कल्पक्कम: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त किया, जानें क्या होता है क्रिटिकैलिटी


भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍धि हासिल की है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी (स्व-धारित नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया की स्थिति) प्राप्त की, जो एक सतत् परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत का संकेत है। यह पीएफबीआर एक 500 मेगावाट विद्युत (एमडब्ल्यूई) रिएक्टर है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) द्वारा कल्पक्कम नाभिकीय परिसर में निर्मित किया गया है।

इस उपलब्धि के साथ, भारत आधिकारिक रूप से अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है, जिसकी परिकल्पना सबसे पहले भारत के परमाणु कार्यक्रम के वास्तुकार डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने की थी। यह कीर्तिमान वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्ण रूप से संचालन में आने के बाद, भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा जो एक वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालन करेगा।

यह उपलब्धि परमाणु ऊर्जा विभाग के नेतृत्व में किए जा रहे दशकों के वैज्ञानिक प्रयासों का प्रमाण है। यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विश्वसनीय, निम्न-कार्बन ऊर्जा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। इसके अतिरिक्त, यह भारत को वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के अपने लक्ष्य के और निकट लाता है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा की गई थी।

क्रिटिकैलिटी क्या है?

क्रिटिकैलिटी वह बिंदु है जिस पर एक सतत् और नियंत्रित नाभिकीय विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया प्रारंभ होती है। इस अवस्था में विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉन की संख्या अवशोषण और रिसाव के चलते खोए गए न्यूट्रॉनों के बराबर होती है, जिससे स्थिर ऊर्जा उत्पादन प्राप्त होता है। यह निर्माण चरण से संचालन चरण में परिवर्तन को दर्शाता है और ऊष्मा तथा अंततः विद्युत उत्पादन की दिशा में पहला आवश्यक कदम है।

भारत का वर्तमान परमाणु ऊर्जा परिदृश्य: Five Facts


भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम देश के विद्युत मिश्रण में लगातार उपस्थिति बनाए हुए है। यह अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ आने वाले वर्षों के लिए उल्लेखनीय विस्तार की योजना बनाई गई है।

स्थापित क्षमता: 

भारत की वर्तमान परमाणु क्षमता 8.78 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है। वर्ष 2024–25 में, देश भर में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने 56,681 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन किया।

स्थिर योगदान: 

परमाणु ऊर्जा ने भारत के कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 3% हिस्सा लगातार प्रदान किया है। वर्ष 2024–25 में इसका हिस्सा 3.1% रहा।

नियोजित विस्तार:

 आने वाले वर्षों में भारत की परमाणु क्षमता लगभग 3 गुना बढ़ने वाली है। स्वदेशी 700 मेगावाट (एमडब्ल्यू) रिएक्टरों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित किए जा रहे 1,000 मेगावाट रिएक्टरों के साथ, स्थापित क्षमता वर्ष 2031–32 तक 22.38 गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक पहुँचने का अनुमान है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग: 

भारत ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नागरिक परमाणु सहयोग पर 18 देशों  के साथ अंतर-सरकारी समझौतों (आईजीए) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुभाषितम: जानें क्या है विपरीत परिस्थितियों में बिना विचलित हुए सफलता का मार्ग


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की 11वीं वर्षगांठ पर इसकी सफलता की सराहना करते हुए  एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला गया है.

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि ठीक 11-वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना की सफलता यह दर्शाती है कि जब किसी व्यक्ति को सही अवसर मिलते हैं, तो वह न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है। इस संदर्भ में, श्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"आज से ठीक 11 वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है। इस योजना की सफलता बताती है कि सही अवसर मिलने पर व्यक्ति न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है।

आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता।

यमर्था नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते॥


#11YearsOfMUDRA"

जो व्यक्ति अपनी योग्यता से भली-भांति परिचित हो, आत्मनिर्भर होकर कल्याणकारी कार्य करने में तत्पर हो, विपरीत परिस्थितियों को धैर्यपूर्वक सहन करता हो और सदा सदाचार का पालन करता हो, जिसे लोभ अपने मार्ग से विचलित नहीं कर पाता, वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है।

दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन


केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आज दिल्लीवासियों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने दिल्लीवासियों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए 2019 में पीएम-उदय योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने के वर्तमान निर्णय से निवासियों को अपनी संपत्तियों के पंजीकरण के लिए आगे आने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।

अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय

अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।

इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।

जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।

सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।

पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।

31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।

योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।

इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय

इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।

• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।

• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।

• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।

• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।

• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।

• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया

  • आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
  • अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
  • चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
  • यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
  • यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
  • यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
  • जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।

प्रेम: हमेशा एक नया आरंभ और एक नया सफर शुरू होता है, पढ़ें दिल को छू लेने वाले ये कोट्स

नजरिया जीने का: प्रेम-जीवन के आयाम को पाने का माध्यम है प्रेम @वैलेंटाइन डे

Valentine Day: प्रेम एक ऐसा शब्द है जिसकी व्याख्या करना मुश्किल है। यह एक भावना है जो खुशी, दुख, उत्साह और आशा सहित कई तरह की भावनाओं को शामिल कर सकती है। प्रेम हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमें खुशी, संतुष्टि और अर्थ प्रदान करता है। यह हमें दूसरों के साथ जुड़ने और संबंध बनाने में मदद करता है। 

प्रेम: एक शक्तिशाली भावना

वास्तव प्रेम एक ऐसे शक्तिशाली भावना है जो हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और सच तो यह है कि यह हमारे जीवन की मायने बदल कर एक नया आयाम देती है। यह हमें खुशी, संतुष्टि और अर्थ प्रदान करता है। यह हमें दूसरों के साथ जुड़ने और संबंध बनाने में मदद करता है। प्रेम दुनिया में एक बेहतर जगह बनाने की शक्ति रखता है।

अक्सर यह कहा जाता है कि हर इंसान को जीवन में प्रेम का होना जरुरी है क्योंकि यही तो है जो हमें न केवल अपने दोस्तों के साथ बल्कि उससे से भी पहले अपने माता पिता, परिवार और हमें अपनी संस्कारों से बांधकर रखता है. 

