थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऊपरी परत है जहाँ तापमान बहुत अधिक होता है और अंतरिक्ष स्टेशन परिक्रमा करते हैं। “परत” किसी संरचना के स्तर को दर्शाती है, जबकि “थर्मामीटर” तापमान मापने का उपकरण है।
यह विषय सामान्य ज्ञान, स्कूल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 1. थर्मोस्फीयर वायुमंडल की कौन-सी परत है?
A. पहली
B. दूसरी
C. चौथी
D. पाँचवीं
उत्तर: C. चौथी
प्रश्न 2. थर्मोस्फीयर लगभग कितनी ऊँचाई से शुरू होती है?
A. 10 किमी
B. 50 किमी
C. 80 किमी
D. 150 किमी
उत्तर: C. 80 किमी
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना थर्मोस्फीयर में होती है?
A. वर्षा
B. बादल बनना
C. ऑरोरा
D. ओस बनना
उत्तर: C. ऑरोरा
प्रश्न 4. International Space Station किस परत में परिक्रमा करता है?
A. क्षोभमंडल
B. समतापमंडल
C. मध्यमंडल
D. थर्मोस्फीयर
उत्तर: D. थर्मोस्फीयर
प्रश्न 5. थर्मोस्फीयर में तापमान अधिक होने का मुख्य कारण क्या है?
A. बादलों की अधिकता
B. सूर्य की ऊर्जावान किरणों का अवशोषण
C. वर्षा
D. वायु दाब
उत्तर: B. सूर्य की ऊर्जावान किरणों का अवशोषण
प्रश्न 6. वायुमंडल की सबसे निचली परत कौन-सी है?
A. समतापमंडल
B. मध्यमंडल
C. क्षोभमंडल
D. थर्मोस्फीयर
उत्तर: C. क्षोभमंडल
प्रश्न 7. “परत” का सही अर्थ क्या है?
A. ऊँचाई
B. स्तर (Layer)
C. तापमान
D. दबाव
उत्तर: B. स्तर (Layer)
प्रश्न 8. थर्मामीटर का उपयोग किसे मापने के लिए किया जाता है?
A. दबाव
B. ऊँचाई
C. तापमान
D. आर्द्रता
उत्तर: C. तापमान
प्रश्न 9. थर्मामीटर के प्रारंभिक विकास का श्रेय किसे दिया जाता है?
A. आइंस्टीन
B. न्यूटन
C. Galileo Galilei
D. एडिसन
उत्तर: C. गैलीलियो गैलिली
प्रश्न 10. आयनमंडल (Ionosphere) मुख्यतः किस परत में पाया जाता है?
A. क्षोभमंडल
B. मध्यमंडल
C. थर्मोस्फीयर
D. एक्सोस्फीयर
उत्तर: C. थर्मोस्फीयर
प्रश्न 11. थर्मोस्फीयर में तापमान लगभग कितना हो सकता है?
A. 50°C
B. 200°C
C. 500°C
D. 1500°C या अधिक
उत्तर: D. 1500°C या अधिक
प्रश्न 12. थर्मोस्फीयर के ऊपर की परत क्या कहलाती है?
थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की चौथी परत है। यह लगभग 80 किमी से शुरू होकर 500–600 किमी या उससे अधिक ऊँचाई तक फैली होती है।थर्मोस्फीयर (या ऊपरी वायुमंडल) 85 किलोमीटर (53 मील) से ऊपर की ऊँचाई वाला क्षेत्र है, जबकि ट्रोपोपॉज़ और मेसोपॉज़ के बीच का क्षेत्र मध्य वायुमंडल ( स्ट्रैटोस्फियर और मेसोस्फीयर ) है जहाँ सौर UV विकिरण का अवशोषण 45 किलोमीटर (28 मील) की ऊँचाई के पास अधिकतम तापमान उत्पन्न करता है और ओजोन परत का कारण बनता है।
थर्मोस्फीयर सूर्य के विकिरण को अवशोषित करती है, जिससे यह बहुत गर्म हो जाती है।
मेसोस्फीयर के ऊपर बहुत ही दुर्लभ हवा की परत को थर्मोस्फीयर कहा जाता है। सूर्य से आने वाली उच्च-ऊर्जा एक्स-रे और यूवी विकिरण थर्मोस्फीयर में अवशोषित हो जाते हैं, जिससे इसका तापमान सैकड़ों या कई बार हज़ारों डिग्री तक बढ़ जाता है। हालाँकि, इस परत में हवा इतनी पतली होती है कि यह हमें बर्फीली ठंड लगती है! कई मायनों में, थर्मोस्फीयर वायुमंडल के एक हिस्से की तुलना में बाहरी अंतरिक्ष की तरह अधिक है।
थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की चौथी परत है। यह लगभग 80 किमी से शुरू होकर 500–600 किमी या उससे अधिक ऊँचाई तक फैली होती है।
“थर्मो” शब्द का अर्थ है — ऊष्मा (Heat) और “स्फीयर” का अर्थ है — परत या क्षेत्र।अर्थात, थर्मोस्फीयर वह परत है जहाँ तापमान बहुत अधिक होता है। इस परत में तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ता है।
थर्मोस्फीयर की प्रमुख विशेषताएँ
उच्च तापमान – इस परत में तापमान 1500°C या उससे भी अधिक हो सकता है।
हवा बहुत पतली – यहाँ वायु अणु बहुत कम होते हैं।
ऑरोरा की घटना – उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर दिखाई देने वाली रंगीन रोशनी (Aurora) इसी परत में बनती है।
अंतरिक्ष स्टेशन का स्थान –
International Space Station इसी परत में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
उपग्रहों की गति – कई कृत्रिम उपग्रह इसी क्षेत्र में घूमते हैं।
क्षोभ मंडल (Troposphere)
यह पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे निचली परत है जिसमें बादल, बर्फ, बारिश की घटनाएं होते हैं।
ट्रोपोस्फीयर में वायुमंडल के सभी वायु और जल वाष्प (जो बादलों और वर्षा का निर्माण करते हैं) का लगभग 75% होता है।
क्षोभमंडल समुद्र तल से लगभग 10 किमी (6.2 मील) तक फैला हुआ है।
हमारे वायुमंडल और बाहरी अंतरिक्ष के बीच की अनुमानित सीमा, जिसे कार्मन रेखा के रूप में जाना जाता है, थर्मोस्फीयर में लगभग 100 किमी की ऊँचाई पर है।
कई उपग्रह वास्तव में थर्मोस्फीयर के भीतर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं! सूर्य से आने वाली ऊर्जा की मात्रा में भिन्नता इस परत के शीर्ष की ऊँचाई और इसके भीतर के तापमान दोनों पर एक शक्तिशाली प्रभाव डालती है।
थर्मोस्फीयर का शीर्ष ज़मीन से 500 से 1,000 किमी (311 से 621 मील) ऊपर कहीं भी पाया जा सकता है।
ऊपरी तापमण्डल में तापमान लगभग 500° सेल्सियस (932° फारेनहाइट) से लेकर 2,000° सेल्सियस (3,632° फारेनहाइट) या उससे अधिक तक हो सकता है।
What is the temperature range in the thermosphere?
