प्रधानमंत्री मोदी हुए रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस से सम्मनित: देखें अब तक मिले 32 पुरस्कारों की लिस्ट


एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्रधान  मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम हुआ जब उन्हें 'द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया  गया. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम ने आज ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में 'द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार नॉर्वे का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान नॉर्वे तथा मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में इस सम्मान के लिए नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम और नॉर्वे की जनता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने इस पुरस्कार को भारत और नॉर्वे के बीच ऐतिहासिक मित्रता को समर्पित करते हुए इसे भारत और नॉर्वे की जनता के बीच साझा की गई अटूट गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह के प्रति श्रद्धांजलि बताया।

यह सम्मान भारत और नॉर्वे के बीच मौजूद सद्भावना के गहरे बंधन का प्रतीक है और भविष्य में उनकी मित्रता तथा सहयोग की यात्रा का मार्गदर्शन करेगा।

अब तक 32वां सम्‍मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.

Order of Abdulaziz Al Saudऑर्डर ऑफ अब्दुलअज़ीज़ अल सऊदSaudi Arabia / सऊदी अरब2016
State Order of Ghazi Amir Amanullah Khanगाज़ी अमीर अमानुल्लाह खान सम्मानAfghanistan / अफगानिस्तान2016
Grand Collar of the State of Palestineग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीनPalestine / फिलिस्तीन2018
Champions of the Earth Awardचैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्डUnited Nations / संयुक्त राष्ट्र2018
Seoul Peace Prizeसियोल शांति पुरस्कारSouth Korea / दक्षिण कोरिया2018
Order of Zayedऑर्डर ऑफ ज़ायेदUnited Arab Emirates / यूएई2019
Order of St. Andrew the Apostleऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयूRussia / रूस2019
Order of the Distinguished Rule of Nishan Izzuddinनिशान इज़्ज़ुद्दीन सम्मानMaldives / मालदीव2019
King Hamad Order of the Renaissanceकिंग हमाद ऑर्डर ऑफ रेनैसांसBahrain / बहरीन2019
Global Goalkeeper Awardग्लोबल गोलकीपर अवॉर्डBill & Melinda Gates Foundation2019
Legion of Meritलीजन ऑफ मेरिटUnited States / अमेरिका2020
Ig Nobel Prize (Parody)इग नोबेल पुरस्कारInternational / अंतरराष्ट्रीय2020
Order of the Druk Gyalpoऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपोBhutan / भूटान2021
Companion of the Order of Fijiकंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजीFiji / फिजी2023
Grand Companion of the Order of Logohuग्रैंड कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहूPapua New Guinea / पापुआ न्यू गिनी2023
Ebakl Awardएबाक्ल अवॉर्डPalau / पलाऊ2023
Order of the Nileऑर्डर ऑफ द नाइलEgypt / मिस्र2023
Grand Cross of the Legion of Honourग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनरFrance / फ्रांस2023
Grand Cross of the Order of Honourग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनरGreece / ग्रीस2023
Dominica Award of Honourडोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनरDominica / डोमिनिका2024
Grand Commander of the Order of the Nigerग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजरNigeria / नाइजीरिया2024
The Order of Excellenceद ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंसGuyana / गुयाना2024
Honorary Order of Freedom of Barbadosऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोसBarbados / बारबाडोस2024
Order of Mubarak Al-Kabeerऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीरKuwait / कुवैत2024
Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Oceanस्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन सम्मानMauritius / मॉरीशस2025
Sri Lanka Mitra Vibhushanaश्रीलंका मित्र विभूषणSri Lanka / श्रीलंका2025
Grand Cross of the Order of Makarios IIIऑर्डर ऑफ माकारियोस तृतीयCyprus / साइप्रस2025
Officer of the Order of the Star of Ghanaस्टार ऑफ घाना सम्मानGhana / घाना2025
Grand Collar of the National Order of the Southern Crossनेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉसBrazil / ब्राज़ील2025
Grand Cross of the Royal Norwegian Order of Meritरॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिटNorway / नॉर्वे2026
Sweden’s Highest Civilian Honourस्वीडन का सर्वोच्च नागरिक सम्मानSweden / स्वीडन2026
Additional International Diplomatic Honours & City Keysअन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं सिटी कीज़Various Countries / विभिन्न देशVarious