यह प्रेम ही तो है जो हमें बताता है की निम्न मानवीय गुणों का हमारे लिए क्या महत्त्व है-
खुशी: प्रेम हमें खुशी और संतुष्टि प्रदान करता है। जब हम किसी से प्यार करते हैं, तो हम उस व्यक्ति के साथ रहने और समय बिताने का आनंद लेते हैं। प्रेम हमें खुशी, उत्साह और आशा की भावनाओं से भर देता है।
संबंध: प्रेम हमें दूसरों के साथ जुड़ने और संबंध बनाने में मदद करता है। प्रेम के माध्यम से, हम दूसरों को समझने और उनके साथ सहानुभूति रखने में सक्षम होते हैं। प्रेम हमें एक मजबूत और अर्थपूर्ण संबंध बनाने में मदद करता है।
अर्थ: प्रेम हमें जीवन में अर्थ और उद्देश्य प्रदान करता है। जब हम किसी से प्यार करते हैं, तो हम अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। प्रेम हमें दूसरों की मदद करने और दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है।




 दिल को छू लेने वाले कोट्स 

यदि आप वैलेंटाइन डे के अवसर पर कोट्स ढूंढ़ रहे हैं, तो यहाँ कुछ चुनिंदा इम्पोर्टेन्ट वैलेंटाइन डे कोट्स हैं जिन्हे आप आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को भेज कर अपने दिल के उदगार को व्यक्त कर सकते हैं. 
  • -प्रेम वह है जो हमें एक दूसरे को स्वीकारने की क्षमता देता है, चाहे हम जैसे भी हों।
  • -तुम्हारे बिना मेरा जीवन रंगहीन है, तुम मेरी ज़िंदगी का सबसे सुंदर रंग हो।
  • -प्रेम में सब कुछ संभव है।
  • -तुम्हारी मुस्कान मेरी दुनिया को रौंगतों से भर देती है, तुम मेरे लिए विशेष हो।
  • -प्रेम वह है जो हमें एक दूसरे को सच्चे रूप से समझने की क्षमता देता है।-
  • -तुम्हारा साथ ही मेरा जीवन समृद्धि से भर जाता है, तुम मेरी सबसे बड़ी धन हो।
  • -प्रेम में हमेशा एक नया आरंभ होता है, एक नया सफर शुरू होता है।-
  • -तुम्हारे साथ होना ही मेरी खुशियों का सबसे बड़ा कारण है, तुम मेरे लिए अनमोल हो।
  • -प्रेम वह है जो दूसरों को खुशी देने में है, खुद को भूल जाने में नहीं।-
  • -तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है, तुम्हारी मौजूदगी ही मेरी पूर्णता है।
  • प्रेम दुनिया में सबसे शक्तिशाली शक्ति है। यह वह है जो हमें एक साथ रखता है, हमें आगे बढ़ाता है और हमें बेहतर बनाता है।" - मदर टेरेसा
  • "प्रेम वह है जो हमें जीवित रखता है। यह वह है जो हमें खुशी देता है। यह वह है जो हमें दुनिया को बेहतर बनाता है।" - पॉल जे. क्रेग
  • "प्रेम वह है जो हमें एक दूसरे के लिए बेहतर बनाता है। यह वह है जो हमें एक साथ लाता है और हमें एक परिवार बनाता है।" - मार्टिन लूथर किंग जूनियर

Born on Monday: सोमवार को जन्में लोगों कि खूबियां जानकर आप भी हो जायेंगे हैरान, रखें ये नाम

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Born on Monday : सोमवार को जन्मे लोगों की सबसे बड़ी खासियत होती है कि वे मेहनती होने के साथ ही जुझारू प्रवृति के होते हैं। इनके स्वामी मून अर्थात चन्द्रमा होता है और चंद्र का स्वाभाव शांत और शीतलता का होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा  एक अद्भुत ग्रह है जो पृथ्वी के बहुत करीब है इसलिए इसका प्रभाव पृथ्वी पर बहुत प्रमुख है। ऐस्टरोलोजी के अनुसार चंद्रमा मन का स्वामी है. यह ग्रह घरेलू जीवन, पारिवारिक संबंधों और आनुवंशिकी को नियंत्रित करता है। चंद्रमा को सोम देवता के रूप में पूजा जाता है और इसे जीवन के सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है. प्रसिद्ध ज्योतिष और राशिफल विशेषज्ञ हिमांशु रंजन शेखर से आप सोमवार को जन्म लेने वाले लोगों के चरित्र, स्वास्थ्य, स्वभाव और बहुत कुछ के बारे में विस्तार से जान सकते हैं।

सोमवार को जन्म लेने वाले लोग शांत मस्तिष्क वाले होते है साथ ही संवेदनशील, दयालु, विनम्र, देखभाल करने वाले और मातृभाषा सहित अद्वितीय व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं. ऐसे लोगों में दृढ़ संकल्प शक्ति होती है। एस्ट्रोलॉजी के अनुसार आप जानते हैं कि चन्द्र पृथ्वी के बहुत निकट होता है और यही कारण है कि सोमवार को पैदा हुए लोग तर्कसंगत रूप से भावनात्मक रूप से व्यवहार करते हैं और ऐसे व्यक्ति लगातार मिजाज प्रदर्शित करते हैं और इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय लेना आसान नहीं होता है। 



सोमवार के दिन जन्मे बच्चे का नाम क्या रखना चाहिए

सोमवार के दिन जन्मे बच्चे का नाम क्या रखना चाहिए यह एक  सामान्य सा   सवाल है हर उस पैरेंट के लिए जिनके बच्चों का  सोमवार को हुआ  है.  एस्ट्रोलोजी के अनुसार सोमवार को खास  तौर पर भगवान शिव  और चन्द्रमा का दिन माना जाता है और इस प्रकार से आप अपने बच्‍चे का नाम सप्‍ताह के दिनों पर आधारित नामों पर भी रख सकते हैं। हालाँकि यहाँ आपको सोमवार के दिन जन्मे बच्चे का नाम के लिए कुछ नाम सुझाये गए हैं आपको जो भी नाम पसंद हो, आप उसे चुन सकते हैं।

