शत्रुच्छिद्रं प्रहरेत्: चाणक्य से जानें अर्थात शत्रु की कमजोरी को कैसे पहचाने और उचित समय पर प्रहार करें


महान आचार्य, कूटनीतिज्ञ और विद्वान चाणक्य का आज तक मूलयांकन नहीं किया जा सका है. चाणक्य ने अपने पुस्तक के माध्यम से परिवार के सदस्यों से लेकर राजा तक के लिए अनुशासन और नियमों क्व संकलन आज से सैकड़ों सालों पहले किया जो आज भी उतना हीं प्रासंगिक है. 

क्या आपने कभी सोचा है कि ताकतवर व्यक्ति भी कभी-कभी कमजोर क्यों पड़ जाता है?

चाणक्य नीति का एक महत्वपूर्ण सूत्र है—

“शत्रुच्छिद्रं प्रहरेत्।”अर्थात्—

शत्रु की कमजोरी को पहचानकर, उचित समय पर रणनीतिक कदम उठाना चाहिए।

अर्थात अपने विरोधी या शत्रु की कमजोरियों और कमियों को पहचानकर, उचित अवसर आने पर रणनीतिक रूप से उसका सामना करना चाहिए।

उपरोक्त वर्णित श्लोक के माध्यम से चाणक्य ने अपने दुश्मनों को पराजित करने के लिए उपायों का  चर्चा किया है. यहाँ  “छिद्र” का अर्थ कमजोरी, कमी या vulnerable point और “प्रहरेत्” का अर्थ प्रहार/कार्रवाई करना है। इसे आधुनिक जीवन में किसी को नुकसान पहुँचाने की सलाह के बजाय समस्या की कमजोरी पहचानकर उसका समाधान करने की रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

चाणक्य के अनुसार किसी भी संघर्ष में केवल अपनी शक्ति पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।सफल रणनीति के लिए यह समझना भी जरूरी है कि सामने वाले की ताकत क्या है और उसकी कमजोरी कहाँ है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी की कमजोरी का अनुचित लाभ उठाया जाए।

प्राचीन भारतीय नीति और राजनीति के महान आचार्य चाणक्य ने जीवन, राजनीति, कूटनीति और व्यवहार से जुड़े अनेक ऐसे सिद्धांत बताए हैं, जिनमें परिस्थितियों को समझने और सही समय पर सही निर्णय लेने पर विशेष जोर मिलता है।

शत्रु या विरोधी की कमजोरी को पहचानकर उचित समय पर रणनीतिक कदम उठाना।

यहाँ “छिद्र” का अर्थ किसी व्यक्ति की कमजोरी, कमी या vulnerable point से लिया जा सकता है और “प्रहरेत्” का अर्थ है उस स्थिति के अनुसार कार्रवाई करना।

इस सूत्र को केवल युद्ध या शत्रु के संदर्भ में देखने के बजाय जीवन की कठिन परिस्थितियों में रणनीतिक सोच के रूप में भी समझा जा सकता है।

केवल शक्ति ही पर्याप्त नहीं किसी भी संघर्ष या प्रतियोगिता में केवल अपनी शक्ति को बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता।

यदि कोई व्यक्ति अपनी ताकत के साथ-साथ अपनी कमजोरियों और सामने मौजूद चुनौती की प्रकृति को भी समझता है, तो उसके लिए बेहतर रणनीति बनाना आसान हो जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई विद्यार्थी लगातार परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है, तो उसे केवल पढ़ाई के घंटे बढ़ाने के बजाय अपनी वास्तविक समस्या पहचाननी चाहिए।

हो सकता है कि उसकी कमजोरी—

  • समय प्रबंधन में हो,
  • विषय की बुनियादी समझ में हो,
  • नियमित अभ्यास की कमी में हो,
  • या परीक्षा के दौरान होने वाली गलतियों में हो।

जब वास्तविक कमजोरी सामने आती है, तब सुधार की दिशा भी स्पष्ट हो जाती है।

चाणक्य की रणनीतिक सोच में समय का विशेष महत्व माना जाता है।

कई बार सही कदम भी गलत समय पर उठाया जाए तो अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता।

इसलिए किसी चुनौती का सामना करते समय तीन बातों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है—

स्थिति को समझें → कमजोरी पहचानें → सही समय पर कार्रवाई करें।

यही रणनीतिक सोच किसी कठिन परिस्थिति को अवसर में बदलने में सहायता कर सकती है।

अपनी कमजोरियों को भी पहचानें

इस नीति की एक महत्वपूर्ण आधुनिक व्याख्या यह भी हो सकती है कि हमें केवल दूसरों की कमजोरियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

हमें अपनी कमजोरियों को भी पहचानना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति अपनी कमियों को स्वीकार करके उन्हें सुधारने का प्रयास करता है, तो वह भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक तैयार हो सकता है।

उदाहरण के लिए—

यदि किसी व्यक्ति को पता है कि वह निर्णय लेने में जल्दबाजी करता है, तो वह महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले अधिक जानकारी जुटाने और सोचने की आदत विकसित कर सकता है।

इस तरह कमजोरी की पहचान स्वयं को मजबूत बनाने का माध्यम बन जाती है।

इस नीति का आधुनिक जीवन में संदेश स्पष्ट है कि हमारे जीवन में अनेक प्रकार की चुनौतियाँ होती हैं जैसे असफलता, डर, प्रतिस्पर्धा, समय की कमी, गलत आदतें और कठिन परिस्थितियाँ।

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए उनकी प्रकृति और कमजोर बिंदुओं को समझना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए, यदि “समय की कमी” हमारी समस्या है, तो हमें अपने समय के उपयोग का विश्लेषण करना होगा।

यदि “असफलता का डर” समस्या है, तो हमें यह समझना होगा कि डर पैदा क्यों हो रहा है।

और यदि “लगातार टालने की आदत” समस्या है, तो उसका समाधान अनुशासन और छोटे-छोटे कार्यों से शुरू किया जा सकता है।

इस प्रकार चाणक्य का यह सूत्र आधुनिक जीवन में समस्या की जड़ पहचानने और रणनीतिक समाधान खोजने की प्रेरणा देता है। अगर आप यह सोच रहे हैं की इसका अर्थ दूसरों को नुकसान पहुँचाना है तो फिर आप गलत है. 

