतर और सामान्य गलतियां


Distinction Of Words के अंतर्गत हम आज जानेंगे हत्या के लिए प्रयोग किये जाने वाले तीन कॉमन उपरोक्त वर्ड्स  और उनके अर्थ तथा उनके प्रयोग को लेकर किस प्रकार की सावधानियां बरती जानी चाहिए. याद रखें कि इनके प्रयोग को लेकर विभिन्न कॉम्पिटिटिव  एग्जामिनेशन में कॉमन एरर के लिए छात्रों को कंफ्यूज करने के लिए  शब्दों का विशेष रूप  से प्रयोग किया जाता है. तो आइये जानते हैं कि किलिंग, मर्डर और एसेसिनेशन में समानताएं और विभिन्नताएं है. 

किलिंग, मर्डर और एसेसिनेशन का सामान्य अर्थ हत्या होता है जो  मुख्य रूप से इरादे, कानूनी मान्यता और टिप्पणियों के आधार पर अलग-अलग होते हैं.  


 किलिंग (आम शब्द): सबसे बड़ा शब्द; इसका मतलब है किसी भी जीवित प्राणी, चाहे वह इंसान हो या जानवर, की मौत का कारण बनना। यह एक्सीडेंटल, कानूनी (जैसे, सेल्फ-डिफेंस), या गैर-कानूनी (होमिसाइड) हो सकता है। 

मर्डर (गैर-कानूनी और बताई): किसी इंसान की पहले से सोची-समझी और गैर-कानूनी हत्या के लिए एक कानूनी शब्द। “Murder” का अर्थ है — जानबूझकर और अवैध रूप से किसी की हत्या करना। आप कह सकते हैं कि इसके लिए जान से मारना या गंभीर नुकसान पहुंचाने की बुरी नियत या इरादे की ज़रूरत होती है। इसमें स्पष्ट इरादा (malicious intent) होता है यह हमेशा कानूनी अपराध (crime) होता है।

जानें Continuous और Continual शब्द के प्रयोग में अंतर

एसेसिनेशन  : का मतलब है किसी प्रसिद्ध, महत्वपूर्ण या राजनीतिक व्यक्ति की सुनियोजित हत्या। यह हमेशा साजिश (planned) के तहत होता है और इसके सम्बन्ध में सबसे खास बात  यह होती है कि यह आमतौर पर राजनीतिक, वैचारिक या सत्ता से जुड़े कारणों के लिए  किया जाता है। पीड़ित कोई जाना-माना व्यक्ति होता है, आमतौर पर पॉलिटिक्स की दुनिया में।आप सावधान रहें कि Assassination का शिकार व्यक्ति सामान्य नहीं, बल्कि कोई सार्वजनिक हस्ती (public figure) होती है। 

दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में से एक है श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल: जानें रोचक तथ्य


तिरुवनंतपुरम, केरल में  स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को भगवान पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु के अवतार) के रुप में मान्यता  है.  केरल और द्रविड़ स्टाइल के मिले-जुले आर्किटेक्चर स्टाइल के साथ, इस मंदिर का इतिहास 8वीं सदी का है मंदिर द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। शहर के पूर्वी किले के अंदर मौजूद इस मंडी को  दुनिया का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है।

केरल और द्रविड़ स्टाइल के मिले-जुले आर्किटेक्चर स्टाइल के साथ, इस मंदिर का इतिहास 8वीं सदी का है मंदिर द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्य मूर्ति जानें खासियत 

मुख्य देवता की मूर्ति अपनी बनावट के लिए मशहूर है जिसमें 12008 शालिग्राम हैं, जिन्हें नेपाल से लाया गया था। माना जाता है कि इसे गंडकी नदी के किनारे से लाया गया था। मुख्य मूर्ति, जो 18 फिट लंबी है जिसे तीन अलग-अलग दरवाज़ों से देखी जा सकती है। पहले दरवाज़े से सिर और छाती दिखाई देती है, दूसरे दरवाज़े से हाथ और तीसरे दरवाज़े से पैर देखे जा सकते हैं।