Born On Tuesday: होते हैं साहसी, जुझारू और जल्दी हार नही मानने वाले

सोमवार को जन्मे बच्चों के नाम 

हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार सोमवार को जन्मे लोगों के नाम अक्सर भगवान शिव से जुड़े होते हैं साथ ही सोमवार को चंद्रमा का दिन माना जाता है, और ऐसा मान्यता है कि चंद्रमा भगवान शिव का वाहन है। इसलिए, सोमवार को जन्मे लोगों के नाम अक्सर शिव के नामों या चंद्रमा से संबंधित नामों से लिए जाते हैं। हालाँकि किसी बच्चे के नाम रखने के पीछे बहुत सारे फैक्टर होते हैं जैसे कि राशि, नक्षत्र, धर्म, और परिवार की परंपराआदि. 

रविवार को हुआ है जन्म तो आप होंगे: दृढ इच्छा शक्ति के मालिक

सोमवार को  जन्म लेने वाले बच्चों के नामों के लिए कुछ लोकप्रिय नाम निम्न हो सकते हैं. इनके अलावा, सोमवार को जन्मे लोगों के लिए अन्य नाम भी चुने जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का नाम उसके जन्म के समय के आधार पर भी रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति सुबह जल्दी पैदा होता है, तो उसे "उदय" या "प्रभात" जैसे नाम दिया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति शाम को पैदा होता है, तो उसे "शाम" या "सौरभ" जैसे नाम दिया जा सकता है।

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

लड़कों के लिए

  • शिव
  • शंकर
  • चंद्र
  • कार्तिकेय
  • उदय
  • दीप
  • प्रकाश
  • शांत
  • धीरज

लड़कियों के लिए

  • शिवांगी
  • चंद्रिका
  • उषा
  • दीप्ति
  • शीतल
  • शांति
  • प्रज्ञा
  • भावना
  • श्रद्धा

मेहनती के साथ ही जुझारू प्रवृति 

सोमवार को जन्मे लोग बहुत मेहनती होते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी भी शांति से रहना पसंद नहीं करते और हमेशा खुद को व्यस्त रखना चाहते हैं। ऐसे लोग समय का सदुपयोग करने में काफी सक्रिय होते हैं और अगर ये अच्छी और सक्रिय प्रवृत्ति के स्वामी हों तो ऐसे लोग जीवन में कई कार्यों को सफलतापूर्वक अपने हाथ में लेकर उन्हें अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।

उच्च चरित्र के स्वामी 

सोमवार को जन्मे लोगों की यह विशेषता होती है कि ये उच्च चरित्र के होते हैं और ये अपने चरित्र का बहुत ध्यान रखते हैं। हालांकि जातक विपरीत और विपरीत स्वभाव को जीना पसंद करता है। वासना और भोग जैसे विषयों को ये गलत नहीं समझते लेकिन फिर भी इनके लिए उच्च चरित्र हमेशा महत्वपूर्ण होता है और इसके लिए ये आमतौर पर कोई समझौता पसंद नहीं करते हैं।

धार्मिक/सामाजिक कार्यों में सहभागी

 सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति सामान्यतः धार्मिक प्रकृति के होते हैं, धार्मिक कार्यों एवं पूजा-पाठ में इनकी विशेष रुचि होती है. भले ही ये लंबे समय तक पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते हों, लेकिन धार्मिक और सामाजिक कार्यों में ये विशेष रुचि दिखाते हैं।

सुख-दुःख में समान भाव 

ऐसा व्यक्ति सुख हो या दुख दोनों ही स्थितियों में समान रहता है और जल्दी विचलित होना पसंद नहीं करता। सुख की स्थिति में भी ये प्राय: अपने को आडम्बर से दूर ही रखते हैं। साथ ही दु:ख या दुर्दशा की स्थिति में भी ये अपना सम्मान नहीं छोड़ते हैं और जल्दबाजी में किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं करते हैं।

स्वास्थ्य और व्यक्तित्व

ऐसे व्यक्तियों का चेहरा आमतौर पर गोल आकार का होता है। ऐसे लोगों को सेहत को लेकर सर्दी या जुकाम को लेकर विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत होगी। ऐसे लोग सर्दी या जुकाम के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और उन्हें इससे खास परहेज करने की जरूरत होती है। हल्की सर्दी भी उन्हें परेशान करती है और उन्हें सर्दी या जुकाम हो सकता है। इसके साथ ही सोमवार को जन्में जातकों का शरीर वात और कफ से भरपूर होता है इसलिए इन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।

अप्रैल में जन्मे लोग: जानिए इनकी पर्सनैलिटी के अनोखे राज


अप्रैल में जन्मे लोगों की सबसे बड़ी खासियत होती है कि ऐसे लोग हार मानना नहीं जानते तथा ये अपना रास्ता खुद बनाते हैं।  ऐसे लोगों का आत्मविश्वास ही इनकी सबसे बड़ी ताकत है और ये जब ये ठान लेते हैं, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है।  अप्रैल में जन्मे लोग: अप्रैल में जन्मे लोगों  में गुणों का एक अनोखा मेल होता है, जो उन्हें सबसे अलग और एक खास तरह की सोच वाला इंसान बनाता है। ऐसे लोग अक्सर ऊर्जावान, साहसी और आशावादी होते हैं; उनकी ये दिलचस्प खूबियाँ उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाती हैं। अप्रैल में जन्मे लोग अपनी खासियतों—खास तौर पर अपने नेतृत्व गुणों, वफ़ादारी और मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ने की काबिलियत—के लिए जाने जाते हैं। यहाँ अप्रैल में जन्मे लोगों के व्यक्तित्व से जुड़ी सभी बारीक जानकारियाँ दी गई हैं—उनकी निजी ज़िंदगी, पेशेवर ज़िंदगी, सेहत, पैसा, स्वभाव और अन्य सभी पहलुओं के बारे में। लेखक: हिमांशु रंजन शेखर (ज्योतिषी, अंकशास्त्री और प्रेरक)।