थर्मोस्फीयर में तापमान की सीमा काफी चरम पर होती है और सौर गतिविधि के आधार पर बदलती रहती है:
सामान्य सीमा: 500°C से 2,000°C (या 932°F से 3,632°F)
उच्च सौर गतिविधि (जैसे सौर फ्लेयर्स) के दौरान: यह 2,500°C (4,532°F) से अधिक हो सकता है.
Thermosphere height
थर्मोस्फीयर पृथ्वी की सतह से लगभग 80 से 700 किलोमीटर (50 से 435 मील) ऊपर तक फैला हुआ है। यह मेसोस्फीयर के ऊपर और एक्सोस्फीयर के नीचे वायुमंडल की परत है।
भारत के चार धाम चार प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल हैं जो देश के चार दिशाओं में स्थित हैं। ये चार धाम जिन्हे प्रमुख तौर पर जाना जाता है-बद्रीनाथ (उत्तर दिशा), द्वारका (पश्चिम दिशा), पुरी (पूर्व दिशा) तथा रामेश्वरम (दक्षिण दिशा) का हिंदू धर्म में विशेष महत्त्व है और इन्हें जीवन में एक बार अवश्य दर्शन करने योग्य माना जाता है। ये चार धाम तीर्थस्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व भी अत्यधिक हैं। यहां की यात्रा आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। आइए, इन चार धामों के बारे में विस्तार से जानते हैं:
हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार बद्रीनाथ (उत्तराखंड),द्वारका (गुजरात), जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) और रामेश्वरम (तमिलनाडू) चार धाम है जो विभिन्न देवी-देवताओं और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं.आश्चर्यजनक रूप से ये चरों धार भारत के चारों दिशाओं में स्थित है. आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित ये चार वैष्णव तीर्थ हैं जहाँ हर हिंदू को अपने जीवन काल मे अवश्य जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन तीर्थ स्थलों पर जाने से हिंदुओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलती है । इसमें उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ, पश्चिम की ओर द्वारका, पूर्व दिशा मे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण मे रामेश्वरम धाम है। आइये जानते हैं इन प्रमुख चार धामों के बारे में विस्तृत जानकारी.
यह धाम उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है यहां बद्रीनाथ मंदिर है, जिसमें विष्णु के बद्रीनाथ रूप की मूर्ति प्रतिष्ठित है। यह मंदिर चार धामों में से एक है और चार धाम यात्रा का पूर्वी धाम है। बद्रीनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक चरणपादुका (पैर की छाप) स्थापित है. बद्रीनाथ मंदिर को 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने बनवाया था. मंदिर परिसर में कई अन्य मंदिर और धार्मिक स्थल भी हैं, जिनमें से कुछ हैं:
तप्त कुंड: यह एक गर्म पानी का कुंड है, जिसका पानी पवित्र माना जाता है.
नारद कुंड: यह एक पवित्र कुंड है, जिसका पानी भगवान नारद को समर्पित है.
ब्रह्म कुंड: यह एक पवित्र कुंड है, जिसका पानी भगवान ब्रह्मा को समर्पित है.
गरुड़ चट्टान: यह एक चट्टान है, जिस पर भगवान गरुड़ का पदचिह्न है.
वेद व्यास गुफा: यह एक गुफा है, जहां वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी.
बद्रीनाथ एक अत्यंत लोकप्रिय तीर्थस्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर परिसर को चारों ओर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से घेरा हुआ है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है. बद्रीनाथ एक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है, जहां लोग आकर आराम और शांति पा सकते हैं.
जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri):
जगन्नाथ पुरी भारत के ओडिशा राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक विशाल मंदिर के लिए जाना जाता है. मंदिर को 12वीं शताब्दी में ओडिशा के राजा अनंतवर्मन ने बनवाया था. मंदिर का निर्माण लाल और सफेद बलुआ पत्थर से किया गया है और यह 135 फीट ऊंचा है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं. भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है.
जगन्नाथ पुरी एक अत्यंत लोकप्रिय तीर्थस्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर परिसर को चारों ओर से दीवारों से घेरा हुआ है और केवल हिंदू ही मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं. मंदिर के परिसर में एक विशाल रथ यात्रा होती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को मंदिर से बाहर निकालकर शहर के चारों ओर घुमाया जाता है. रथ यात्रा एक अत्यंत भव्य और रंगीन उत्सव है, जो लाखों लोगों को आकर्षित करती है. यह धाम ओडिशा राज्य के पुरी जिले में स्थित है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बालभद्र, और सुभद्रा की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। यह मंदिर चार धामों में से पश्चिमी धाम है।
रामेश्वरम् (Rameswaram):
यह धाम तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम जिले में स्थित है। रामेश्वरम में श्री रामेश्वर स्वामी मंदिर है, जिसमें शिव के पृथ्वी तत्व को दर्शाने वाली ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है। यह मंदिर चार धामों में से दक्षिणी धाम है।
रामेश्वरम भारत के तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित एक द्वीप शहर है. यह शहर हिंदुओं के चार धामों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित रामेश्वरम मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. रामेश्वरम मंदिर एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद किया था. मंदिर में भगवान शिव का एक लिंग स्थापित है, जिसे रामलिंगम कहा जाता है. रामेश्वरम मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं.