Top 20 Daily Current Affairs वन लाइनर May 19 , 2026



  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और  नॉर्वे के प्रधानमंत्री महामहिम श्री जोनास गहर स्टोर ने कब  भारत और नॉर्वे के बीच वर्तमान व्यापार के मूल्य को दोगुना करने के लक्ष्य रखा है-वर्ष 2030 तक
  • प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नॉर्वे को जून 2026 में फ्रांस में आयोजित होने वाले 'भारत इनोवेट्स 2026' में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। 
  • दोनों नेताओं ने पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी तौर-तरीकों की पुष्टि करते हुए, आर्कटिक में ध्रुवीय अनुसंधान और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस से सम्मनित किया गया.
  • श्री वीडी सतीशन को केरलम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई  गई.

चाणक्‍य नीति :जानें किन तीन चीजों के पास में होना हीं पुरुषों के स्वर्ग के समान है यह धरती


चाणक्य या कौटिल्य के विचार आज भी उतने हीं प्रासंगिक है जितने चाणक्य के काल में थे. नन्द वंश को समूल नाश करने धरती को वास्तविक राजा देने की शपथ खाने वाले चाणक्य किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उन्होंने धरती को वास्तविक राजा देने के लिए काफी खोज किया और चन्द्रगुप्त मौर्य को  राजा बनाकर मौर्य वंश की स्थापना किया। चाणक्य वास्तव में विद्वान थें जिनकी पुस्तक अर्थशास्त्र जिसका आजतक मूल्याङ्कन नहीं  किया जा सका है. 

उन्हीं  लिखित उक्त श्लोक के बारे में हम यहाँ चर्चा कर रहें हैं जो वास्तव में किसी भी पुरुष की सम्पूर्णता के लिए चाणक्य ने बताया  है.

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।

विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥ 

उक्त  श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने किसी भी पुरुष  के जीवन में पुत्र, पत्नी और धन के महत्त्व पर प्रकाश डाला  है.  लेकिन चाणक्य ने बताया है कि पुरुष के जीवन में सिर्फ  पुत्र, पत्नी और धन का होना हीं उसके सुखद जीवन की गारंटी बिलकुल नहीं  है.  उनका कहना है कि   बेटा आज्ञाकारी हो तथा पत्नी पति के अनुकूल आचरण करने वाली हो तभी उनके होने की सार्थकता है. इसके साथ हीं पत्नी  पतिव्रता हो एवं जो प्राप्त धन से ही सन्तुष्ट हो, ऐसे व्यक्ति के लिए स्वर्ग यहीं है, यह जानना चाहिए।

आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को सुखी जीवन के लिए तीन प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए या ये तीन चीजें होनी चाहिए:

संस्कारी संतान: यदि पुत्र आज्ञाकारी हो, माता-पिता की बात मानता हो और सही मार्ग पर चलता हो, तो परिवार में कभी क्लेश नहीं होता।

समर्पित पत्नी: यदि पत्नी पति की भावनाओं को समझने वाली, सुख-दुःख में साथ देने वाली और अनुकूल आचरण करने वाली हो, तो गृहस्थ जीवन बेहद आनंदित रहता है।

संतोषी मन: मनुष्य को अपने कर्म से प्राप्त धन (वैभव) पर संतोष करना चाहिए। अत्यधिक लालच और असंतोष ही मनुष्य के दुखों का मुख्य कारण होते हैं।

दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन


केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आज दिल्लीवासियों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने दिल्लीवासियों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए 2019 में पीएम-उदय योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने के वर्तमान निर्णय से निवासियों को अपनी संपत्तियों के पंजीकरण के लिए आगे आने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।

अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय

अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।

इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।

जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।

सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।

पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।

31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।

योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।

इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय

इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।

• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।

• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।

• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।

• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।

• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।

• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया

  • आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
  • अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
  • चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
  • यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
  • यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
  • यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
  • जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।

नजरिया जीने का: जीवन के मूल्यों के प्रतीक हैं शिव, सीखें जीवन की ये महत्वपूर्ण बातें

 



देवों के देव अर्थात महादेव का व्यक्तित्व सम्पूर्ण रूप से रहस्यों से भर हुआ है।भगवान शंकर, भोले शंकर भोले नाथ जैसे अनेकों नामों से अपने भक्तों में पूजे जाने वाले महादेव केवल संहार के देव नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन, संतुलन, ध्यान और आत्म-विकास के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और संतुलन से मिलती है।