निडर और साहसी

अप्रैल में जन्मे लोगों में कुछ ऐसी अनोखी खूबियाँ होती हैं जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं। ऐसे लोग अपने काम करने के तरीके में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं करते; अगर उन्हें किसी बात पर समझौता करना मुश्किल लगता है, तो वे अक्सर उस प्रोजेक्ट को दूसरों के लिए छोड़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाते। अप्रैल में जन्मदिन मनाने वाले लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव रहता है, जिसके चलते उनका स्वभाव बेहद निडर और साहसी होता है।

साहस और दृढ़ संकल्प

जो खास गुण उन्हें दूसरों से अलग बनाते हैं, वे हैं—उनके सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने का साहस और उनका दृढ़ संकल्प। मुश्किल समय में भी वे दूसरों को दिलासा देने और सहारा देने की काबिलियत रखते हैं; उनकी कुशलता और मानसिक मज़बूती उन्हें ऐसे पर्याप्त संसाधन मुहैया कराती है, जिनकी मदद से वे कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य बनाए रखते हैं।

स्वभाव से अप्रत्याशित

अगर उनके मिजाज़ की बात करें, तो अप्रैल में जन्मे लोगों को सचमुच 'अप्रत्याशित' (जिनके बारे में पहले से कुछ न कहा जा सके) कहा जा सकता है। हालाँकि उनमें गजब का दृढ़ संकल्प होता है और वे किसी भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत पूरे जोश और उत्साह के साथ करते हैं, फिर भी किसी प्रोजेक्ट या अपने भविष्य को लेकर उनके अगले कदम क्या होंगे—इसका अंदाज़ा लगाना या भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल होता है। इसके बावजूद, उनके व्यक्तित्व का यह अनोखा पहलू ही उनकी सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण खासियत है।

मज़बूत नेतृत्व क्षमता और जन्मजात शासक

ऐसे लोगों में नेतृत्व के गुण कूट-कूटकर भरे होते हैं; वे बेहद मज़बूत इरादों वाले इंसान होते हैं और उन्हें पूरा यकीन होता है कि उनके विचार और उनके द्वारा लिए गए फ़ैसले हमेशा सही होते हैं। वे अपनी ज़िंदगी को पूरे जुनून के साथ जीते हैं और स्वभाव से काफी रोमांच-प्रेमी होते हैं। उनमें खुद पर शासन करने की काबिलियत होती है; वे एक ऐसे ज़बरदस्त और चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी होते हैं कि लोग खुद-ब-खुद उनके पीछे चलने लगते हैं।

स्वभाव से स्वतंत्र

अप्रैल महीने में जन्मे सभी लोग स्वभाव से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। वे अपने काम करने के तरीके में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं करते; अगर उन्हें किसी बात पर समझौता करना मुश्किल लगता है, तो वे अक्सर उस प्रोजेक्ट को दूसरों के लिए छोड़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाते। ज़िंदगी के प्रति उनका जुनून ही उन्हें अपना रास्ता खुद बनाने के लिए प्रेरित करता है। उनका चुंबकीय व्यक्तित्व और दूसरों को अपनी बात मनवाने की ज़बरदस्त क्षमता ही लोगों को उनके पीछे चलने पर मजबूर कर देती है। वे अच्छी तरह जानते हैं कि मुश्किल हालात में कैसे नेतृत्व करना है, कैसे रास्ता बनाना है और अपनी ज़िंदगी के लिए खुद पैसे कैसे कमाने हैं।


नजरिया जीने का: एक प्रेम और कितने अफ़साने- पढ़ें प्रेम की भावना को व्यक्त करते इन नामचीन हस्तियों के कोट्स

Valentine  day Love quotes to express your feeling

प्रेम का जीवन में खास महत्त्व है और यह एक ऐसा फीलिंग है जिससे अनजान शायद की कोई व्यक्ति रहा हो...प्यार करने का कोई उम्र नहीं होता और शायद इसीलिए प्रेमी ह्रदय को हमेशा युवा और सदाबहार कहा जाता है. युवा दिलों के धड़कन को व्यक्त करने का मौका सभी की जीवन में आता है और इसके लिए यह जरुरी होता है कि हम दिलों में रुमानियत  और प्यार के भाव को भरने और उन संवेंदनशीलता  के साथ व्यक्त करने के लिए हमें उदारता होनी चाहिए.   तो फिर आप भी वक्त और अवसर की नजाकत को समझते हुए अपने प्रेमी या प्रेमिका को इस अवसर पर इन प्रेम की भावनाओं के साथ व्यक्त करें। 


तो प्रेमी दिलों के लिए अपने प्रेमी या प्रेमिका के लिए अपने भावनाओं को व्यक्त करने के लिए पेश है प्यार से भरे कोट्स जो आपके प्रेम के भावना को सीधे अपने पार्टनर के दिल में पहुंचाने का मौका प्रदान करेगा.. 
गगन पर दो सितारे: एक तुम हो,
धरा पर दो चरण हैं: एक तुम हो,
‘त्रिवेणी’ दो नदी हैं! एक तुम हो,
हिमालय दो शिखर है: एक तुम हो,
 -माखनलाल चतुर्वेदी