रामेश्वरम एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. यह शहर रामायण के कई घटनाओं से जुड़ा हुआ है. रामेश्वरम में रामेश्वरम द्वीप, रामेश्वरम मंदिर, धनुषकोटि, सीतामीनार और रामेश्वरम रेलवे स्टेशन जैसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं. रामेश्वरम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है और यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं.
रामेश्वरम एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है. यह शहर हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है.
यह धाम गुजरात राज्य के द्वारका जिले में स्थित है। द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर है, जिसमें श्री कृष्ण की मूर्ति प्रतिष्ठित है। यह मंदिर चार धामों में से एक है और चार धाम यात्रा का पश्चिमी धाम है।
द्वारका भारत के गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित एक प्राचीन नगर और नगरपालिका है. द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है. यह हिन्दुओं के चारधाम में से एक है और सप्तपुरी (सबसे पवित्र प्राचीन नगर) में से भी एक है. यह श्रीकृष्ण के प्राचीन राज्य द्वारका का स्थल है और गुजरात की सर्वप्रथम राजधानी माना जाता है.
द्वारका का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने मथुरा से निकाले जाने के बाद द्वारका नगरी बसाई थी. द्वारका नगरी सोने और चांदी से बनी थी और यह बहुत ही समृद्ध थी. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपने सभी भाइयों और परिवार के साथ रहकर अपना राज्य चलाया था.
द्वारका नगरी का वर्णन महाभारत के आठवें स्कंध में मिलता है. महाभारत में कहा गया है कि द्वारका नगरी एक बहुत ही सुंदर नगरी थी. द्वारका नगरी में कई मंदिर और महल थे. द्वारका नगरी में एक बहुत ही विशाल समुद्र तट भी था. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपने सभी भाइयों और परिवार के साथ रहकर अपना राज्य चलाया था.
द्वारका नगरी आज भी एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण के कई मंदिर हैं. द्वारका नगरी में एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, जिसका नाम द्वारकाधीश मंदिर है. द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है. द्वारकाधीश मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.
द्वारका नगरी एक बहुत ही पवित्र नगरी है. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपना राज्य चलाया था और उन्होंने अपने भक्तों को बहुत सारी शिक्षाएं दी थीं. द्वारका नगरी एक बहुत ही ऐतिहासिक नगरी भी है. द्वारका नगरी में कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जो आज भी मौजूद हैं.
द्वारका नगरी एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है. द्वारका नगरी में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण के मंदिरों के अलावा, कई अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं. द्वारका नगरी में एक बहुत ही सुंदर समुद्र तट भी है. द्वारका नगरी एक बहुत ही शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है.
चार धाम यात्रा का क्रम क्या है?
ऐसा माना जाता है कि यमुनोत्री से यात्रा की शुरुआत करने पर बिना किसी बाधा के आपकी चारधाम यात्रा पूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही शास्त्रों में वर्णित है कि, यात्रा की शुरुआत पश्चिम से की जाती है और पूर्व में समाप्त होती है इसलिए भी सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन किये जाते हैं। तीर्थयात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है, गंगोत्री की ओर बढ़ती है, केदारनाथ पर जाती है और अंत में बद्रीनाथ में समाप्त होती है। यात्रा सड़क या हवाई मार्ग से पूरी की जा सकती है। कुछ भक्त दो धाम यात्रा या दो तीर्थस्थलों - केदारनाथ और बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा भी करते हैं।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।
कहने की जरुरत नहीं है कि आज क्रोध और गुस्सा इंसानों पर सबसे विकृत रूप में हावी हो चूका है. आज छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा का आलम यह है कि हम अपने शांति और विनय जैसे आचरणों को लगभग भूल से गए है.
ऐसा लगता है, शायद इसलिए हीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार के सुभषित के अंतर्गत क्रोध और गुस्सा पर अपने विचार व्यक्त किये हैं.
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सद्भाव के लिए क्रोध को त्यागने की आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृत श्लोक का उद्धरण दिया जो निम्न प्रकार से है-
क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः।
क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्व क्रोधोऽपकर्षति॥
इसका अर्थ है कि क्रोध प्राण लेने वाला शत्रु है, जो मित्र के रूप में दिखता है पर भीतर से दुश्मन होता है। क्रोध अत्यंत तीक्ष्ण (धारदार) तलवार के समान है, जो जीवन की हर अच्छाई को काट देता है।
वास्तव में उक्त श्लोक वाल्मीकि रामायण से लिए गया है जिसका चर्चा प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सद्भाव के लिए क्रोध को त्यागने की आवश्यकता बताते हुए किया है.
क्रोधः प्राणहरः शत्रु: क्रोधो मित्रमुखी रिपुः |
क्रोधो हि असिर्महातीक्ष्णः सर्वं क्रोधोपकर्षति ||
-वाल्मीकि रामायण
गुस्सा अर्थात क्रोध एक दुश्मन की तरह है जो किसी की जान ले सकता है और दोस्तों के बीच दुश्मनी का मुख्य कारण भी है। गुस्सा निश्चित रूप सेएक बहुत तेज़ तलवार की तरह है, जो हर किसी को नुकसान और अपमान पहुंचा सकता है।
दूसरे शब्दों में कहें तो गुस्सा प्राणहरण करने वाले शत्रु के समान है तथा मित्रों के बीच शत्रुता होने का कारण भी होता है | क्रोध वास्तव में एक तीक्ष्ण तलवार के समान है जो सब् को अपमानित कर हानि पहुंचाता है. श्लोक का साफ अर्थ है कि हमें गुस्सा अर्थात क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण करना चाहिए.