भक्त एक तरफ उन्हे भोलानाथ कहते हैं जिसका मतलब हीं निकलता है सादगी, दया और करुणा से भरपूर हैं जिन्हे प्रसन्न करना भक्तों के लिए काफी आसान है। भगवान शिव का जीवन बहुत सरल है—ना महल, ना आडंबर। सच तो यह है कि भगवान शंकर की जीवन का सार हीं यही हैं कि सफल व्यक्ति वही है जो कम संसाधनों में भी संतुष्ट और केंद्रित रह सके। आडंबर और दिखावा ने हमारे जीवन को सबसे अधिक बर्बाद किया है जहां हम दूसरों को देखकर अपना सुख चैन गवां देते हैं 
 वहीं दूसरी तरफ भगवान शिव सत्यम, शिवम, सुंदरम, यानी सत्य, अच्छाई और सुंदरता के रूप में महत्वपूर्ण अच्छाई का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। 

भगवान शिव को “आदियोगी” कहा जाता है। उनका ध्यानमग्न स्वरूप हमें सिखाता है कि सफलता की शुरुआत मन को नियंत्रित करने से होती है। जब मन शांत होता है, तो निर्णय सही होते हैं और जीवन में स्पष्टता आती है।

भगवान शिव सब पर काफी दया और प्रेम रखने वाले हैं चाहे वह देवता हों, असुर हों या साधारण मनुष्य। और यही वजह है कि राक्षसों और दानवों ने भी प्रेम पूर्वक उनका पूजन कर उनसे हीं वरदान लेकर उनके हीं अंत का उपाय अर्थात खुद के विनाश की तैयारी कर लेते थे। 

"महज एक देवता नहीं,
जीवन के मूल्यों के प्रतीक भी हैं शिव। 
भस्म और बाघंबर मे रमे हुए,
संतोष और सादगी के प्रतीक भी हैं शिव। 
समुद्र मंथन से निकले विष को पी जाने वाले,
धैर्य और सहनशीलता के प्रतीक भी हैं शिव। 
बाहरी कोलाहल और तांडव से परे,
ध्यान और समाधि के प्रतीक भी हैं शिव। 
देवता, असुर या हों सामान्य भक्त सब पर ,
एक समान दृष्टि के प्रतीक भी हैं शिव। "

नजरिया जीने का : अपनों की कीमत को पहचाने, घृणा, लालच और उपेक्षा से नहीं करें संबंधों की हत्या


najariya jine ka inspiring thoughts point of view

नजरिया जीने का : हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम कुछ अपने गलत आदतों या मानवीय दुष्कृतियों जैसे लोभ, लालच, द्वेष आदि के कारण उन अपनों से मुँह मोड़ लेना जिनके बगैर कभी हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे. आये दिन आप  यह पढ़ते हैं कि छोटे-छोटे विवादों में भाई न भाई पर आघात किया, क्या इसे प्रासंगिक कही ना सकती है. वही दोनों भाई जब छोटे होते हैं तो एक के बगैर दूसरा नहीं रह पाता लेकिन घृणा, लालच और उपेक्षा जब दोनों के बीच में आ जाती है तो एक दूसरे के वे शत्रु बन जाते हैं वह भी तब जब वे समझदार हो जाते हैं. क्या यही है हमारी शिक्षा और नैतिकता की चरम स्थिति. 

आज की इस व्यस्त जीवन शैली में मौजूद परेशानियों ओर जीवन के भागदौड़ में अक्सर हम अपनों से दूर होते जा रहे हैं। निसंदेह आज के इस दौड़ में जहां जीवन की प्रगति का माध्यम भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मापी जाती है, ऐसी स्थिति में यह स्वाभाविक भी है। 

लेकिन क्या जीवन में संबंधों की गलाघोंटने और उन्हें खत्म करने के लिए सिर्फ व्यस्त जीवनशैली ही जिम्मेदार है? क्या यह सच नहीं कि हम अपने कर्मों और अपने आचरणों से इन संबंधों की हत्या कर अपने संबंधियों से दूर नही होते जा रहे।

सच तो यह  है कि सम्बन्धों की कभी भी अपनी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती है बल्कि इनकी हत्या सदैव मनुष्य ही अपने कर्मों या असामान्य और कभी कभी कभी जान बूझकर अपने कलुषित आचरणों से इनकी हत्या करता है।

आखिर ये मानवीय भूल या आचरण ही तो हैं जिन्हे हम घृणा कहें या क्रोध या लालच, को अक्सर हमारे अपनों को हमसे दूर करते हैं।

कभी हम उपेक्षा करके या कभी भ्रम या संदेह से तो इन संबंधों का पलीता लगाते हैं जो न केवल हमें अपनों से दूर करते हैं बल्कि हमें अकेला बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जहरीला परिवेश का निर्माण करते हैं।

Point Of View : पढ़ें और भी...

रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से

जाने क्या कहते हैं ये हस्तियां नागरिक विश्वास और समावेशी विकास के सन्दर्भ में

इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

स्व-अनुशासन के महत्त्व :को समझे और जीवन को बनाएं सार्थक 

रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती

नजरिया जीने का: प्रेम में समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है

 

 

स्पर्श की कोमलता को, हम जानते हैं बाद में,
हृदय के गहरे संबंधों को पहले जानना भी जरूरी है।

हाँ, नि: शब्द तो होता है प्रेम, लेकिन
समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है।

यह विश्वास हीं तो है, जो लाती है करीब हमें,
फिर भी, सहमति की हद भी जानना जरूरी है।

हाँ, सच्चा प्रेम बिल्कुल निःस्वार्थ हीं होता है।
पर अपेक्षा की सीमा का जानना भी जरूरी है।

भावनाओं की गहराई में उतरना तो प्रेम है, पर,
मौन वार्तालाप की संवेदना को जानना भी जरूरी है।







शेखा झील पक्षी अभयारण्य बना भारत का 99वाँ रामसर स्थल: जानें खास बातें

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित किया गया है। इसके साथ हीं भारत में ऐसे अभयारण्यों की कुल संख्या 99 और राज्य में 12 हो गई है। शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सर्दियों के मौसम में हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावास प्रदान करती है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने यह घोषणा किया। 

श्री भूपेंद्र यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी देते हुए लिखा- “उत्तर प्रदेश ने देशभर के इस आंकड़ें को 99 तक ले जाने का श्रेय प्राप्‍त कर लिया है! शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) को रामसर स्थल घोषित करते हुए मुझे बेहद प्रसन्‍नता का अनुभव हो रहा है।” उन्होंने कहा कि इस घोषणा से स्थानीय आजीविका और वैश्विक जैव विविधता के साथ-साथ जल और जलवायु सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और यह “भारत की 99वीं वर्षगांठ” का प्रतीक है, जो हमें ऐतिहासिक शताब्दी के और निकट ले जाता है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्विकसित करने अभियान के अंतर्गत आर्द्रभूमि और पशुओं, विशेष रूप से पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को वैश्विक समुदाय से एक बार फिर सराहना मिली है।"

इस स्थल के पारिस्थितिक महत्व का उल्‍लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सर्दियों के मौसम में हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावास प्रदान करती है। मंत्री महोदय ने लोगों को इस स्थल का भ्रमण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।


आधार ऑफलाइन सत्यापन में शामिल हुए ये 100 नए संगठन, पढ़ें विस्तार से


एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में तीन महीनों के भीतर कम से कम सौ संगठन ओवीएसई के रूप में पंजीकृत हुए हैं। यह उपलब्धि आधार ऑफलाइन तंत्र के माध्यम से सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागज रहित सत्यापन को सक्षम बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है – जिसके माध्यम से सेवा प्रदाताओं और आम जनता दोनों को समान रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

इन संगठनों में केंद्र और राज्य दोनों के सरकारी विभाग, फिनटेक कंपनियां, इवेंट मैनेजमेंट और आतिथ्य-सत्कार संगठन, शिक्षा तथा परीक्षा संबंधी संस्थाएं, पहचान सत्यापन, पृष्ठभूमि सत्यापन संगठन एवं कार्यबल सत्यापन कंपनियां शामिल है।

आधार के ऑफलाइन सत्यापन में इन संगठनों के शामिल होने से सेवा वितरण की समयबद्धता में सुधार होने, परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी आने और भौतिक दस्तावेज़ प्रबंधन और मैन्युअल सत्यापन प्रक्रियाओं से जुड़ी लागतों में कमी आने की उम्मीद है।

इन ओवीएसई भागीदारों का जुड़ना आधार-आधारित, गोपनीयता-प्रथम डिजिटल सत्यापन ढांचों में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है जो उपयोगकर्ता नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए पहुंच में आसानी सुनिश्चित करते हैं।