“शत्रुच्छिद्रं प्रहरेत्” को किसी व्यक्ति की कमजोरी का अनुचित फायदा उठाने की सलाह के रूप में नहीं समझना चाहिए।

आधुनिक संदर्भ में इसका सकारात्मक संदेश यह है कि किसी चुनौती को समझे बिना उससे संघर्ष करने के बजाय पहले उसकी प्रकृति और कमजोर बिंदुओं को समझें। याद रखें, रणनीति का उद्देश्य अनावश्यक नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि कठिन परिस्थिति में विवेकपूर्ण निर्णय लेना होना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए केवल ताकत जरूरी नहीं है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि समस्या कहाँ है, कमजोरी क्या है और किस समय कौन-सा कदम उठाना उचित होगा।

चाणक्य कहते हैं कि “समस्या की कमजोरी पहचानिए, सही अवसर को समझिए और बुद्धिमानी से कदम उठाइए क्योंकि यही रणनीतिक सोच कठिन परिस्थितियों का सामना करने में हमारी सहायता कर सकती है।

नजरिया जीने का: चाणक्य नीति से जानें क्यों जमीन छोड़कर तारे पकड़ने की कोशिश गलत है


आज के इस अनिश्चितता के माहौल में जहाँ हम मोबाइल और इंटरनेट के युग में अच्छी पुस्तकों से पूरी तरह से कट चुके हैं,  चाणक्य और उनकी नीति और भी प्रासंगिक हो गई  है. सुभाषितानि जिसे संस्कृत में लिखी गई  प्राचीन  पुस्तक है, आज के जमाने में सबसे अधिक सरगर्भीत और अनुसरण करने लायक  .पुस्तक है. उसी के सन्दर्भ में श्लोक का व्याख्या आप यहाँ पाएंगे 

संस्कृत: यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते।

ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥

जो व्यक्ति अपने हाथ में जो निश्चित (पक्का) है उसे छोड़कर अनिश्चितके पीछे भागता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है और अनिश्चित तो पहले से ही नष्ट है। अर्थ स्पष्ट है कि आप निश्चित को कभी भी अनिश्चित के लिए दावं पर नहीं लगाएं। 

अनिश्चित कभी आपका हो सकता है अर्थात आप जो गेस करते हैं वह सही हो सकता है लेकिन वह भविष्य के गर्भ में हैं और संभावना आधी आधी है उसके सही या गलत होने का. लेकिन उसके  लिए आप निश्चित  दांव पर लगाते हैं तो फिर आप मूर्खता कर रहे  हैं. 

आप इसे ऐसे समझ सकते हैं. 

"क्या आप भी पक्की नौकरी छोड़कर शेयर मार्केट में रातों-रात अमीर बनना चाहते हो? तो चाणक्य की ये बात आपके लिए है!"

"चाणक्य कहते हैं - यो ध्रुवाणि परित्यज्य... जो निश्चित को छोड़ अनिश्चित के पीछे भागता है, उसका सब कुछ नष्ट हो जाता है।"

"जैसे - आपके पास एक अच्छी नौकरी है, 50 हजार महीना आ रहा है। वो निश्चित है। लेकिन आपने Instagram पर देखा कि कोई Crypto से करोड़पति बन गया। आपने नौकरी छोड़ी, सारा पैसा Crypto में लगा दिया। अब क्या हुआ? नौकरी गई, और Crypto भी डूब गया। यही है - ध्रुव भी गया, अध्रुव भी गया।"

"तो करना क्या है? पहले निश्चित  को मजबूत करो। नौकरी को पकड़ो, फिर से अनिश्चित आजमाओ और उसको सार्थक करने का प्रयास करो। जब अनिश्चित आपको लगने लगे की वह निश्चित बन गया है , तब उसे आजमाओ  छोड़ो। चाणक्य नीति यही कहती है - कभी भी जमीन छोड़कर तारे मत पकड़ो।"[

नोमैडिक एलिफेंट एक्सरसाइज़: भारत और मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, जानें खास बातें



नोमैडिक एलिफेंट जो कि भारत और मंगोलिया के बीच आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है। संयुक्त सैन्य अभ्यास के 18 वें नोमैडिक एलिफेंट संस्करण का आयोजन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में प्रारंभ हुआ।

 यह भारत और मंगोलिया में बारी-बारी से आयोजित होने वाला वार्षिक प्लाटून स्तरीय अभ्यास है, जो 21 सितंबर से 3 अक्टूबर, 2026 तक चलेगा। पिछला अभ्यास मई-जून 2025 में मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित किया गया था। भारतीय सेना और मंगोलियाई सशस्त्र बलों की ओर से 45-45 जवान इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।

नोमैडिक एलिफेंट एक्सरसाइज का उद्देश्य क्या है?

इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत अर्ध-शहरी और पर्वतीय इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के लिए दोनों पक्षों की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है।

संयुक्त प्रशिक्षण में सामरिक स्तर के अभियानों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान, संचालन अभ्यासों को अत्याधुनिक बनाने और दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में घेराबंदी और तलाशी अभियान, कक्ष गतिविधि अभ्यास, विशेष हेलीकॉप्टर अभियान, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और ड्रोन तथा ड्रोन-रोधी प्रणालियों का उपयोग आदि गतिविधियां शामिल होंगी।

 इन अभ्यासों से दोनों सेनाओं के सैनिकों को वास्तविक संचालन परिदृश्यों में एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने और संयुक्त रूप से कार्य करने की उनकी क्षमता को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

एक्सरसाइज नोमैडिक एलिफेंट 2026 भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग को और बढ़ाएगा और दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच दीर्घकालिक मित्रता और आपसी विश्वास के बंधन को मजबूत करेगा।

छत्रपति शिवाजी महाराज: जीवनी, जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ और Facts In Brief

 


छत्रपति शिवाजी महाराज को शिवाजी भोंसले के नाम से भी जाना जाता है। वे 17वीं शताब्दी में पश्चिमी भारत में एक स्वतंत्र मराठा राज्य के संस्थापक के रूप में प्रसिद्ध हुए। 17वीं सदी की शुरुआत में मराठा योद्धा वर्ग का उदय हुआ। पुणे ज़िले के भोंसले परिवार को अहमदनगर राज्य से सैन्य और राजनीतिक फ़ायदा मिला, क्योंकि वे स्थानीय थे। इसलिए, उन्हें कई विशेषाधिकार मिले और उन्होंने अपनी सेना में बड़ी संख्या में मराठा सरदारों और सैनिकों को भर्ती किया। शिवाजी, शाहजी भोंसले और जीजाबाई के बेटे थे।

शिवाजी की परवरिश पुणे में उनकी माँ और एक कुशल ब्राह्मण, दादाजी कोंडदेव की देखरेख में हुई।

दादाजी कोंडदेव ने शिवाजी को एक कुशल सैनिक और योग्य प्रशासक बनाया। वे गुरु रामदास के धार्मिक प्रभाव में भी आए, जिससे उन्हें अपनी मातृभूमि पर गर्व हुआ।

शिवाजी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ

तोरणा पर विजय: यह पहला किला था जिसे शिवाजी ने मराठा सरदार के तौर पर जीता था।

इसने 16 साल की उम्र में ही उनके साहस और दृढ़ संकल्प जैसे शासक के गुणों की नींव रखी।

इस जीत ने उन्हें रायगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे अन्य किले जीतने के लिए प्रेरित किया। इन जीतों के कारण बीजापुर का सुल्तान घबरा गया और उसने शिवाजी के पिता शाहजी को जेल में डाल दिया। 1659 ई. में शिवाजी ने फिर से बीजापुर पर हमला करने की कोशिश की, तो बीजापुर के सुल्तान ने अपने सेनापति अफ़ज़ल खान को शिवाजी को पकड़ने के लिए भेजा। लेकिन शिवाजी बच निकले और उन्होंने 'बाघ-नख' (बाघ के पंजे जैसा हथियार) से उसे मार डाला।