  1. प्रेम की शक्ति नफ़रत की ताक़त से हज़ारों गुना प्रभावशाली होती है। -अज्ञात
  2. संसार को प्रेम से अपने अधीन किया जा सकता है युद्ध से नहीं-हीगेल 
  3. प्रेम का नाता संसार के सभी संबंधो से पवित्र और श्रेष्ठ है। -प्रेमचंद
  4. जो सचमुच प्रेम करता है उस मनुष्य का ह्रदय धरती पर साक्षात स्वर्ग है। ईश्वर उस मनुष्य में बसता है क्योंकि ईश्वर प्रेम है। -लेमेन्नाइस
  5. जिस प्यार में पागलपन ना हो, वो प्यार प्यार नहीं है। -अज्ञात
  6. हमारे अन्तर में यदि प्रेम न जाग्रत हो, तो विश्व हमारे लिए कारागार ही है। -रविंद्रनाथ ठाकुर
  7. प्रेम में पवित्रता का वास होता है, वासना का नहीं/ प्रेम का अतिनिकृष्ट रूप वासना है. स्वामी अवधेशानंद 
  8. प्रेम के रस में डूबो तो ऐसे कि जब सुबह तुम जागो तो प्रेम का एक और दिन पा जाने का अहसान मानो। और फिर रात में जब तुम सोने जाओ तो तुम्हारे दिल में अपने प्रियतम के लिए प्रार्थना हो और होठों पर उसकी खुशी के लिए गीत। -ख़लील जिब्रान
  9. प्रेम के पथ पर कायर व्यक्ति नहीं चल सकते हैं  अज्ञात 
  10. पुरुषों का प्रेम आंखों से और महिलाओं का प्रेम कानों से शुरू होता है। -अज्ञात
  11. प्रेम और परमात्मा में कोई अंतर नहीं है- संतवाणी 
  12. प्रेम के स्पर्श से हर व्यक्ति कवि बन जाता है। -प्लेटो
  13. प्रेम असीम विश्वास है, असीम धैर्य है और असीम बल है। -प्रेमचंद
  14.  एक प्रेम से भरा हृदय सभी ज्ञान का प्रारंभ है। -थॉमस कार्लाइल

दलाई लामा के जीवन का सार हैं ये Quotes; आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देंगे


दलाई लामा अपने शांति और आध्यात्मिक विचारों के कारण पूरी दुनिया में एक विलक्षण हस्ती बन चुके हैं। तिब्बत से निवासित होने के बावजूद दलाई लामा में अपने विचारों और दर्शन से शांति के पूजारीनके रूप में दुनिया में पूजे जाते हैं . आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि वास्तव में दलाई लामा एक पदवी है जो मंगोलियाई खिताब के नाम से जानी जातियां। अगर शाब्दिक अर्थ निकाली जाए तो दलाई लामा का मतलब होता है ज्ञान का महासागर। ऐसा माना जाता है कि वे भगवान अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप होते हैं।

दलाई लामा:Facts In Brief
दलाई लामा का जा 6 जुलाई, 1935 को हुआ था।
दलाई लामा जोकि एक पदवी है, ये 14वें और वर्तमान दलाई लामा हैं जिनका नाम  तेनजिंग ज्ञात्सो है।
दलाई लामा ने 31 मार्च 1959 को तिब्बत से भारत में क़दम रखा था।
दुनिया में अपने शांति के प्रतीक और मसीहा वाली छवि प्राप्त होने के कारण 1989 में दलाई लामा को शांति का नोबेल सम्मान मिला

दलाई लामा: महत्वपूर्ण कोट्स
कहने की जरूरत नहीं है कि चीन की ज्यादतियों के कारण वे अपने भूमि तिब्बत को छोड़कर भारत में शरणार्थी और निर्वासित जीवन जी रहे हैं फिर भी वो करुणा के सागर हैं। वे अपने दुश्मनों के लिए दयाभाव रखते हैं और यही उनके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान है जिसके कारण उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया।
प्रस्तुत है उनके प्रमुख कोट्स
1. एक छोटे से विवाद से किसी रिश्ते को टूटने मत देना।
2.आप आकर्षण से ही दुसरे के दिमाग को बदल सकते हो गुस्से से नही।

नज़रिया जीने का : जानें भगवान राम के चरित्र के कौन-कौन से हैं 16 गुण


नज़रिया जीने का : भगवान राम के जीवन में मर्यादा का विशेष महत्व रहा है और शायद प्रभु राम एकमात्र देव हैं जिनके साथ मर्यादा पुरुषोत्तम विशेषण जुड़ा हुआ है। भगवान राम ने मर्यादा को अपने से कभी अलग नहीं होने दिया भले हीं चाहे वह पारिवारिक संबंध की बात हो, सहकर्मियों की बात हो या दुश्मनों की बात हो। सच्चाई तो यह है कि प्रभु राम के मर्यादा और विशेष गुणों को लेकर जो छवि प्रत्येक हिंदुओं में बसी है वह किसी लेखनी की मोहताज नहीं है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम  को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया. "मर्यादा पुरुषोत्तम" श्रीराम भगवान हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं, जो "रामायण" के मुख्य पात्र में प्रस्तुत होते हैं। "मर्यादा पुरुषोत्तम" का अर्थ होता है "मर्यादा में सर्वोत्तम पुरुष" या "मर्यादा के परम आदमी"।

"मर्यादा पुरुषोत्तम" का उपनाम भगवान राम के श्रद्धायुक्त और न्यायप्रिय व्यक्तित्व को संकेत करता है, जो उन्हें भक्तों के लिए एक आदर्श पुरुष बनाता है।

 भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में मर्यादाओं का हमेशा पालन किया। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श मित्र थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी इन मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया.

सच तो यह है कि इस उपनाम के माध्यम से भगवान राम की विशेषता और उनके जीवन में अनुसरण करने लायक आदर्शों को दर्शाने का प्रयास किया जाता है।  भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम उनकी महानता के लिए दिया गया उपाधि है जिसमे पारिवारिक संबंधो की मर्यादा के साथ ही राजकीय और दोस्तों और यहाँ तक कि दुश्मनों के साथ भी मर्यादा के निर्वाह के लिए दिया जाता है. और यही वजह है कि भगवन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से पुकारा जाता है.