ये संगठन आधार ऑफलाइन सत्यापन विधियों जैसे कि क्यूआर कोड-आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों का लाभ उठाकर, अब यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बिना पहचान संबंधी जानकारी "दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने" में सक्षम होंगे।

यह दृष्टिकोण निवासियों पर विशेष ध्यान देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आधार नंबर धारक केवल न्यूनतम आवश्यक जानकारी ही साझा कर सकें, और इस प्रकार गोपनीयता को बढ़ावा मिलता है। यह सत्यापन प्रक्रिया जटिलता को कम करती है और पारदर्शी एवं सहमति-आधारित बातचीत के माध्यम से विश्वास को बढ़ावा देती है।

यह वितरित मॉडल लचीलापन, विस्तारशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जो समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण और लोगों को अपनी जानकारी पर नियंत्रण रखने और स्वेच्छा से अपनी इच्छा अनुसार जानकारी साझा करने की व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

यह पहल सेवा प्रदाताओं के साथ लोगों की बातचीत को सरल बनाकर "जीवन की सुगमता" को बढ़ाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के चल रहे प्रयासों की पूरक है, जिससे आधार धारकों को शीघ्र पंजीकरण, कम कागजी कार्रवाई और अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण का लाभ मिलेगा।

जानें कैसे करें अपने महंगे फर्नीचर की देखभाल: एक्सपर्ट टिप्स

आपके घर के अंदर रखी गई महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को मेंटेन रखना सिर्फ उनकी लंबी उम्र के लिए नहीं बल्कि घरों में शांति और सकारात्मकता के लिए भी जरूरी है। घरों को सुन्दर और व्यवस्थित रखना न केवल आपको शांति और खुशगवार माहौल प्रदान करता है बल्कि वास्तु के हिसाब से भी यह पॉजिटिव और सकारात्मक  ऊर्जाओं की प्रवेश के लिए जरुरी होता है. जाहिर है कि आपके घर के अंदर रखी गई महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को  व्यवस्थित और सजाकर रखने आपके घर को शोभा बढ़ाने के साथ ही शांति और प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करता है. इसके साथ ही आपके घरो में मौजूद महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को उचित रूप से देखभाल की भी जरुरत होती है ताकि आपके घर को यह हमेशा की तरह रौनक प्रदान करती रहे. 

मानसून लगभग हमेशा उमस भरी गर्मी से राहत चाहता है. यह एक ऐसा मौसम है जो  उदासीनता के साथ ही भावनात्मक रूप से एक शांत ठहराव की अभियक्ति देता है. इसके लिए जरुरी है की हम अपने घरों के अंदर  मानसून के दौरान आंतरिक सजावट में कुछ चेंज करें ताकि हम मानसून के दौरान घर को व्यस्थित करें. जानें इस सम्बन्ध में विशेषज्ञों का क्या कहता है ताकि हम मानसून के दौरान अपने घरों के फर्नीचर और आंतरिक साज सजा को कैसे करें व्यवस्थित. 

नमी, कवक और बैक्टीरिया से कैसे बचें?
जैसा कि आप जानते हैं कि मानसून के दौरान एक साथ रखे गए फर्नीचर नमी को अवशोषित करते हैं और कवक और बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं. इसके लिए यह जरुरी है कि फर्नीचर को एक-दूसरे से दूर रखे साथ हीं अगर संभव हो सके तो घरों के अंदर रखे गए फर्नीचर को दीवार और खिड़कियों से भी दूर रखें ताकि मॉइस्चर से उन्हें बचाया जा सके. 

सामान्यत: इसके लिए सबसे सही जगह होगा कमरे के अंदर फर्नीचर को ऐसे जगह स्थान देना जहाँ प्राकृतिक प्रकाश समुचित रूप से पहुँच सके. इसके साथ ही हवा का हमेशा आना भी जरुरी है ताकि फर्नीचर को मॉइस्चर से बचाई जा सके. 

गीले कपड़ों से बचें
फर्नीचर को साफ करने के लिए गीले कपड़ों के इस्तेमाल से हमेशा बचें. ध्यान रखें कि गीले कपडे मॉइस्चर का कारण बन सकते हैं जो आपके फर्नीचर में बरसाती फंगस और बैक्टेरिया का कारन बन समते हैं. गीले कपड़े के बजाय, धूल के संचय से बचने के लिए एक हल्का , सूखे कपड़े का उपयोग करें धूल नमी को अवशोषित करती है जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ फर्नीचर नरम हो सकता है.