आखिरकार, 1662 में बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी के साथ शांति संधि की और उन्हें उनके जीते हुए इलाकों का स्वतंत्र शासक मान लिया।

कोंडाना किले पर विजय: यह किला नीलकंठ राव के नियंत्रण में था। यह लड़ाई मराठा शासक शिवाजी के कमांडर तानाजी मालुसरे और जयसिंह प्रथम के अधीन किले के रक्षक उदयभान राठौड़ के बीच लड़ी गई थी।

शिवाजी: Facts in Brief 

  •  उन्हें "भारतीय नौसेना का जनक" कहा जाता है।
  •  उन्होंने गुरिल्ला युद्ध की तकनीक शुरू की।
  •  उनकी शादी साईबाई, सोयराबाई, काशीबाई, पुतलाबाई और सगुनाबाई से हुई थी और उनके दो बेटे और तीन बेटियाँ थीं। एक शासक के तौर पर, उनकी तुलना नेपोलियन, जूलियस सीज़र और स्वीडन के राजा गुस्तावस एडोल्फस से की जाती है, जो सभी अपने-अपने समय के महान शासक थे।
  • शिवाजी महाराज मराठा राज्य के संस्थापक माने जाते हैं।
  • उनका जन्म शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।
  • उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले था।
  • उनकी माता का नाम जीजाबाई था।
  • 19 फरवरी को महाराष्ट्र में शिवाजी जयंती मनाई जाती है।
  • रायगढ़ उनके राज्य का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना।
  • उनका राज्याभिषेक 1674 में रायगढ़ में हुआ।
  • राज्याभिषेक के बाद उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की।
  • अष्टप्रधान उनकी केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग था।
  • प्रतापगढ़ अफजल खान से जुड़े संघर्ष के कारण प्रसिद्ध है।
  • 1665 की पुरंदर संधि मुगल-शिवाजी संबंधों की महत्वपूर्ण घटना थी।
  • 1666 का आगरा प्रसंग उनके जीवन की चर्चित घटनाओं में से एक है।
  • दुर्ग उनकी सैन्य और प्रशासनिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार थे।
  • उन्होंने पश्चिमी तट पर नौसैनिक शक्ति विकसित करने पर ध्यान दिया।
  • उनका निधन 1680 में रायगढ़ में हुआ।

गोलकुंडा के कुतुब शाही शासकों के साथ गठबंधन: इस गठबंधन की मदद से, शिवाजी ने बीजापुर-कर्नाटक (1676-79 ईस्वी) में अभियान चलाया और जिंजी (जिंगी), वेल्लोर और कर्नाटक के कई किलों पर कब्ज़ा किया।

अष्टप्रधान परिषद

शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में अष्टप्रधान यानी आठ प्रमुख मंत्रियों की परिषद महत्वपूर्ण थी।

इसके प्रमुख पद थे:

  • पद- प्रमुख कार्य
  • पेशवा- प्रधान प्रशासनिक अधिकारी
  • अमात्य- वित्त एवं लेखा
  • सचिव- राजकीय पत्राचार
  • मंत्री- आंतरिक कार्य/सूचना
  • सुमंत- विदेश एवं कूटनीति
  • सेनापति- सैन्य व्यवस्था
  • न्यायाधीश- न्याय व्यवस्था
  • पंडितराव- धार्मिक एवं दान संबंधी कार्य



अपोलो 11: कैसे इंसान ने चंद्रमा तक पहुंचकर इतिहास रचा?

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मानव का चंद्रमा पर पहला कदम – अपोलो 11 इतिहास का पहला मिशन था जिसने इंसानों को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतारा। 20 जुलाई 1969 को "ईगल (Eagle)" लूनर मॉड्यूल ने चंद्रमा के Sea of Tranquility (शांति का सागर) क्षेत्र में सफल लैंडिंग की।

वास्तविकता  तो यह है कि अपोलो 11 केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं था, बल्कि मानव साहस, वैज्ञानिक नवाचार और असंभव को संभव बनाने की मिसाल था। 20 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर रखा गया पहला मानव कदम आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा और उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। आइये जानते हैं अपोलो मिशन  की  खास बातें-

अपोलो 11 का मुख्य मकसद प्रेसिडेंट जॉन एफ. केनेडी का 25 मई, 1961 को किये गए  नेशनल गोल को पूरा करना था जिसका सार थे- क्रू के साथ चांद पर लैंडिंग करना और धरती पर वापस आना।

अपोलो 11 को 16 जुलाई, 1969 को केप केनेडी से लॉन्च किया गया था।

अपोलो 11 को कमांडर नील आर्मस्ट्रांग, कमांड मॉड्यूल पायलट माइकल कॉलिन्स और लूनर मॉड्यूल पायलट एडविन “बज़” एल्ड्रिन 114 गुणा 116 मील के शुरुआती अर्थ-ऑर्बिट में ले गए।


18 जुलाई को, आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन ने अपने स्पेससूट पहने और कोलंबिया से ईगल तक डॉकिंग टनल से LM को चेक करने और दूसरा TV ट्रांसमिशन करने के लिए चढ़े।

19 जुलाई को, अपोलो 11 के चांद के पीछे से धरती के संपर्क से बाहर निकलने के बाद, इसने पहला लूनर ऑर्बिट इंसर्शन मैनूवर किया।

20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग चांद की सतह पर उतरे और उन्होंने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा, “…इंसान के लिए एक छोटा कदम, इंसानियत के लिए एक बड़ी छलांग।”

पहला कदम – Neil Armstrong चंद्रमा पर कदम रखने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने।

ऐतिहासिक कथन – "यह एक इंसान का छोटा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक विशाल छलांग है।"

दूसरे व्यक्ति – Buzz Aldrin चंद्रमा पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने।

चंद्रमा पर समय – दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने लगभग 21 घंटे 36 मिनट चंद्रमा की सतह पर बिताए, जिनमें लगभग 2 घंटे 31 मिनट बाहर चलकर वैज्ञानिक कार्य किए।

चंद्र नमूने – लगभग 21.5 किलोग्राम चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए गए।

ईगल साइट 2 में सी ऑफ़ ट्रैंक्विलिटी में 0 डिग्री, 41 मिनट, 15 सेकंड नॉर्थ लैटिट्यूड और 23 डिग्री, 26 मिनट ईस्ट लॉन्गिट्यूड पर उतरा।

क्रू मेंबर 

  • नील आर्मस्ट्रांग, कमांडर
  • एडविन ई. “बज़” एल्ड्रिन जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट
  • माइकल कॉलिन्स, कमांड मॉड्यूल पायलट


लैंडिंग

  • 24 जुलाई, 1969; दोपहर 12:50 बजे EDT
  • पैसिफिक ओशन
  • रिकवरी शिप: USS हॉर्नेट
(Source-NASA)