गर्भगृह के सामने ओट्टक्कल मंडपम स्थित है जो एक ही पत्थर के स्लैब से बना मंडपम  है जो  तिरुमाला रॉक खदान से लिए गए एक बड़े एक ही पत्थर के ब्लॉक से बना है। 


मंदिर के अंदर बहुत खूबसूरत पेंटिंग और म्यूरल लगे हैं, जिनमें से ज़्यादातर में लेटे हुए भगवान विष्णु, भगवान गणपति, गज लक्ष्मी और नरसिंह स्वामी (भगवान विष्णु का आधा शेर, आधा इंसान अवतार) की आदमकद तस्वीरें हैं। 

मंदिर का झंडा (ध्वज स्तंभ) सोने की परत चढ़ी तांबे की चादरों से ढका है और लगभग 80 फीट ऊंचा है। बाली पीड़ा मंडपम और मुख मंडपम, जो अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों से सजे हॉल हैं, इस मंदिर की कुछ दिलचस्प आर्किटेक्चरल खासियतें हैं। नवग्रह मंडप एक और खास बात है जो सभी विज़िटर्स का ध्यान खींचती है। यहाँ छत पर नवग्रह (नौ ग्रह) दिखाए गए हैं।

365 स्तंभों वाला एक विशाल गलियारा 

पूरब की तरफ से गर्भगृह तक फैला चौड़ा गलियारा देखने लायक है, जिसमें 365 और एक-चौथाई ग्रेनाइट-पत्थर के खंभे हैं जिन पर बहुत अच्छी नक्काशी की गई है। मुख्य दरवाज़े के नीचे, पूरब की तरफ नाटक शाला (जिसका मतलब है ड्रामा हॉल) है। 

भारत के दिव्य देशम या 108 पवित्र विष्णु मंदिरों में से एक माने जाने वाले इस मंदिर में, भगवान विष्णु को फन वाले सांप, अनंत पर लेटे हुए दिखाया गया है। तमिल अज़वार (संतों) की रचनाओं में दिव्य देशम को भगवान विष्णु के सबसे पवित्र निवास के रूप में बताया गया है।

असल में, केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम का नाम श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के मुख्य देवता के नाम पर रखा गया है, जिन्हें अनंत (जो अनंत नाग पर लेटे हुए हैं) के नाम से भी जाना जाता है। 'तिरुवनंतपुरम' का मतलब है श्री अनंत पद्मनाभस्वामी की भूमि।

स्कंद पुराण और पद्म पुराण में ज़िक्र

पुराणों, जैसे स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी मंदिर का ज़िक्र मिलता है। मंदिर के पास जो पवित्र तालाब है, उसे पद्म तीर्थम कहा जाता है, जिसका मतलब है 'कमल का झरना।'

त्रावणकोर के सबसे मशहूर पुराने शासकों में से एक मार्तंड वर्मा ने मंदिर का बड़ा रेनोवेशन करवाया था, जिससे इसे आज का स्ट्रक्चर और रूप मिला। उन्होंने ही मंदिर में भद्र दीपम और मुराजपम त्योहार शुरू किए थे। 

1750 में, उस समय के राजा मार्तंड वर्मा ने त्रावणकोर का राज्य भगवान पद्मनाभ को समर्पित किया था। आज भी यह मंदिर त्रावणकोर के पुराने शाही परिवार के हेड वाले एक ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है।

इस शानदार मंदिर के पवित्र हॉल और पवित्र जगह ने सदियों से भक्तों और आने वालों को अपनी ओर खींचा है। आज भी श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर इस ज़मीन की समृद्ध विरासत का सबूत है।

  • मंदिर द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • इसका गोपुरम (मुख्य द्वार टॉवर) लगभग 100 फीट ऊँचा है।
  • अंदर 365 स्तंभों वाला एक विशाल गलियारा (Corridor) है।
  • स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी मंदिर का ज़िक्र मिलता है।