हाल के दिनों में जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेरणात्मक उदेश्य के लिए संस्कृत श्लोक को शेयर करने का सिलसिला शुरू किया था, उसी के अंतर्गत आज उन्होंने अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर, वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीने और कर्म करने का संदेश देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया-
"गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत्।
वर्तमानेन कालेन वर्तयन्ति विचक्षणाः।"
चाणक्य नीति से लिए गए इस श्लोक का मतलब है कि किसी को अतीत पर शोक नहीं करना चाहिए और न ही भविष्य के बारे में चिंता करनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति केवल वर्तमान में ही कार्य करते हैं।
श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने लोगों को स्पष्ट सन्देश दिया है कि जो समय बीत गया है उसके बारे में शोक नहीं करना। इसका मतलब साफ है कि हमें हमेशा वर्तमान के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि वही हमारे हाथ में हैं. बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति केवल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार ही जीवनयापन करते हैं |
संस्कृत के इस श्लोक की विवेचना करने निम्न अर्थ निकलता है-
गते शोको न कर्तव्यो: बीते हुए (अतीत) का शोक (दुःख) नहीं करना चाहिए।
भविष्यं नैव चिन्तयेत्: भविष्य के बारे में बिल्कुल भी चिंता नहीं करनी चाहिए।
वर्तमानेन कालेन: वर्तमान के समय से ही।
वर्तयन्ति विचक्षणाः: बुद्धिमान लोग कार्य करते/जीते हैं (या जीवन यापन करते हैं)।
यह श्लोक हमें अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर, वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीने और कर्म करने का संदेश देता है, क्योंकि यही समझदारी का मार्ग है।
तंपारा झील ओडिशा: तंपारा झील, ओडिशा राज्य के गंजाम जिले में स्थित एक खूबसूरत और शांत जलाशय है जो वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। तंपारा झील एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप मे विख्यात है और अपनी सुंदरता के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। पर्यटक यहाँ बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त यह अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि झील के आसपास कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं, जो इसे बर्ड वॉचिंग के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाते हैं।तम्पारा झील पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है क्योंकि यहां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की कई प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।
यह झील पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह स्थल प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और उन सभी के लिए आकर्षण का केंद्र है जो शांति और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं। यहां का शांत वातावरण और सुंदर परिदृश्य मन को शांति और सुकून प्रदान करते हैं।
तंपारा झील एक मीठे पानी की झील है जो लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. यह ओडिशा राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है जो राज्य की खूबसूरत झीलों मे से एक है। यह आर्द्रभूमि दुर्लभ प्रजातियों जैसे कि साइप्रिनस कार्पियो, कॉमन पोचार्ड (अथ्या फेरिना), और रिवर टर्न (स्टर्ना औरंतिया) के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है।
यह रुशिकुल्या नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है जो एक प्राकृतिक स्थल होने के साथ ही यह महत्वपूर्ण पक्षी विहार और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैतंपारा झील एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार है और यहां पर कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं. यह झील एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है और यहां पर लोग तैराकी, बोटिंग और मछली पकड़ने का आनंद लेते हैं. झील के किनारे पर कई होटल और रेस्तरां हैं, जहां पर लोग भोजन और आराम कर सकते हैं.
तंपारा झील:
भारत में स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में देश में 13,26,677 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए कुल 75 रामसर स्थलों को बनाने के लिए रामसर स्थलों की सूची में 11 और आर्द्रभूमि शामिल हो गई हैं। रामसर स्थलों के रूप में नामित 11 आर्द्रभूमियों में से ओडिशा स्थित तंपारा झील भी शामिल है.
तंपारा झील: Facts in Brief
तंपारा झील गंजम जिले में स्थित ओडिशा राज्य की सबसे प्रमुख मीठे पानी की झीलों में से एक है। यहां की भूमि का क्षेत्र धीरे-धीरे वर्षा जल के प्रवाह से भर गया और इसे अंग्रेजों द्वारा "टैम्प" कहा गया और बाद में स्थानीय लोगों द्वारा इसे "तंपारा" कहा गया।
आर्द्रभूमि पक्षियों की कम से कम 60 प्रजातियों, मछलियों की 46 प्रजातियों, फाइटोप्लांकटन की कम से कम 48 प्रजातियों और स्थलीय पौधों और मैक्रोफाइट्स की सात से अधिक प्रजातियों का पालन करती है।
तंपारा झील एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार है. यहां पर कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:
सारस
बगुला
हंस
कबूतर
तोता
मैना
कोयल
मोर
चकवा
बतख
आर्द्रभूमि दुर्लभ प्रजातियों जैसे कि साइप्रिनस कार्पियो, कॉमन पोचार्ड (अथ्या फेरिना), और रिवर टर्न (स्टर्ना औरंतिया) के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है। प्रति वर्ष 12 टन की अनुमानित औसत मछली उपज के साथ, आर्द्रभूमि स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
यह आर्द्रभूमि मछलियों के साथ-साथ कृषि और घरेलू उपयोग के लिए पानी जैसे प्रावधान की सेवाएं भी उपलब्ध कराती है और यह एक प्रसिद्ध पर्यटन और मनोरंजन स्थल भी है।
तम्पारा झील: जाने क्या है खासियत?
तम्पारा एक मीठे पानी की झील है जो राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 5 के निकट (छत्रपुर से) सुंदर में स्थित है. तंपारा झील की सबसे बड़ी खासियत है कि इसके किनारे पर हल्की लहरें उठती हैं और या वाटर सम्बंधित गतिविधियों के लिए शानदार डेस्टिनेशन है,तट के किनारे स्थित काजू के बागानों से होकर बंगाल की खाड़ी के अविर्जिन समुद्र तट तक जाने वाली रोमांचक यात्रा का आनंद भी आप उठा सकते हैं.