दूरदर्शन का एक यादगार क्लासिक शो जिसने हंसी के बहाने परिवार को टीवी के सामने एक साथ बैठाया, जानें खास बातें


आज जब हम मोबाइल और इंटरनेट के फास्ट टेक्नोलॉजी को हर हाथबमैन लेकर घूम रहे है, क्या यह सच नहीं हां कि हम परिवार के अंदर  भी बाकी सदस्यों से दूर हो गए हैं। ऐसे में याद आता है दूरदर्शन का वो वक्त जब घर में एक ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविजन होता था, लेकिन तब परिवार तो एक था। दूरदर्शन द्वारा प्रसरित किये गए पुराने सीरियल न केवल उस वक्त जबरदस्त पॉपुलर रहे थें बल्कि आज भी उन्हें खास सम्मान की दृष्टि से याद किया जाता है. उस दौर में टीवी पर बहुत कम चैनल थे और दूरदर्शन का अपना अलग ही जादू था और सबसे बड़ी बात यह थी कि उस दौर में टेलीविजन के लोकप्रिय कार्यक्रमों की पहुंच समाज के बेहद अलग-अलग वर्गों तक थी।  जी हाँ, उस ऐतिहासिक सीरियल का नाम है "देख भाई देख." आइये जानते हैं कि ऐसी क्या खास बात थी सीरियल में. 

'देख भाई देख': 90 के दशक का दूरदर्शन का एक यादगार क्लासिक शो

'देख भाई देख' 1993 में शुरू हुआ और जल्द ही अपने समय के सबसे यादगार फ़ैमिली कॉमेडी शो में से एक बन गया।

इसकी कहानी दीवान परिवार के इर्द-गिर्द घूमती थी, जो मुंबई के एक पुराने बंगले में एक साथ रहते थे। शो में उन रिश्तों, मतभेदों, गलतफहमियों, रोज़मर्रा की समस्याओं और मज़ेदार स्थितियों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया था, जो तब पैदा होती हैं जब एक ही परिवार की कई पीढ़ियाँ एक ही छत के नीचे रहती हैं।

'देख भाई देख "1993 में शुरू हुआ था जो उस समय दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्क्रमों में काफी लोकप्रिय सीरियल था। सीरियल मुख्य तौर पर मुंबई के एक पुराने बंगले में साथ रहने वाला दीवान परिवार से सम्बंधित था और कहानी पारिवारिक रिश्तों, रोजमर्रा की उलझनों और हास्य के इर्द-गिर्द घूमती थी। सीरियल में नवीन निश्चल, फरीदा जलाल, शेखर सुमन, सुषमा सेठ, भावना बलसावर और कई अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में थे जिनसे दर्शक और परिवार के प्रत्येक सदस्य खुद को भी उस परिवार के सदस्य में पाते थे. 

नवीन निश्चल अर्थात बलराज दीवान परिवार में बतौर मुखिया की भूमिका निभाई और बड़े परदे पर अपनी अभिनय का लोहा मनवा चुकी फरीदा जलाल सीरियल में सुहासिनी दीवान के किरदार में नजर आईं। इसके अतिरिक्त शेखर सुमन ने समीर दीवान की भूमिका निभाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था. 

इस सीरियल की खासियत थी इसका सादापन

वैसे तो सीरियल में कई सारे रोजमर्रा के जीवन को हीं हंसी के लिए पंचलाइन के रूप में प्रयोग किया गया और शायद यह वजह है कि पर सीरियल से हर परिवार खुद को जुड़ा पाता था. खास बात यह है सीरियल के शुरुआती एपिसोड ही इस बात का संकेत देते हैं कि सीरियल का हास्य किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी से निकाला जाता था और फिर दर्शकों को किस प्रकार से बांधकर रखा जाता था. 

दर्शकों को हंसाने के लिए इसमें कोई उलझी हुई कहानी या अजीबोगरीब हालात नहीं दिखाए गए थे। इसके बजाय, 'देख भाई देख' ने उन चीज़ों में कॉमेडी ढूंढी जिनका सामना लोग अपने घरों में करते थे—जैसे परिवार में बहस, गलतफहमियां, निजी आदतें, घर की परेशानियां और साथ रहने में होने वाली मज़ेदार अफरातफरी।

इसी अपनापन भरे माहौल की वजह से दर्शक किरदारों से मज़बूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर पाए।

सीरियल के किसी एपिसोड में डायबिटीज की आशंका से परिवार परेशान होता है, तो किसी में पत्नी को पति के किसी दूसरी महिला के साथ संबंध होने का शक को लेकर हीं माथा पच्ची चलती है. कहीं रहस्यमय गुलाबी चिट्ठी परिवार में उत्सुकता पैदा करती है, तो कहीं पानी की कमी जैसी आम समस्या पूरे परिवार के लिए परेशानी बन जाती है।

कहने का मतलब यह है कि कहानी का आधार भले ही हास्य था, लेकिन उसके पीछे परिवार और रिश्तों की वास्तविक दुनिया दिखाई देती थी।

कई सारे लोकप्रिय कहानियों में एक वह काफी लोकप्रिय रही जिसमें परिवार के कुछ शरारती सदस्य एक पुस्तक के आधार पर एपिसोड में हिप्नोटाइज तो कर देते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि हिप्नोटाइज ख़त्म करने वाले पेज हीं उस पुस्तक से गायब है. 

“देख भाई देख” का निर्माण  Saraswati Audio Visuals के बैनर के तहत बनाया गया था। 





विश्व अल्जाइमर दिवस 2026 : थीम, इतिहास लक्षण और अन्य-Facts In Brief


World Alzheimer's Day 2026: प्रत्येक वर्ष की तरह इस साल भी विश्व अल्जाइमर दिवस हर साल 21 सितंबर को मनाया जा रहा है। इसको मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य अल्जाइमरऔर डिमेंशिया के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को शिक्षित करना है। विश्व अल्जाइमर दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है "जितनी जल्दी आप जानेंगे, उतना ही अधिक आप कर सकेंगे: डिमेंशिया का निदान मायने रखता है।" 

 तथ्यों के अनुसार आज दुनिया भर में 57 मिलियन से ज़्यादा लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं, जिसमें अल्जाइमर रोग सबसे आम प्रकार है और यह अनुमानित 60-70% मामलों का कारण है। हर साल डिमेंशिया के लगभग 10 मिलियन नए मामलों का पता चलता है, जो अल्जाइमर के बारे में अधिक जागरूकता, जल्द निदान और डिमेंशिया से पीड़ित लोगों और उनके परिवारों के लिए बेहतर समर्थन की निरंतर आवश्यकता को उजागर करता है।

विश्व अल्जाइमर दिवस का वैश्विक महत्व क्या है?