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, जिनका सभी सम्बन्धो के लिए अनुकरणीय व्यक्तित्व

भगवान राम को "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में धर्म, नैतिकता, और श्रेष्ठता की मर्यादा बनाए रखी। उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया, अपनी पतिव्रता पत्नी सीता के प्रति वफादारी दिखाई, और अपने भक्तों के प्रति सत्य, न्याय, और करुणा का प्रदर्शन किया।  

भगवान राम को आदर्श पुत्र क्यों कहते हैं

अगर आप रामायण और रामचरित मानस का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि भगवन राम ने अपने पिता दशरथ के आदेश का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया। वे जानते थे कि पिता का आदेश सदैव मानना चाहिए, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। इस प्रकार की मिसाल शायद हीं कहीं और मिलती है. 

भगवान राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

भगवान राम को आदर्श भाई क्यों कहते हैं?

भारत मिलाप और अपने भाइयों के प्रति प्रेम और अनुराग भगवन राम की अलग विशेषता है जो उन्हें सबसे अलग रखता है. भगवन राम ने अपने भाई भरत के प्रति कभी भी ईर्ष्या या घृणा का भाव नहीं रखा। वे भरत को अपना सच्चा भाई मानते थे और उनका हमेशा सम्मान करते थे। 

भगवान राम को आदर्श पति क्यों कहते हैं?

मनुष्य के जीवन में आने वाली सभी संबंधों को पूर्ण एवं उत्तम रूप से निभाने की शिक्षा देने वाला प्रभु रामचंद्र के चरित्र के समान दूसरा कोई चरित्र नहीं है।  और जहाँ तक आदर्श पति का सवाल है, राम ने अपनी पत्नी सीता के प्रति हमेशा प्रेम और सम्मान का भाव रखा। वे सीता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार थे।

भगवान राम को आदर्श राजा क्यों कहते हैं?

राम के राज्य में राजनीति स्वार्थ से प्रेरित ना होकर प्रजा की भलाई के लिए थी। इसमें अधिनायकवाद की छाया मात्र भी नहीं थी। राम ने अपने राज्य में हमेशा न्याय और धर्म का पालन किया। वे प्रजा के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। 

 भगवान राम आदर्श मित्र कैसे हैं?

श्री रामचंद्र जी निष्काम और अनासक्त भाव से राज्य करते थे। उनमें कर्तव्य परायणता थी और वे मर्यादा के अनुरूप आचरण करते थे।  राम ने अपने दोस्तों सुग्रीव, हनुमान, विभीषण आदि के प्रति हमेशा निष्ठा और समर्पण का भाव रखा। उन्होंने अपने दोस्तों की हर समय मदद की। 

भगवान राम की विशेषता हैं ये खास 16 गुण

भगवान राम के मर्यादा और उनके विशेष गुणों को लेकर जो छवि प्रत्येक हिंदुओं में बसी है वह किसी लेखनी की मोहताज नहीं है। हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम  को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया. 

भगवान राम जी के चरित्र की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो उन्हें लोगों का आदर्श बनाती हैं.  हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रभु राम 16 गुणों से युक्त थे जो उनको मर्यादा पुरुषोतम बनाते हैं और हम सभी उनके इन गुणों को अपनाकर अपना जीवन बना सकते हैं-

जानते हैं भगवान राम के चरित्र मे कौन-कौन से 16 गुण हैं जो हमें अपनानी चाहिए .

  • गुणवान (योग्य और कुशल)
  • किसी की निंदा न करने वाला (प्रशंसक, सकारात्मक)
  • धर्मज्ञ (धर्म का ज्ञान रखने वाला)
  • कृतज्ञ (आभारी या आभार जताने वाला विनम्रता)
  • सत्य (सत्य बोलने वाला और सच्चा)
  • दृढ़प्रतिज्ञ (प्रतिज्ञा पर अटल रहने वाला, दृढ़ निश्‍चयी )
  • सदाचारी (धर्मात्मा, पुण्यात्मा और अच्छे आचरण वाला, आदर्श चरित्र)
  • सभी प्राणियों का रक्षक (सहयोगी)
  • विद्वान (बुद्धिमान और विवेक शील)
  •  सामर्थशाली (सभी का विश्वास और समर्थन पाने वाला समर्थवान)
  • प्रियदर्शन (सुंदर मुख वाला)
  • मन पर अधिकार रखने वाला (जितेंद्रीय)
  • क्रोध जीतने वाला (शांत और सहज)
  • कांतिमान (चमकदार शरीर वाला और अच्छा व्यक्तित्व)
  • वीर्यवान (स्वस्थ्य, संयमी और हष्ट-पुष्ट)
  • युद्ध में जिसके क्रोधित होने पर देवता भी डरें : (वीर, साहसी, धनुर्धारि, असत्य का विरोधी)


भगवान हनुमान अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं: पूजा में रखें भगवान हनुमान के गुणों का ध्यान


नजरिया जीने का:  धर्मग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं और भगवान श्री राम के प्रबल भक्त हैं। भगवान हनुमान सबसे प्रसिद्ध देवताओं में से एक हैं और ऐसी मान्यता है कि वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं। कहा जाता है कि प्रभु हनुमान इस घोर कलयुग मे एक मात्र देवता हैं जो अपने भक्तों के द्वारा कम पूजन पर भी आसानी से उनका कल्याण करते हैं ।

भगवान हनुमान जी व्यक्तित्व की  विशालता 

भगवान हनुमान जी व्यक्तित्व कि विशालता और उनके अनगिनत कारनामों ने हमेशा से दुनिया भर के विद्वानों, विचारकों और पौराणिक कथाओं का केंद्र बिन्दु रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस कलयुग में भगवान हनुमान जिन्हें संकटमोचन भी कहा जाता है, सबसे आसानी से और तत्क्षण हीं, नाममात्र के पूजा से भी अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान राम के साथ हनुमान ने रामायण में एक सारथी की भूमिका निभाई और अपने भक्तों में खास तौर पर पूजनीय हुए। 

भगवान हनुमान केसरी और अंजना के पुत्र हैं और उनका जन्म नाम अंजनेय (अंजना का पुत्र) था, लेकिन जीवन भर उन्हें उनके वीरतापूर्ण कार्यों से प्राप्त नामों से संबोधित किया गया था।