पर्यटकों के लिए तम्पारा पहुँचने के लिए किस प्रकार के मार्ग उपलब्ध है?
हवाई जहाज
अगर आप हवाईजहाज से जाना चाहते हैं तो निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर है.
ट्रेन से
अगर आप ट्रेन से तम्पारा पहुंचना चाहते हैं तो निकटतम रेलवे स्टेशन छत्रपुर है.
सड़क द्वारा
यह झील ओडिशा के छत्रपुर शहर के पास स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-16) से आसानी से पहुँचा जा सकता है। अगर आप सड़क द्वारा जाना चाहते हैं तो सड़क मार्ग से यह छत्रपुर से 4 किमी दूर है.
प्रतियोगिता परीक्षा (UPSC, SSC, Railway, NDA, State PSC विभिन्न राज्य सेवा आयोगों ) की परीक्षा में पूछे जाते रहे है. आगामी प्रतियोगिता परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तथा अन्य अवसरों जैसे स्कूल, प्रतियोगी परीक्षा, मंच संचालन, ब्लॉग और क्विज़ प्रतियोगिता के लिए जरुरी ये प्रश्नोत्तर आपके लिए काफी उपयोगी हैं.
प्रश्न 1. भारत का संविधान किस तिथि को लागू हुआ?
उत्तर: 26 जनवरी 1950
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2016
प्रश्न 2. 26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का निर्णय क्यों लिया गया था?
उत्तर: 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी
परीक्षा: SSC CGL
वर्ष: 2018
प्रश्न 3. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
परीक्षा: Railway Group D
वर्ष: 2019
प्रश्न 4.भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
परीक्षा: SSC CHSL
वर्ष: 2020
प्रश्न 5. भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
परीक्षा: NDA
वर्ष: 2015
प्रश्न 6. भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?
उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया)
परीक्षा: State PSC (UPPSC)
वर्ष: 2017
प्रश्न 7. संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?
उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
परीक्षा: SSC GD
वर्ष: 2021
प्रश्न 8. भारतीय संविधान की मूल भाषा क्या थी?
उत्तर: अंग्रेज़ी
परीक्षा: Railway NTPC
वर्ष: 2020
प्रश्न 9. गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?
उत्तर: 21 तोपों की
परीक्षा: CDS
वर्ष: 2016
प्रश्न 10. संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
उत्तर: 9 दिसंबर 1946
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2014
प्रश्न 11. भारत को “गणराज्य” घोषित करने का क्या अर्थ है?
उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
परीक्षा: SSC MTS
वर्ष: 2019
प्रश्न 12. गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस देशभक्ति गीत से होता है?
उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा
परीक्षा: Railway ALP
वर्ष: 2018
प्रश्न 13. संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?
उत्तर: 42वां संविधान संशोधन
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2017
प्रश्न 14. प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?
उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
परीक्षा: State PSC (BPSC)
वर्ष: 2016
प्रश्न 15.भारत का संविधान विश्व में किस रूप में जाना जाता है?
उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
परीक्षा: SSC CPO
वर्ष: 2022
प्रश्न 16.संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
उत्तर: 9 दिसंबर 1946
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2014
प्रश्न 17.संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
परीक्षा: SSC CHSL
वर्ष: 2020
प्रश्न 18. भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2017
प्रश्न 19. भारतीय संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?
उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
परीक्षा: SSC GD
वर्ष: 2021
प्रश्न 20.भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
परीक्षा: SSC MTS
वर्ष: 2017
प्रश्न 21.संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए?
उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2017
प्रश्न 22.प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?
उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
परीक्षा: SSC CHSL
वर्ष: 2016
प्रश्न 23.“गणराज्य” का सही अर्थ क्या है?
उत्तर: राज्य का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
परीक्षा: SSC MTS
वर्ष: 2019
प्रश्न 24.गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?
उत्तर: 21 तोपों की
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2013
प्रश्न 25. भारतीय संविधान को किस तिथि को अंगीकृत (Adopt) किया गया?
उत्तर: 26 नवंबर 1949
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2019
(Based on Memory)
Unique GK Quiz (With Answers)
प्रश्न 1.
भारत का संविधान किस तिथि से लागू हुआ?
उत्तर: 26 जनवरी 1950
प्रश्न 2.
26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी
प्रश्न 3.
भारतीय संविधान को तैयार करने में कुल कितना समय लगा?
उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
प्रश्न 4.
भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रश्न 5.
भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
प्रश्न 6.
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी क्यों दी जाती है?
उत्तर: यह सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान दर्शाने की परंपरा है
प्रश्न 7.
भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इरविन स्टेडियम (वर्तमान में नेशनल स्टेडियम), दिल्ली
प्रश्न 8.
भारतीय संविधान किस देश के संविधान से सबसे अधिक प्रभावित है?
उत्तर: ब्रिटेन
प्रश्न 9.
गणतंत्र दिवस परेड में झांकी का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और विकासात्मक विविधता का प्रदर्शन
प्रश्न 10.
भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?
उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया के राष्ट्रपति)
प्रश्न 11.
संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?
उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
प्रश्न 12.
गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस गीत से होता है?
उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा
प्रश्न 13.
भारत को “गणराज्य” घोषित करने का अर्थ क्या है?
उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना गया हो, न कि राजा
प्रश्न 14.
संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
उत्तर: 9 दिसंबर 1946
प्रश्न 15.
भारतीय संविधान की मूल भाषा कौन-सी थी?
उत्तर: अंग्रेज़ी
प्रश्न 16.
गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं की संयुक्त टुकड़ी किसका प्रतीक है?
उत्तर: राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति
प्रश्न 17.