विश्व अल्जाइमर दिवस का जागरूकता बढ़ाने और बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। लोगों को अल्जाइमर के लक्षणों के बारे में जागरूक करना और देखभाल करने वालों का समर्थन करना हमें एक ऐसा समाज बनने में मदद करता है जो इससे जूझ रहे लोगों के प्रति अधिक समझदारी दिखाता है। यह अल्जाइमर रोग के कारणों पर अधिक शोध के बारे में जागरूकता पैदा करने का भी आह्वान करता है ताकि इसे रोकने के तरीके खोजे जा सकें।

विश्व अल्जाइमर दिवस 2026  थीम

विश्व अल्जाइमर दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है "जितनी जल्दी आप जानेंगे, उतना ही अधिक आप कर सकेंगे: डिमेंशिया का निदान मायने रखता है।" इस थीम का उद्देश्य डिमेंशिया के बारे में लगातार कम जागरूकता, कलंक और भेदभाव से निपटना है और साथ ही जल्द निदान के महत्व को उजागर करना है।

क्या आप जानते हैं कि अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है? कुछ रिसर्चर्स के अनुसार, बुज़ुर्गों की मौत की वजहों में यह बीमारी दिल की बीमारी और कैंसर के बाद तीसरे नंबर पर आ सकती है। इस बीमारी से पीड़ित ज़्यादातर लोगों में 65 साल की उम्र के बाद इसका पता चलता है। कहा जाता है कि डिमेंशिया के 60 से 80 प्रतिशत मामले अल्जाइमर की बीमारी की वजह से होते हैं।

इसलिए, हम कह सकते हैं कि अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव और धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है जो याददाश्त और याददाश्त से जुड़े दूसरे कामों को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। यह तब होता है जब दिमाग में बीटा-अमाइलॉइड वाले प्लाक बन जाते हैं।

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता और सबसे आसान काम करने की क्षमता भी खत्म हो जाती है। समय के साथ, अल्जाइमर के लक्षण और खराब हो जाते हैं; व्यक्ति के लिए हाल की घटनाओं को याद रखना, तर्क करना और यहाँ तक कि जिन लोगों को वे जानते हैं, उन्हें पहचानना भी मुश्किल हो जाता है।

अल्जाइमर की बीमारी के बारे में कुछ बातें

अल्जाइमर की बीमारी का नाम डॉ. एलॉइस अल्जाइमर के नाम पर रखा गया है। उन्होंने एक महिला के दिमाग के टिश्यू में कुछ बदलाव देखे थे, जिसकी मौत एक असामान्य मानसिक बीमारी से हुई थी। यह दूसरी बीमारियों के साथ भी हो सकती है।

अल्जाइमर की बीमारी सिर्फ़ याददाश्त खोना नहीं है, बल्कि याददाश्त कम होना इस बीमारी का एक मुख्य लक्षण है। 

यह दिमाग के अंदर 'टैंगल्स' या 'प्लाक' के रूप में जाने जाने वाले प्रोटीन के जमा होने से भी होती है और इसे तीसरे प्रकार की डायबिटीज भी कहा जाता है।

इस अल्जाइमर बीमारी के कारण दिमाग की कोशिकाएं खराब हो जाती हैं और सोचने-समझने की अलग-अलग क्षमताओं पर असर पड़ता है, जैसे याददाश्त खोना, भाषा की समस्याएँ और अजीब व्यवहार।

अल्जाइमर की बीमारी का  वजह दुर्लभ जेनेटिक बदलाव होते हैं। यानी ऐसे जीन जो हमारे नियंत्रण में नहीं होते और हमें विरासत में मिलते हैं, जैसे कि एपोलिपोप्रोटीन जीन का एक रूप जिसे ApoE (जीन के तीन रूपों में से एक) कहा जाता है; इसी वजह से कम उम्र में अल्जाइमर (early-onset Alzheimer's) की शुरुआत हो सकती है।


SLINEX-26: भारत-श्रीलंका समुद्री अभ्यास, Facts in Brief


श्रीलंका-भारत के बीच द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास SLINEX-26 का 13वां संस्करण भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित होने जा रहा है। यह अभ्यास 17 से 21 सितंबर, 2026 तक चलेगा। अभ्यास की शुरुआत 'हार्बर चरण' (Harbour Phase) से हुई है, जिसके बाद 'समुद्री चरण' (Sea Phase) होगा। यह अभ्यास एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री माहौल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का परिणाम है और भारत व श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही समुद्री साझेदारी को और मजबूत करता है। 

 SLINEX क्या है?

SLINEX भारत और श्रीलंका के बीच एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसे दोनों देशों के बीच आपसी तालमेल (interoperability), समुद्री सहयोग और आपसी समझ को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके हार्बर और समुद्री चरण हिंद महासागर में पेशेवर आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

2005 में शुरू की गई SLINEX पहल अब दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग, आपसी तालमेल और आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गई है। 

SLINEX-26 में भाग लेने के लिए, भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कार्वेट INS कवरत्ती और फ्लीट टैंकर INS ज्योति शामिल होंगे, जबकि श्रीलंका नौसेना का प्रतिनिधित्व SLNS सिंदुराला करेगा।

ईस्टर्न नेवल कमांड की देखरेख में आयोजित हार्बर चरण की शुरुआत एक उद्घाटन समारोह और INS कवरत्ती पर SLNS सिंदुराला के क्रू (चालक दल) के स्वागत समारोह के साथ हुई।

इस चरण में पेशेवर बातचीत, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा (cross-deck visits), बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान, योग, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। इसके बाद होने वाले समुद्री चरण में समुद्र में समन्वित गतिविधियों के माध्यम से ऑपरेशनल तालमेल और आपसी सहयोग (interoperability) को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

भारत के 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन के अनुरूप, SLINEX-26 एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री माहौल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और भारत व श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही समुद्री साझेदारी को और पुख्ता करता है।

 SLINEX-25

श्रीलंका-भारत नौसैनिक अभ्यास (SLINEX-25) का 12वां संस्करण दो चरणों में आयोजित किया गया – पहला चरण 14 से 16 अगस्त 2025 तक कोलंबो में 'हार्बर चरण' (बंदरगाह पर होने वाला चरण) और उसके बाद 17 से 18 अगस्त 2025 तक 'सी फ़ेज़' (समुद्री चरण) आयोजित हुआ।

SLINEX-24

SLINEX-24 (श्रीलंका-भारत अभ्यास) भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान की देखरेख में 17 से 20 दिसंबर 2024 तक विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया था।

शांति के समय अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय लकड़ी की छड़ी से काम चलाना पड़ता है

 अफ्रीका की एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है —

'जो व्यक्ति शांति के समय अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय लकड़ी की छड़ी से काम चलाना पड़ता है।" 

मतलब स्पष्ट है।।

याद रखें दोस्तों, इस कहावत में जीवन की वह सच्चाई छुपी है जो हमारे जीवन में हर वक्त प्रासंगिक है। कहने का अर्थभाई कबजो व्यक्ति शांति के समय में अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय छड़ी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यहीं तो जीवन का एकमात्र सच्चाई है। भविष्य की तैयारी करें। जब आपके पास ताकत और अवसर हों, तो उन्हें बर्बाद न करें, क्योंकि जब मुसीबत आएगी, तो हो सकता है कि आपके पास वो संसाधन (resources) न हों जिनकी आपको ज़रूरत है।

जीवन में सफलता के लिए हम अपने पढ़ाई, स्किल सीखने या वित्तीय सुरक्षा को अहमियत देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम भविष्य के लिए कितने जागरूक और सचेत हैं। 

जब आज आपके पास ताकत है, समय है और मौके हैं, तो उन्हें फालतू चीज़ों में बर्बाद मत कीजिए।

क्योंकि जब मुसीबत आती है, तब पछताने का वक्त नहीं मिलता। अगर आज आपने अपने संसाधनों की कद्र नहीं की, तो कल आपको मजबूरियों से समझौता करना पड़ेगा।

इसलिए आज ही खुद को मजबूत बनाइए!