खिड़कियों के बहुत पास न जाएं- 
अपने फर्नीचर को खिड़कियों से दूर रखने की कोशिश करें. मानसून के दौरान बाहर से आने वाले हवा के माध्यम से घर के अंदर नमी आ सकती है जो आपके महंगे फर्नीचर के लिए घातक हो सकती है. खिड़कियों के माध्यम से आने वाले नमी के कारण  फर्नीचर का रंग भी फीका हो सकता है.

नवीनीकरण या रिनोवेशन के कार्यो से बचे- मानसून के दौरान किसी भी प्रकार के नवीनीकरण या रिनोवेशन के कार्यो को ना कहना ज्यादा सही कदम हो सकता है. 

 हवा में नमी न होने पर इमारत का रेनोवेशन, पेंटिंग और बढ़ईगीरी आदि के कार्यों पर असर पड़ता है. इस हिसाब से  मॉनसून के दौरान आवशयकता है कि आपके फर्नीचर  को आवश्यक रखरखाव देकर उनके सुंदरता और मजबूती को बढ़ाने का उपक्रम किया जाए. 

नजरिया जीने का: भगवन राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

Najariya jine ka Qualities of Lord Ram

नजरिया जीने का:  यदि आप जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं और इस जीवन में कुछ नया और अच्छा करना चाहते हैं तो हम आपके लिए लाए हैं भगवान राम के जीवन से कुछ ऐसा टिप्स जिसके माध्यम से आपके जीवन में सकारत्मक और फलदाई परिवर्तन हो सके। तो आइए जानते हैं कि भगवान राम के जीवन की उन विशेषताओं के बारे में जो उन्हे मर्यादा पुरुषोतम बनाती है और जिन्हें अपनाकर हम अपना जीवन संवार सकते हैं। 

भगवान राम के चरित्र की ये पांच महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। भगवान राम ने विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहेऔर धर्म का मार्ग उन्होंने कभी नहीं छोड़ा । उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की तथा अपने निकट आने वाले सभी का कल्याण किया चाहे वह पशु रूप में हो, पक्षी रूप में हो, अमीर  हो गरीब हो । स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। बाली का वध करने, रावण का संहार करने या पिता के वचन की रक्षा के लिए वन का मार्ग चुनने जैसे अनेक उदाहरण है जहाँ भगवान् राम ने धर्म और न्याय का मार्ग कभी नहीं छोड़ा. 

भगवान राम के चरित्र की ये  महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

सत्य:

 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सत्य के पुजारी थे। उन्होंने अपने जीवन में चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, उन्होंने झूठ कभी नहीं बोलै। उन्होंने अपने पिता दशरथ के वचन का पालन करने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया लेकिन पुत्र धर्म का त्याग नहीं किया।

धर्म: 

भगवान राम धर्म के पालनकर्ता थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास किया। भाईयों के लिए त्याग और समर्पण के लिए भी वे हमेशा तैयार रहे. उन्होंने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया। धर्म का पालन करना उन्होंने तब भी नहीं छोड़ा और  उन्होंने रावण जैसे अत्याचारी का वध करके धर्म की रक्षा की। 

दया: 

भगवान राम दयालु और करुणावान थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश की। उन्होंने सुग्रीव और हनुमान जैसे अनेकों लोगों की मदद की।  भगवान राम ने अपनी दयालुता के कारण उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया।

बेहतर प्रबंधक

भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि वे अपने सभी स्वजनों और सहकर्मियों को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया और इसी वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था। 

नैतिकता: 

भगवान राम नैतिकता के आदर्श थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा नैतिकता का पालन किया। उन्होंने रावण के साथ युद्ध करते समय भी उसके साथ नैतिकता का पालन किया।