संविधान में कितनी अनुसूचियाँ प्रारंभ में थीं?
उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
प्रश्न 18.
भारत का संविधान विश्व का कैसा संविधान है?
उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
प्रश्न 19.
26 जनवरी को राष्ट्रपति कौन-सा विशेष सम्मान प्रदान करते हैं?
उत्तर: पद्म पुरस्कार एवं वीरता पुरस्कार
प्रश्न 20.
गणतंत्र दिवस भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: क्योंकि इसी दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना
गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने कहा है कि गूगल पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर के निवेश से समुद्र के अंदर नए केबलों के माध्यम से भारत को अमरीका से जोड़ेगा।
इस पहल के माध्यम से विशाखापट्टणम में समुद्र के अंदर एक नया अंतरराष्ट्रीय गेटवे स्थापित किया जाएगा।
भारत को सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने के लिए समुद्र के अंदर तीन नए मार्ग और चार रणनीतिक फाइबर-ऑप्टिक मार्ग स्थापित किए जाएंगे।
गूगल, भारत में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-एम्स के साथ साझेदारी कर रहा है, ताकि मरीज, एआई टूल्स में अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दर्ज कर सकें और एआई, डॉक्टरों की सहायता के लिए रिपोर्ट तैयार कर सके।
कानपुर में बनेगा भारत-फ्रांस एयरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर
प्रस्तावित केंद्र एयरोनॉटिक्स, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ), एयरपोर्ट संचालन, रक्षा विनिर्माण और संबंधित क्षेत्रों में उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
“द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदूइज्म: द लाइफ, लेसन्स एंड लेगेसी ऑफ श्री नारायण गुरु” पुस्तक के लेखक डॉ. शशि थरूर हैं.
पुस्तक का विमोचन उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
मानव जनित जलवायु परिवर्तन से कॉफी उत्पादन घटा
क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर कॉफी उत्पादन करने वाले देशों ने औसतन 47 अतिरिक्त दिनों की हानिकारक गर्मी का अनुभव किया।
वैश्विक उत्पादन का 75% हिस्सा रखने वाले पांच सबसे बड़े उत्पादक देश हैं-ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया
यून सुक येओल
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में सैन्य शासन लागू करने के असफल प्रयास के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
वासे शहर, नाइजीरिया
एक सीसा और जस्ता खदान में कार्बन मोनोऑक्साइड रिसाव के कारण कल 33 खनिकों की मौत हो गई।
जीवन, जिसे हम अक्सर सरल मान लेते हैं, वास्तव में यह कोई 'फूलों का सेज' नहीं है। यह एक जटिल और निरंतर चलने वाली यात्रा है। इस सफ़र में कभी हम खूबसूरत वादियों से गुजरते हैं, जहाँ सब कुछ हसीन लगता है, तो कभी हमें मुश्किलों और चुनौतियों के ऊबड़-खाबड़ रेगिस्तान से भी दो-चार होना पड़ता है।
लेकिन याद रखें, कठिन समय में मन का विचलित होना स्वाभाविक है, पर उसी क्षण आपका साहस आपकी पहचान बनाता है क्योंकि सच यही है कि जीवन में जो तूफ़ान से नहीं डरते, वही आसमान पर राज करते हैं।
फ़र्क़ सिर्फ हमारे नज़रिए का होता है। कुछ लोग इन मुश्किल घड़ियों में टूटकर बिखर जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन्हीं हालातों की तपिश से अपनी एक नई और मज़बूत पहचान गढ़ते हैं।
याद रखें, कठिन समय आपको तोड़ने नहीं, तराशने आता है—ठीक उसी तरह जैसे पत्थर पर हथौड़े की चोट से सुंदर मूर्ति बनती है। जैसा कि एक मशहूर कहावत है:
"मुश्किलें दिल के इरादे आज़माती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफ़िर, ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं।"
यह संसार सिर्फ हमारे अकेले के लिए नहीं बना है। जीवन में सिर्फ अपने सुख-दुख तक सीमित रहना, जीवन के असली मर्म को समझने से चूक जाना है। जब हम दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं, तभी हमारी यात्रा सार्थक होती है।
जब हालात आपके खिलाफ हों, तब ही आपकी असली क्षमता सामने आती है। वो कहते हैं ना, "मुश्किलें आपकी राह में इसलिए नहीं आतीं कि आप रुक जाएं, बल्कि इसलिए कि आप और मजबूत बनें।"
याद रखें, जीवन में दो हीं लोग असफल होते हैं - एक जो सोचते हैं पर करते नहीं, और दूसरे जो करते हैं पर सोचते नहीं। मतलब साफ़ है, कायर वही होते हैं जो डर का सामना करने से पहले ही हार मान लेते हैं, जबकि बहादुर वे हैं जो गिरकर भी उठना नहीं भूलते।
जीवन में कठिन समय का आना और जाना लगा रहता है; आप इससे बच नहीं सकते। ये चुनौतियाँ अनिवार्य हैं, लेकिन इनसे निपटने का आपका तरीका, आपकी सकारात्मक सोच (Positive Thinking) और आपका रवैया (Attitude) ही आपको इन मुश्किलों से बाहर निकाल सकता है।
आपका एटीट्यूड ही तय करता है कि आप उस मुश्किल को एक रुकावट के तौर पर देखते हैं या एक अवसर के तौर पर।