मोबाइल की आदत छोड़ें, IQ बढ़ाएं: बच्चों के लिए इंग्लिश ब्रेन टेस्ट

 


IQ (इंटेलिजेंस कोशंट) एक स्कोर है जो बच्चे की सोचने-समझने की काबिलियत को मापता है—जैसे सोचने-समझने की स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग, याद रखने और समझने की काबिलियत। बच्चों के साथ डील करते समय इसे मापने में मदद मिलती है। साइकोलॉजी के फील्ड में इसका बहुत इस्तेमाल होता है। अपने बच्चे का IQ चेक करना और उन्हें रेगुलर ब्रेन एक्सरसाइज के लिए बढ़ावा देना ज़रूरी है।

नीचे दी गई इमेज में, बीस इंग्लिश शब्दों का कलेक्शन है और आपको उन्हें बच्चे को चालीस सेकंड के लिए दिखाना है और फिर उन्हें सभी शब्द याद करके लिखने के लिए कहना है।




Top MCQs on BRICS Summit: Quiz और अन्य कॉम्पिटिशन एग्जाम में पूछे गए



BRICKS का सम्मेलन अभी भारत में आयोजित हो रहा है जिसमें दुनिया के सभी शीर्ष नेतागण शामिल हुए हैं। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। साथ ही लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में BRICKS पर आधारित सवाल पूछे गए हैं। आने वाले प्रतियोगिता परीक्षाओं जैसे CGL, Bank PO, state PSC आदि के लिए हम लाये हैं पूछे गए प्रश्न।
1. BRICS का पूरा नाम क्या है?
A. Brazil, Russia, India, China, South Africa
B. Britain, Russia, India, China, Singapore
C. Brazil, Russia, Indonesia, China, South Africa
D. Brazil, Romania, India, China, South Africa

Answer: A

2. BRICS की मूल अवधारणा में ‘BRIC’ शब्द किस अर्थ में प्रयोग किया गया था? 
A. Brazil, Russia, India and China
B. Brazil, Romania, India and China
C. Britain, Russia, India and China
D. Brazil, Russia, Indonesia and China

Answer: A

3. ‘BRIC’ शब्द किस अर्थशास्त्री ने गढ़ा था? 
A. Joseph Stiglitz
B. Jim O’Neill
C. Paul Krugman
D. Jeffrey Sachs

Answer: B

4. BRIC को BRICS कब बनाया गया?
A. 2006
B. 2008
C. 2010
D. 2012

Answer: C

5. BRICS में South Africa किस वर्ष शामिल हुआ? 
A. 2008
B. 2009
C. 2010
D. 2011

Answer: D

6. BRICS का पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ था?
A. Moscow, Russia
B. Brasília, Brazil
C. Beijing, China
D. New Delhi, India

Answer: A

7. पहला BRIC Summit किस वर्ष आयोजित हुआ था? 
A. 2006
B. 2008
C. 2009
D. 2010

Answer: C

8. BRICS का मुख्य उद्देश्य क्या है? 
A. Military alliance
B. Economic and political cooperation
C. Currency union
D. Defence treaty

Answer: B

9. BRICS New Development Bank (NDB) की स्थापना किस Summit में हुई? 
A. Durban Summit
B. New Delhi Summit
C. Fortaleza Summit
D. Xiamen Summit

Answer: C

10. New Development Bank (NDB) का मुख्यालय कहाँ है?
A. New Delhi
B. Shanghai
C. Moscow
D. Johannesburg

Answer: B

11. New Development Bank को पहले किस नाम से जाना जाता था?
A. BRICS Development Bank
B. BRICS Infrastructure Bank
C. Emerging Nations Bank
D. Global Development Bank

Answer: A

12. BRICS का Contingent Reserve Arrangement (CRA) मुख्यतः किससे संबंधित है?
A. Defence cooperation
B. Financial stability
C. Space cooperation
D. Agricultural cooperation

Answer: B

13. BRICS का Fortaleza Summit किस वर्ष हुआ था?
A. 2012
B. 2013
C. 2014
D. 2015

Answer: C

14. 2016 BRICS Summit किस देश में आयोजित हुआ था? 
A. China
B. India
C. Brazil
D. Russia

Answer: B

15. 2017 BRICS Summit किस शहर में आयोजित हुआ था?
A. Shanghai
B. Beijing
C. Xiamen
D. Guangzhou

Answer: C

16. 2019 BRICS Summit किस देश में आयोजित हुआ था? 
A. Brazil
B. Russia
C. India
D. China

Answer: A

17. 2021 BRICS Summit की अध्यक्षता किस देश ने की थी? 
A. India
B. China
C. Russia
D. Brazil

Answer: A

18. 2023 BRICS Summit किस शहर में आयोजित हुआ था? 
A. Johannesburg
B. Cape Town
C. Pretoria
D. Durban

Answer: A

19. 2023 BRICS Summit का प्रमुख परिणाम क्या था? / What was a major outcome of the 2023 BRICS Summit?
A. Creation of NATO
B. BRICS expansion
C. Establishment of the UN
D. Creation of SAARC

Answer: B

20. निम्नलिखित में से कौन-सा देश 2023 में BRICS के विस्तार के दौरान आमंत्रित नए सदस्यों में शामिल था? / Which of the following was among the countries invited to join BRICS during its 2023 expansion?
A. Egypt
B. Japan
C. Germany
D. Canada

Answer: A

21. 2024 में BRICS की अध्यक्षता किस देश के पास थी? / Which country held the BRICS chairmanship in 2024?
A. India
B. Russia
C. China
D. South Africa

Answer: B

22. BRICS में ‘S’ किस देश को दर्शाता है? / The ‘S’ in BRICS represents which country?
A. Singapore
B. Saudi Arabia
C. South Africa
D. South Korea

Answer: C

23. निम्नलिखित में से कौन BRICS का संस्थापक सदस्य नहीं था? / Which of the following was NOT one of the original BRIC members?
A. Brazil
B. Russia
C. South Africa
D. China

Answer: C

24. BRICS के संदर्भ में New Development Bank का प्रमुख उद्देश्य क्या है? / What is the primary purpose of the BRICS New Development Bank?
A. Financing infrastructure and sustainable development projects
B. Conducting military operations
C. Regulating global trade
D. Issuing passports to BRICS citizens

Answer: A

25. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन BRICS के बारे में सही है? / Which statement about BRICS is correct?
A. It is a military alliance
B. It promotes cooperation among emerging economies
C. It is a United Nations agency
D. It is a common-currency union

Answer: B

26.  16 वाँ BRICS समिट कहां हुआ था?
A. Kazan, Russia
B. Beijing
C  Johannesburg
D. Moscow 
*Ans: a) Kazan, Russi

English Is Easy: 20 Important Vocabularies Common asked in Competitive Exams


20 sets of advanced English words with meanings. They are arranged from moderately difficult to highly challenging. These word meaning are important for forthcoming competitive exams and it will be beneficial for you to score and leading on your opponents in the exams. 