 भक्तगन प्रभु हनुमान की पूजन विभिन्न प्रकार से करते हैं और उनकी प्रसन्नता के लिए हम भगवान हनुमान के शुभ जन्म की पूजा करते हैं। मंगलवार को खास दिन प्रभु हनुमान की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तगण प्रभु हनुमान की दिव्यता की पूजा करने के साथ ही मंदिरों में बूंदी और लड्डू चढ़ते हैं। 

भगवान हनुमान की पूजा करने के दो तरीके हैं; पारंपरिक पूजा और हनुमान के गुणों का ध्यान।  

पूजा में रखें पारंपरिक और हनुमान के गुणों का ध्यान

ऐसी मान्यता है कि भगवान इस लोक मे तब तक  तक गुप्त रूप से पृथ्वी पर रहेंगे जब तक भगवान राम का नाम गाया जाएगा, महिमामंडित और स्मरण और पूजा किया जाएगा। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान हनुमान अपने गुरु रामचंद्र के चरण कमलों के प्रति काफी समर्पित रहते हैं और इसलिए प्रभु राम को प्रसन्न करके भी लोग भगवान हनुमान को खुश और प्रसन्न करने के लिए मंदिरों और घरों मे पूजन आयोजित करते हैं। 

हनुमान जयंती : अनुष्ठान

  • सबसे पहले भक्तगन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें जो कि किसी भी पूजन के आरंभ के लिए प्राथमिक शर्त होती है ।
  •  पूजन स्थल पर या किसी भी पवित्र जगह पर भगवान हनुमान की मूर्ति रखें और देसी घी का दीया जलाएं।
  •  उसके उपरांत भगवान हनुमान के मूर्ति पर लाल फूल चढ़ाएं और हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का जाप करें।
  •  हनुमान मंदिर जाएं और भगवान हनुमान को चोला चढ़ाएं जिसमें - चमेली का तेल, वस्त्र और सिन्दूर शामिल हों।
  • ज्यादातर लोग घर में सुंदर कांड का पाठ कराते हैं।
  •  इस शुभ दिन पर रामायण का पाठ करना भी लाभकारी होता है।


नज़रिया जीने का: साहस या दुःसाहस ? निर्णय की एक गलती, जीवन की बड़ी कीमत


नजरिया जीने का:  अक्सर हम साहस और दुःसाहस  के बीच के फर्क को भूल जाते हैं लेकिन हमें यह देखनी चाहिए कि सच्चा साहस सिर्फ दिखावे में नहीं होता बल्कि उसके लिए हमें समझदारी की भी जरूरत होती है. आप जोखिम ले सकते हैं लेकिन ध्यान रहे की जोश में किया गया निर्णय अक्षर पछतावे को ही आमंत्रित करता है साथ से बिना सोचे समझे लिया गए  जोखिम का फैसला साहस नहीं बल्कि दुःसाहस  कहा जाता है. क्योंकि हर जोखिम जीत नहीं दिलाता है कुछ जोखिम वाले निर्णय आपके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है या ध्यान रखें दोस्तों के सच्चा साहस दिखावे में नहीं समझदारी में होता है और बहादुरी का मतलब कभी भी मौत से टकराना नहीं बल्कि सही वक्त का इंतजार करना होता है.

साहस और दुःसाहस में अंतर

साहस और दुःसाहस मे अक्सर हम फर्क  नहीं कर पाते हैं और अज्ञानता के कारण हम अक्सर अपने दुस्साहस को ही साहस समझने  का भ्रम पाल लेते हैं। साहसी व्यक्ति सोच-समझकर कार्य करता है, अपनी क्षमताओं का आकलन करता है और परिणामों की संभावनाओं को समझता है। जबकि दुस्साहस का अर्थ है बिना सोचे समझे जोखिम लेना। 

दुःसाहस को साहस समझने की भूल

अगर साहस और दुस्साहस की बीच के अंतर को समझने में आपको कोई असमंजस है तो विलियम रार्फ के इस कथन को याद रखें-"साहस और दुसाहस में फर्क है कि साहस में आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जबकि दुसाहस में आप मुश्किलों के सामने झुक जाते हैं।"

साहस और दुस्साहस दो शब्द हैं जो अक्सर एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इनके बीच महत्वपूर्ण अंतर होता है।

जीवन में सही निर्णय

साहस का अर्थ है डर पर विजय प्राप्त करके जो सही है उसे करना। यह एक सकारात्मक गुण है जो हमें चुनौतियों का सामना करने, जोखिम लेने और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। साहसी व्यक्ति सोच-समझकर कार्य करता है, अपनी क्षमताओं का आकलन करता है और परिणामों की संभावनाओं को समझता है।

सच तो यह है कि साहस का अर्थ है डर पर विजय प्राप्त करके जो सही है उसे करना। यह एक सकारात्मक गुण है जो हमें चुनौतियों का सामना करने, जोखिम लेने और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। साहसी व्यक्ति सोच-समझकर कार्य करता है, अपनी क्षमताओं का आकलन करता है और परिणामों की संभावनाओं को समझता है।

विवेक और जोखिम

दुस्साहस का अर्थ है बिना सोचे समझे जोखिम लेना। यह एक नकारात्मक गुण है जो हमें खतरनाक परिस्थितियों में डाल सकता है और हानिकारक परिणामों का कारण बन सकता है। दुस्साहसी व्यक्ति आवेश में कार्य करता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करता है और संभावित खतरों को कम आंकता है।

अंतर को समझने के लिए कुछ बिंदु:

उद्देश्य: साहस का उद्देश्य सही काम करना होता है, जबकि दुस्साहस का उद्देश्य रोमांच या उत्तेजना प्राप्त करना होता है।

सोच: साहसी व्यक्ति सोच-समझकर कार्य करता है, जबकि दुस्साहसी व्यक्ति आवेश में कार्य करता है।