"सफलता खुशी की कुंजी नहीं है। खुशी सफलता की कुंजी है। यदि आप जो कर रहे हैं उससे प्यार करते हैं, तो आप सफल होंगे।" - अल्बर्ट श्वाइत्ज़र
जब आप मुश्किल समय से गुज़र रहे हों, तो दोस्तों और परिवार के साथ जुड़ना और अपने मन की बात साझा करना, तनाव को कम करने में मदद करता है। यह आपके मूड को बेहतर बनाता है और जीवन में आए अचानक बदलावों और व्यवधानों को समझने की शक्ति देता है।
हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब सब कुछ उलझा हुआ और अंधकारमय लगता है। यह वह समय होता है जब हमें सबसे अधिक धैर्य की ज़रूरत होती है।
जीवन में कठिन समय हर किसी के हिस्से आता है, लेकिन उससे टूट जाना समाधान नहीं है। जो लोग जीवन की चुनौतियों को साहस के साथ स्वीकार करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं और सफलता का स्वाद चखते हैं।
यही समय हमारी असली ताकत और हमारे चरित्र का इम्तिहान होता है। जो व्यक्ति इस कठिन दौर में धैर्य बनाए रखता है, जो शांत रहकर सही निर्णय लेता है, वही आगे चलकर अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
"धैर्य एक कड़वा पौधा है, लेकिन इसके फल बहुत मीठे होते हैं।"
जीवन की इस यात्रा में, चाहे रास्ता कितना भी पथरीला क्यों न हो, अपनी उम्मीद की मशाल जलाए रखें। हर मुश्किल आपको सिखाने आई है, हराने नहीं। अपने एटीट्यूड को सही दिशा दें, अपनों का साथ लें और धैर्य रखें — आप न केवल इन मुश्किलों से पार पाएंगे, बल्कि एक बेहतर और मज़बूत इंसान बनकर उभरेंगे।
नकारात्मक विचारों का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और आप इसे नकार नहीं सकते है। अगर आप सभी बड़े और सफल व्यक्तित्व वाले लोगों की जीवनी को पढ़ेंगे तो पाएंगे कि उन्हें भी इससे गुजरना पड़ता है. हर इंसान के मन में कभी न कभी नकारात्मक विचार आते हैं लेकिन यह जानना जरुरी है कि इन नकारात्मक विचारों से आप कितना जल्दी निकलते हैं क्योंकि अगर आप इनके इन्फ्लुएंस में आ गए तो फिर आप पॉजिटिव विचारों से दूर हो सकते हैं. याद रखें, नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखना ज्यादा जरुरी है क्योंकि ये आते तो सबके दिमाग में हैं, लेकिन इससे निकलना सभी को नहीं आता क्योंकि हम खुद को मोटिवेट करने के टेक्निक से वाकिफ नहीं होता या नकारात्मक विचारों के गिरफ्त में बुरी तरह से फंस चुके होते हैं.
जब ये विचार बार-बार आने लगें और लंबे समय तक टिके रहें, तो यह एक मानसिक ट्रैप की तरह हमें अपने गिरफ्त में ले लेता है जो न केवल हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है, बल्कि हमारे व्यवहार, निर्णय और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
नकारात्मक विचारों का दौर हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है। कभी आपने सोचा है कि अचानक आखिर नकारात्मक विचार क्यों जगह बना लेते हैं. कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर नकारात्मक विचार हमारे अंदर हावी करते हैं जैसे कोई असफलता या निराशा का डर खासतौर पर जब चीजें हमारे मन मुताबिक नहीं होतीं या हमें किसी आशा के विपरीत निराशा मिलती है.
जीवन शार्ट नहीं लॉन्ग रेस है
दूसरों से हमें अपनी तुलना की आदत भी काफी बुरा प्रभाव डालती है और हमें आज के प्रतिस्पर्धा वाले दौर में हम किसी से मामूली रूप से भी पिछड़ना नहीं चाहते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि जीवन शार्ट रेस नहीं बल्कि लॉन्ग रेस है और मामूली बढ़त या पीछा होना कोई मतलब है है क्योंकि इसे स्ट्रेटेजी कहते हैं और अंतिम राउंड में जीत को फाइनल कहा जाता है.
उम्मीद की एक लौ को जलाना सीखें
हर नकारात्मक विचार को चुनौती दें, क्योंकि वही आपके आत्मबल की परीक्षा है।”सकारात्मक सोच रखने वाले दोस्तों, परिवार या मार्गदर्शकों से जुड़े रहें। इसके साथ ही जब मन उदास हो, तब अपने भीतर झांकिए — वहां उम्मीद की एक लौ हमेशा जलती रहती हैऔर उस लौ को हमेशा जलाये रखिये.
अतीत की जाल से बाहर निकलें
अक्सर हम अपने अतीत या पुरानी गलतियों को बार-बार याद करके अपने वर्तमान को खराब करते हैं. यह तय है कि जो ख़तम हो चूका है या बीत गया है वह लौट नहीं सकता और उससे सिर्फ सबक लेकर हमें आगे की कर देखना हीं हमारे भविष्य का निर्माण करेगा. इसके अतिरिक्त पुराने अतीत के बारे में लगातार सोचने से तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ता है जो न केवल हमारे वर्तमान बल्कि भविष्य को भी ख़राब करती है.
खुद को कम आंकने की गलती
अक्सर हम खुद को काम आंकना दूसरों से अपने को कम आंकने की बीमारी पाल लेते हैं जिसमे हमें यह लगने लगता है की समय हमारे साथ नहीं है या मुझमे वह योग्यता नहीं है जो किसी भी प्रकार से योग्य है और यह हमारी सफलता में सबसे बड़ी बाधा है. इसके अतिरिक्त यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और यह दीर्घकालिक भी रह सकता है.