Set Word Meaning
1 Ephemeral Lasting for a very short time
2 Meticulous Very careful and precise
3 Ambiguous Having more than one possible meaning
4 Benevolent Kind and generous
5 Resilient Able to recover quickly from difficulties
6 Pragmatic Dealing with things realistically and practically
7 Ubiquitous Present everywhere
8 Eloquent Fluent and persuasive in speaking or writing
9 Scrutinize To examine very carefully
10 Alleviate To make something less severe
11 Tenacious Determined; not giving up easily
12 Candid Honest and straightforward
13 Conundrum A confusing or difficult problem
14 Fastidious Very attentive to detail; hard to please
15 Ineffable Too great to be expressed in words
16 Magnanimous Generous and forgiving, especially toward rivals
17 Obfuscate To deliberately make something unclear or confusing
18 Perspicacious Having keen insight and good judgment
19 Recalcitrant Stubbornly refusing to obey authority
20 Sagacious Wise and showing sound judgment

Now Check your IQs and reply all these questions given below-

 1. Ephemeral means:

A. Permanent
B. Short-lived
C. Powerful
D. Dangerous
Answer: B

2. Ubiquitous means:
A. Rare
B. Everywhere
C. Invisible
D. Ancient
Answer: B

3. Magnanimous means:
A. Selfish
B. Brave
C. Generous and forgiving
D. Angry
Answer: C

4. Obfuscate means:
A. Simplify
B. Clarify
C. Confuse intentionally
D. Ignore
Answer: C

5. Perspicacious means:
A. Lazy
B. Highly perceptive
C. Nervous
D. Humorous
Answer: B

6. Recalcitrant means:
A. Cooperative
B. Stubbornly disobedient
C. Friendly
D. Excited
Answer: B

7. Ineffable means:
A. Impossible to express in words
B. Easily explained
C. Very loud
D. Extremely common
Answer: A

8. Tenacious means:
A. Weak
B. Persistent
C. Forgetful
D. Curious
Answer: B

9. Fastidious means:
A. Careless
B. Hard to satisfy because of high standards
C. Funny
D. Honest
Answer: B

10. Conundrum means:
A. Celebration
B. Difficult problem
C. Success
D. Adventure
Answer: B

11. Pragmatic means:
A. Imaginative
B. Practical
C. Emotional
D. Wealthy
Answer: B

12. Alleviate means:
A. Increase
B. Reduce or relieve
C. Destroy
D. Build
Answer: B

13. Eloquent means:
A. Silent
B. Fluent and persuasive
C. Shy
D. Confused
Answer: B

14. Benevolent means:
A. Kind
B. Cruel
C. Proud
D. Lazy
Answer: A

15. Meticulous means:
A. Careful and precise
B. Quick
C. Angry
D. Loud
Answer: A

16. Ambiguous means:
A. Clear
B. Having multiple meanings
C. Honest
D. Fast
Answer: B

17. Scrutinize means:
A. Ignore
B. Examine carefully
C. Celebrate
D. Predict
Answer: B

18. Sagacious means:
A. Wise
B. Foolish
C. Timid
D. Confident
Answer: A

19. Candid means:
A. Honest and direct
B. Secretive
C. Confused
D. Arrogant
Answer: A

20. Resilient means:
A. Easily broken
B. Able to recover quickly
C. Slow
D. Quiet
Answer: B

Scoring Guide

  • 18–20: Exceptional Vocabulary IQ
  • 15–17: Excellent
  • 12–14: Very Good
  • 8–11: Good
  • 5–7: Average
  • 0–4: Needs Vocabulary Improvement

मन की बात: जानें किस वेबसाइट का चर्चा प्रधान मंत्री ने किया जो बताएगा एक क्लिक में देश का सम्पूर्ण इतिहास


मन की बात की 137वीं कड़ी में प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एक खास वेबसाइट का चर्चा किया जिसका नाम है www.bharatrajya.com. प्रधानमंत्री ने इस के अंतर्गत वेबसाइट को बनाने वाले श्रीमान कृष्णा शेषाद्री से वार्तालाप भी किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि  
"कुछ समय पहले social media पर किसी ने लिखा था “आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इतिहास को रोचक बनाने के अपने प्रयास का शुभारंभ कर रहा हूँ।” उन्होंने आगे बताया ये idea बहुत ही simple है। आप इस website पर जाएँ और कोई भी एक वर्ष चुन लें। यहाँ आपको आसानी से पता चलेगा कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसका शासन था। मुझे भी यह काफी दिलचस्प लगा। मैंने सोचा कि इसके बारे में और अधिक जानकारी ली जाए। मुझे पता चला कि ये काम मुंबई में रहने वाले श्रीमान कृष्णा शेषाद्री जी ने किया है। मजे की बात ये है कि कृष्णा जी ने website का नाम भी बहुत simple रखा है www.bharatrajya.com उन्होंने जो प्रयास किया है, उसकी जानकारी आप लोगों तक भी जरूर पहुंचनी चाहिए। इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न सीधे श्री कृष्णा जी से ही बात की जाए।"

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी नमस्ते।

कृष्णा शेषाद्री : नमस्ते sir नमस्ते।

प्रधानमंत्री : भाई, मुझे पता चला है, न आप tech की दुनिया से हो, न आप history teacher हो, फिर भी, आपने technology का प्रयोग करके history की site बना डाली। तो मुझे बहुत उत्सुकता है, ये सब कैसे हुआ?

कृष्णा शेषाद्री: धन्यवाद sir आपसे बात करके बहुत मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है तो sir मेरे बारे अगर मैं थोड़ा बताऊँ, तो sir मैं एक engineer था, फिर मैंने MBA किया, फिर मैं marketing field में चला गया लेकिन ये सब जब भी करता था तब भी मेरे को बचपन से इतिहास (History) में बहुत interest था। तो I always wanted to do something on History, how to make it interesting and मेरे को ये भी लगता था कि हम जैसे History सिखाते हैं  उसमें हम बहुत improvement कर सकते हैं उसमें हम बहुत बदलाव लेकर आ सकते हैं History को एक कहानी बनाकर लोगों तक पहुंचा सकते हैं।

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी, भारतीय इतिहास का ऐसा कौन-सा पहलू है, जिसके बारे में आपको लगा कि इसकी जानकारी ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को होनी चाहिए ?