जोखिम मूल्यांकन: साहसी व्यक्ति अपनी क्षमताओं और परिस्थितियों का आकलन करता है, जबकि दुस्साहसी व्यक्ति जोखिमों को कम आंकता है।

परिणाम: साहस सकारात्मक परिणामों की ओर ले जाता है, जबकि दुस्साहस नकारात्मक परिणामों का कारण बन सकता है।

उदाहरण:

साहस: एक अग्निशामक जलती हुई इमारत में घुसकर लोगों को बचाता है जो निश्चित ही एक प्लैनिंग और स्ट्रैटिजी के साथ किया जाने वाला रूटीन वर्क है । 

दुस्साहस: एक व्यक्ति बिना तैयारी के खतरनाक पहाड़ी पर चढ़ने का प्रयास करता है जिसमे प्लैनिंग कि नहीं बल्कि किसी आवेश और अनावश्यक जोश की  पूत होती है 

साहस और दुस्साहस में स्पष्ट अंतर है। साहस एक सकारात्मक गुण है जो हमें चुनौतियों का सामना करने और सही काम करने के लिए प्रेरित करता है, जबकि दुस्साहस एक नकारात्मक गुण है जो हमें खतरनाक परिस्थितियों में डाल सकता है।


"साहस उस लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता है जो हमें डर से अधिक महत्वपूर्ण लगता है।" - अरिस्टोटल।

"दुसाहस उसे कहते हैं जब आप अपनी मनोबल से हार मान लेते हैं, साहस उसे कहते हैं जब आप दुसरी बार कोशिश करते हैं।" - डेल कार्नेगी।

"जीवन में साहस दिखाने का अर्थ यह नहीं है कि हमे कभी डर नहीं लगता, बल्कि यह है कि हम अपने डर के बावजूद आगे बढ़ते हैं।" - नेल्सन मंडेला।

ढाबा स्टाइल राजमा: परफेक्ट रेसिपी, मार्केट का स्वाद पाएं घर पर


राजमा रेसिपी वैसे तो घर में भी सामान्य महिलाएं बनाते हैं तो टेस्ट अच्छी होती है और सच तो यह है कि घर में बना राजमा रेसिपी को लोग और बच्चे बड़े चाव हैं. लेकिन  अक्सर यह लोगों की शिकायत होती है की ढाबा में बने राजमा रेसिपी की स्वाद कुछ अलग होती है. इसके लिए यह जरूरी है कि आप घर में बनाने वाले राजमा को कुछ अलग तरीके से बनाएं।  खास तौर पर बाहर ढाबा में बनने वाले रेसिपी की स्वाद अगर आप चाहते हैं तो उसके लिए आप कुछ चेंज के साथ घर में भी बना सकते हैं इसके लिए जरूरी है कुछ खास इंग्रेडिएंट्स की आप इसे फॉलो करके बाहर ढाबा में बनने वाले राजमा रेसिपी आप घर में भी बना सकते हैं

ढाबा स्टाइल राजमा एक ऐसी रेसिपी है जो आपके खाने में ढाबे जैसा स्वाद लाती है। यहाँ बताए गए तरीके से आप ढाबा के राजमा वाले टेस्ट को घर पर ही तैयार कर सकते हैं। इसे बनाना आसान है और इसे आप आधा घंटे में तैयार कर सकते हैं। इसे बनाना जितना आसान है, खाने मे यह उतना ही जबरदस्त है। 


विश्वास  करें, आप इसके टेस्ट मे बाजार या ढाबा मे बजे राजमा का टेस्ट पाएंगे। इसे सही मसालों और धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है। आइए जानते हैं इसकी परफेक्ट रेसिपी:



सामग्री:

राजमा: 1 कप (रातभर पानी में भिगोए हुए)

प्याज: 2 मध्यम (बारीक कटे हुए)

टमाटर: 3 बड़े (प्यूरी बना लें)

हरी मिर्च: 2 (बारीक कटी हुई)

अदरक-लहसुन पेस्ट: 1 बड़ा चम्मच

घी या मक्खन: 3 बड़े चम्मच

तेल: 1 बड़ा चम्मच

जीरा: 1 छोटा चम्मच

हल्दी पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच

धनिया पाउडर: 1 छोटा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर: 1 छोटा चम्मच

गरम मसाला: 1 छोटा चम्मच

कसूरी मेथी: 1 बड़ा चम्मच (भुनी और मसलकर)

नमक: स्वादानुसार

धनिया पत्ती: गार्निश के लिए

राजमा मसाला बनाने की विधि

1. राजमा उबालना:

भिगोए हुए राजमा को धोकर प्रेशर कुकर में डालें।

उसमें 4 कप पानी, 1/2 छोटा चम्मच नमक और एक चुटकी हल्दी डालें।

मध्यम आंच पर 4-5 सीटी आने तक पकाएं। (राजमा नरम होना चाहिए।)

2. मसाला बनाना:

एक कढ़ाई में तेल और घी गर्म करें।

इसमें जीरा डालें और चटकने दें।

बारीक कटी हुई प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें।

अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च डालें। भूनें जब तक खुशबू न आ जाए।

अब टमाटर की प्यूरी डालें और मसाले (हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर) डालकर अच्छे से भूनें।

मसाला तब तक पकाएं जब तक तेल अलग न होने लगे।

3. राजमा और मसाला मिलाना:

उबले हुए राजमा को मसाले में डालें।

साथ में राजमा का पानी (जिसमें उबाला था) डालें।

इसे धीमी आंच पर 15-20 मिनट तक पकने दें। बीच-बीच में चलाते रहें।

4. तड़का और गार्निश:

गरम मसाला और कसूरी मेथी डालें। अच्छे से मिलाएं।

2 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं।

ऊपर से धनिया पत्ती से गार्निश करें।

सर्विंग टिप्स:

इसे चावल, तंदूरी रोटी या पराठे के साथ गरमा-गरम परोसें।

ऊपर से एक चम्मच मक्खन डालकर इसे और स्वादिष्ट बनाएं।