नज़रिया जीने का : एक ओर जबकि देश में बोर्ड और बारहवीं की परीक्षा की घोषणा हो चुकी है और डेट शीट जारी हो चुकी है, परीक्षार्थियों के लिए चुनौतियों का सामना करने का समय आ चुका है।
राज्यों के बोर्ड का शेड्यूल जारी हो चुकी है और सच तो यह है कि आने वाले कुछ महीने परीक्षा के माहौल से गुलजार रहने वाला है. जाहिर है की परीक्षार्थी अपने एक्जाम की तैयारी को लेकर तनाव में रहते हैं लेकिन जरूरत इस बात की हैं कि वे एक्जाम स्ट्रेस को खुद पर हावी नहीं होने दें. ऐसे में अब परीक्षार्थियों को अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलने और खुद को तैयार करने का यह समय है। नई चीजें सीखने और चुनौतियों का सामना करने से आपको अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उच्च तनाव का स्तर छात्रों की दक्षता में बाधा डाल सकता है जिसके परिणामस्वरूप बोर्ड परीक्षाओं के दौरान उनका प्रदर्शन ख़राब हो सकता है। कहने की जरुरत नहीं है कि परीक्षा की तैयारी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण की आवश्यकता होती है।
हालांकि, कभी-कभी परीक्षा की तैयारी के दौरान निराशा का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि कहते हैं ना कि " परिस्थितियां हमेशा तुम्हारे अनुकूल रहे ऐसी आशा नहीं करो क्योंकि आखिर संसार सिर्फ तुम्हारे लिए तो नहीं बना है।" क्या आप जानते हैं कि आखिर इस निराशा के क्या कारण हो सकते हैं?
याद रखें दोस्तों, निराशा एक सामान्य भावना है। हालांकि, यदि आप निराशा से ग्रस्त हो जाते हैं, तो यह आपकी परीक्षा की तैयारी में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसलिए, निराशा पर काबू पाने के लिए निम्न टिप्स की मदद ले सकते हैं जो आपको परीक्षा की तैयारी में निराशा पर काबू पाने में मदद कर सकते हैं:
परीक्षा की तैयारी में निराशा पर काबू पाने के लिए कुछ उपाय निम्नलिखित हैं:
सकारात्मक सोच रखें। निराशा का सबसे अच्छा इलाज सकारात्मक सोच है। जब आप सकारात्मक सोच रखते हैं, तो आप किसी भी बाधा को पार करने के लिए तैयार रहते हैं।
अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखें। परीक्षा की तैयारी करते समय, अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखें। यह आपको प्रेरित रहने में मदद करेगा।
अपनी प्रगति का मूल्यांकन करें। अपनी प्रगति का मूल्यांकन करके, आप यह देख पाएंगे कि आप कितनी दूर आ चुके हैं। यह आपको आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा।
अपनी रणनीति में बदलाव करें। यदि आप लगातार निराशा महसूस कर रहे हैं, तो अपनी रणनीति में बदलाव करने का प्रयास करें। हो सकता है कि आप अपनी तैयारी का तरीका बदलकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें।
अपने दोस्तों और परिवार से बात करें। अपने दोस्तों और परिवार से बात करके, आप अपनी भावनाओं को बाहर निकाल सकते हैं और उन्हें समर्थन प्राप्त कर सकते हैं।
तैयारी के लिए एक विशिष्ट योजना बनाएं। यह आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक दिशा प्रदान करेगा। पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, व्यायाम, आराम और मनोरंजन के लिए भी समय निकालें।
जिस इंसान के भीतर जुनून होता है, उसके रास्ते में कोई मुश्किल टिक नहीं पाती। सच्चाई यह है क़ि जुनून वो आग है, जो साधारण इंसान को भी असाधारण बना देती है। बस जीवन में अगर आप सफलता चाहते हैं तो आपके पास भले हीं संसाधनों की कमी हो, बस दिल में कुछ कर गुजरने की चाह होनी चाहिए क्योंकि यही चाह हीं हालात को रास्ता में बदल देते हैं। जीवन में अगर जुनून नहीं है तो फिर जीवन का कुछ भी मतलब नहीं हैं क्योंकि यह जुनून हीं है जो हमें कुछ पाने का मायने बताती है। यह जुनून ही तो है जो हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मोटिवेट करता है और जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा और उत्साह प्रदान करता है।
पैशन या जुनून पैदा करें
जीवन मे सफलता के लिए अगर आप सोचते हैं की सिर्फ टैलेंट या स्किल होना ही काफी है तो फिर आपको दुबारा सोचने की जरूरत है। याद रखें, सिर्फ टैलेंट या स्किल होना काफी नहीं है तब तक जब तक कि आपके अंदर कुछ कर गुजरने के लिए पैशन या जुनून नहीं है। यह जुनून ही है जो आपको जीवन मे अभाव और सीमित संसधनों के बावजूद आपको सफलता दिल देता है, लेकिन टैलेंट या स्किल होने के बावजूद भी की ऐसे लोग हैं जो बार-बार प्रयास करने के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुंचने मे असफल हो गए ।
आप सोचें कि अगर आपके जीवन लक्ष्य और सपना हीं नहीं हो तो फिर आपका जीवन कितना उद्देश्यहीन हो जायेगा।
ठीक वैसे हीं, जीवन में लक्ष्य और सपना तो हो, लेकिन अगर उन्हें पाने का जुनून नहीं हो तो फिर उन सपनों का क्या होगा?
पहले खुद पर विश्वास करना सीखें
जुनून को विकसित करने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप खुद पर विश्वास करने शुरू करें और आरंभ मे छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हे हर हाल मे पाने की कोशिश करें। उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए खुद को होम करे दें और अपने तमाम संसाधन और माइंड सेट को उसके प्रति होम कर दें। विश्वास करें, एक बार आप जब अपने छोटे से लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे तो आपका आत्मविश्वास और जुनून बढ़ता जाएगा।
हमारा जुनून उन लक्ष्यों और सपनों को प्राप्त करने के लिए हमें उत्साह और ऊर्जा प्रदान करता है जिसके बगैर हम उन्हें पाने की सोच भी नहीं सकते।
आज के जीवन में मिलने वाले संघर्ष और चुनौतियों से आप इंकार नहीं कर सकते और ऐसे में यह आपका जुनून हीं हैं जो इन चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करता है।
याद रखें दोस्तों,जुनून के बिना हम इंसान तो क्या, जानवर भी अपने सर्वाइवल के लिए मुश्किल में पड़ जाएंगे।
एक शेर को अपने भोजन के लिए हिरन के पीछे भागना भी जुनून है, वहीं हिरन को भी अपने जान को बचाने का जुनून भी जरूरी है।