कृष्णा शेषाद्री: Sir, अगर हम भारतीय इतिहास जैसे हमारे स्कूलों या  कॉलजों में सिखाया जाता है जैसा आप देखते हो वो एक कोई एक empire या कोई एक kingdom उसके दृष्टिकोण से, उसके नजरिए से सिखाया जाता है और वो empires को disproportionate attention भी मिलता है। इस चक्कर में बाकी के बहुत सारे जो हमारे साम्राज्य थे जो महान साम्राज्य थे जैसे cholas, pallavas, karkota dynasty था कश्मीर में Ahoms थे जिन्होंने कम से कम 600 साल असम में अपनी संस्कृति, अपनी values system को बरकरार रखा ये सबके बारे में हम नहीं जानते। तो मैंने सोचा कि कोई ऐसा कोई site बनाएं जो ऐसे महान साम्राज्य को भी लोगों से इनको introduce किया जाए।  

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आप इतनी मेहनत करते हैं, मैं ऐसे ही आपको hypothetical सवाल पूछता हूँ। अगर आपको Indian History के किसी भी तीन लोगों से बातचीत का अवसर मिले, तो आप किनसे बात करना चाहेंगे और क्यों ?

कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर, तो पहले मैं बात करूंगा, राजाराजा चोला या राजेन्द्र चोला सर जो चोला साम्राज्य के सबसे most powerful या सबसे important राजाओं में से थे, तो मैं उनसे ये जानना चाहूँगा कि पहले उनको ये vision कैसे आया जैसे उन्होंने बृहदेश्वर temple या गंगईकोंडा चोलपुरम जो बड़े बड़े मंदिर हैं, शिवजी के मंदिर हैं, वो execute करने के लिए वो vision कहाँ से आया वो planning कैसे की, उनको वो thought कैसे आया कि हम ऐसा कुछ बना के जाएं जो अगले हजार या दो हजार साल तक दूसरे लोगों को प्रेरित कर सके।  तो वो मुझे उनसे जानना है। और दूसरी जो personality हैं ये actually मेरे हिसाब से Indian history में एक बहुत under rated personality है।  सर उनका नाम है हेमू, तो हम उनके बारे में ज्यादा-से-ज्यादा Indian इतिहास में दो या तीन line पढ़ते हैं। हमको ये नहीं पता है कि वो जो हेमू जो थे वो एक common man थे, एक साधारण इंसान थे, वो एक व्यापारी थे, उधर से उन्होंने एक empire खड़ा किया और वो not only वो एक empire builder थे वो एक military thinker भी थे, military genius थे जिन्होंने अपने carrier में 23 लड़ाईयाँ लड़ीं उसमें से उन्होंने 22 लड़ाईयां जीतीं, तो उनका thought process कैसा था, और वो कैसे एक आम आदमी से इतने बड़े राजा बने, वो उनका वो journey मैं जानने की बहुत दिलचस्पी रखता हूँ सर। और तीसरी जो है ये this is a very interesting personality, she is a women sir, त्रिभुवन महादेवी, तो ये जो है एक ओडिसा में एक kingdom है जिसका नाम था भौमाकारा dynasty तो इनकी भी कहानी बहुत दिलचस्प है। उन्होंने जब 850 ईस्वी के आसपास जो साल में उनके जो neighbor पाला empire ने, इनके empire पर धावा बोल दिया था सर, और इनके राजा जो इनके husband थे वो उस लड़ाई में शहीद हो गए थे। और इसकी वजह से वो empire बहुत छोटा हो गया और उसके जो सरदार थे, उसके जो leaders थे वो empire छोड़कर जाने लग गए थे तो ये जो त्रिभुवन महादेवी जो lady थी इन्होंने वो सरकार संभाली and she became one of the first independent rulers in the history of India और उन्होंने सरकार को not only stabilize  किया but इतना उसको powerful बना दिया कि वो अगले सौ साल तक कलिंगा और वो area में राज करते रहे। तो these are three interesting personalities whom I  would like to meet in history sir. 

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपको अब लगता है कि इतिहास को जी रहे हैं। आप पूरी तरह इतिहास में डूब चुके हैं। देखिये मैंने भी बड़े उत्सुकता के साथ आपकी site देखी है और मुझे सबसे interesting ये लगा कि आपकी site पर एक ऐसा tab है, जहां लोग corrections और suggestions भी दे सकते हैं। ऐसे constructive feedback के लिए open रहना ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। क्या आपको लोगों से सुझाव मिलना शुरू हुआ है क्या? और आप उन पर कैसे काम करते हैं ?

कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर इन लोगों से बहुत सुझाव आते हैं सर। सुझाव दो प्रकार के आते हैं। एक सुझाव ऐसे आते हैं जो हमको correction suggest करते हैं – इस प्रदेश में, इस time में, इस राष्ट्र में ये राजा थे या इस time में ये युद्ध हुआ था तो ऐसे कुछ suggestion आते हैं। दूसरे suggestion आते हैं कि आप इस website में ये feature भी डाल सकते हैं या वो feature भी डाल सकते हो तो हमको दोनों प्रकार के suggestion आते हैं तो जैसे अगर हमको ऐसा एक  suggestion आए कि इस प्रदेश में, इस राजा ने, इस time पे राज किया था तो हम वो suggestion को लेते हैं, तो हमारे जो sources हैं। जैसे हमको किसी ने suggestion में दिया था कि आपने India को तो दिखा दिया अगर प्रदेश के level पर भी दिखा सकते हैं तो और अच्छा होगा तो हमने वो feature implement किया और फिर हमने दूसरे feature आया था जिसमें हमने एक trump card जैसा बनाया था सारे empire के data statistics देके ताकि वो बच्चों तक पहुँच सके तो किसी ने एक suggestion दिया था कि उसको आप एक जगह पर लेकर आइए ताकि हम सब download करके हम सब share कर सके तो वो हम feature implement कर रहे हैं। तो हमे इतना जानना important है कि हम गलती करेंगे, हम क्योंकि हम सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं और वो जानके ही हमने वो correction का tab लगाया ताकि ये हम सबकी site हो और आगे जाके सारे contributions के हिसाब से हम एक ऐसा site बनाए जो अगले कुछ साल तक इतिहास एक मजेदार subject बनाए।

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपने सचमुच में एक बहुत बड़ा काम किया है। अच्छा History के अलावा आपकी कई सारी Hobbies होगी और भी बहुत कुछ करते होंगे आप ?

कृष्णा शेषाद्री: हाँ, नहीं sir हम थोड़े boring type आदमी हैं sir.

प्रधानमंत्री : हँसते हुए

कृष्णा शेषाद्री: हम technology में बहुत दिलचस्पी रखते हैं और इतिहास में रखते हैं और जब अब technology और इतिहास मिल गया इसी में हम डूबे रहते हैं पूरा दिन।

प्रधानमंत्री : चलिए कृष्णा जी आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामना है आपने एक अच्छी शुरुआत की है और आपका तरीका भी ऐसा है कि लोग जुड़ेंगे मुझे पूरा विश्वास है मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।