भगवान श्रीराम के अनमोल वचन 

  • "सत्य ही धर्म है और धर्म ही परम तत्व है।"
  • "मन पर विजय ही सच्ची विजय है।"
  • "जो अपने वचन पर अडिग रहता है, वही सच्चा राजा होता है।"
  • "धन और बल क्षणिक हैं, परंतु धर्म और सत्य शाश्वत हैं।"
  • "जो अपने पिता की आज्ञा का पालन करता है, वही सच्चा पुत्र है।"
  • "दया, क्षमा और नम्रता ही मानव की सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।"
  • "संकट में धैर्य न छोड़ना ही वीरता है।"
  • "अहंकार विनाश का कारण है। विनम्रता ही सच्चा बल है।"
  • "जो धर्म के मार्ग पर चलता है, वही सच्चा विजयी होता है।"
  • "शत्रु पर विजय से पहले अपने भीतर के विकारों पर विजय आवश्यक है।"

Women Reservation Bill (महिला आरक्षण विधेयक) MCQs GK Quiz


1. महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या ?
A. शिक्षा बढ़ाना
B. महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देना 
C. रोजगार देना
D. स्वास्थ्य सुधार
 Ans: B

2. हाल ही में पारित Women Reservation Bill का नाम क्या है?
A. Shakti Act
B. Nari Shakti Vandan Adhiniyam
C. Women Power Act
D. Mahila Adhikar Act
 Ans: B

3. यह विधेयक किस संविधान संशोधन से संबंधित है?
A. 105th
B. 106th
C. 107th
D. 108th
Ans: B
4. यह बिल किन संस्थाओं में आरक्षण देता है
A. केवल संसद 
B. केवल विधानसभाएं 
C. दोनों 
D. पंचायत
 Ans: C
5.आरक्षण की अवधि कितनी है?
A. 10 वर्ष
B. 15 वर्ष
C. 20 वर्ष
D. स्थायी 
Ans: B
6. Delimitation का क्या मतलब है?
A. चुनाव 
B. क्षेत्र निर्धारण
C. कानून बनाना 
D. आरक्षण देना
Ans: B
7. इस बिल को सबसे पहले किस सरकार ने पेश किया?
A. Atal Bihari Vajpayee सरकार
B. H. D. Deve Gowda सरकार
C. Manmohan Singh सरकार
D. Narendra Modi सरकार
 Ans: B
8. पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए आरक्षण कितने प्रतिशत है?
A. 33%
B. 50% (कई राज्यों में)
C. 25%
D. 40%
Ans: B
9.Women Reservation Bill लागू होने के लिए आवश्यक शर्तें कौन सी हैं?
Census
Delimitation
Presidential Rule
A. 1 and 2
B. 2 and 3
C. 1 only
D. All
Ans: A
10. निम्नलिखित में से कौन सही है?
Bill promotes gender equality
It increases political participation
It reduces democracy
A. 1 and 2
B. 2 and 3
C. 1 only
D. All
 Ans: A

Address To Nation : जानें अब तक PM नरेंद्र मोदी ने कब और कितनी बार राष्ट्र को किया है सम्बोधन, देखें लिस्ट


आज अर्थात अप्रैल 18, 2026  को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे। ऐसी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कई सारे विषयों में से कल महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कब संबोधन किया था। इसके पहले प्रधानमंत्री ने 21 सितंबर, 2025 को राष्ट्र को संबोधित किया और नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव की पहली पूजा यानी नवरात्रि की शुरुआत के साथ जीएसटी सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य के सपनों के अनुरूप जीएसटी सुधारों, बचत उत्सव और स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार-प्रसार और खरीद पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि केवल पाँच से 18 प्रतिशत कर स्लैब देश के लोगों के हित में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री कई मौकों पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं और नोटबंदी, मिशन शक्ति, अनुच्छेद 370 का उन्मूलन, लॉकडाउन की घोषणा, टीकाकरण अपडेट आदि सहित कई सुधारों/जानकारियों का खुलासा कर चुके हैं।

निःसंदेह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन एक महत्वपूर्ण घटना है जो न केवल भारत के लोगों का, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अब तक दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधनों के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं-


  • नोटबंदी - 8 नवंबर, 2016
  • मिशन शक्ति - 27 मार्च, 2019
  • अनुच्छेद 370 का निरसन - अगस्त 2019
  • कोविड महामारी 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज - 12 मई, 2020-21
  • लॉकडाउन की घोषणा 30 जून, 2020
  • टीकाकरण अपडेट 07 जून, 2021
  • तीन कृषि कानूनों का निरसन - 19 नवंबर, 2021
  • ऑपरेशन सिंदूर, 12 मई, 2025
  • जीएसटी सुधार बचत उत्सव - 21 सितंबर, 2025