जानें कैसे करें अपने महंगे फर्नीचर की देखभाल: एक्सपर्ट टिप्स
Daily Current Affairs one linear Complete GK Dose July 04 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने लॉन्च की ‘विकसित उड़ान’ योजना: Facts in Brief
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण ‘विकसित उड़ान’ का शुभारंभ किया।
- अक्टूबर 2016 में शुरू की गई उड़ान योजना के तहत अब तक 669 मार्गों का संचालन शुरू किया जा चुका है।
- इस योजना के माध्यम से 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल एयरोड्रोम को जोड़ा गया है, जिससे 1.66 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ मिला है।
- इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च 2026 को संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी थी।
- अगले 10 वर्षों के लिए इस योजना पर लगभग 29,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिससे नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गति मिलने के साथ ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
- संशोधित योजना के तहत 12,159 करोड़ रुपए के निवेश से 100 एयरोड्रोम विकसित किए जाएंगे।
- 3,661 करोड़ रुपए की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित होंगे
चाणक्य नीति :जानें किन तीन चीजों के पास में होना हीं पुरुषों के स्वर्ग के समान है यह धरती
चाणक्य या कौटिल्य के विचार आज भी उतने हीं प्रासंगिक है जितने चाणक्य के काल में थे. नन्द वंश को समूल नाश करने धरती को वास्तविक राजा देने की शपथ खाने वाले चाणक्य किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उन्होंने धरती को वास्तविक राजा देने के लिए काफी खोज किया और चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाकर मौर्य वंश की स्थापना किया। चाणक्य वास्तव में विद्वान थें जिनकी पुस्तक अर्थशास्त्र जिसका आजतक मूल्याङ्कन नहीं किया जा सका है.
उन्हीं लिखित उक्त श्लोक के बारे में हम यहाँ चर्चा कर रहें हैं जो वास्तव में किसी भी पुरुष की सम्पूर्णता के लिए चाणक्य ने बताया है.
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥
उक्त श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने किसी भी पुरुष के जीवन में पुत्र, पत्नी और धन के महत्त्व पर प्रकाश डाला है. लेकिन चाणक्य ने बताया है कि पुरुष के जीवन में सिर्फ पुत्र, पत्नी और धन का होना हीं उसके सुखद जीवन की गारंटी बिलकुल नहीं है. उनका कहना है कि बेटा आज्ञाकारी हो तथा पत्नी पति के अनुकूल आचरण करने वाली हो तभी उनके होने की सार्थकता है. इसके साथ हीं पत्नी पतिव्रता हो एवं जो प्राप्त धन से ही सन्तुष्ट हो, ऐसे व्यक्ति के लिए स्वर्ग यहीं है, यह जानना चाहिए।
आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को सुखी जीवन के लिए तीन प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए या ये तीन चीजें होनी चाहिए:
संस्कारी संतान: यदि पुत्र आज्ञाकारी हो, माता-पिता की बात मानता हो और सही मार्ग पर चलता हो, तो परिवार में कभी क्लेश नहीं होता।
समर्पित पत्नी: यदि पत्नी पति की भावनाओं को समझने वाली, सुख-दुःख में साथ देने वाली और अनुकूल आचरण करने वाली हो, तो गृहस्थ जीवन बेहद आनंदित रहता है।
संतोषी मन: मनुष्य को अपने कर्म से प्राप्त धन (वैभव) पर संतोष करना चाहिए। अत्यधिक लालच और असंतोष ही मनुष्य के दुखों का मुख्य कारण होते हैं।
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उदार प्रवृति:
पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि ऐसे लोग अपने जीवन में काफी उदार प्रवृत्ति वाले होते हैं ऐसे लोग दूसरों के मनोभावों को और भावनाओं को काफी अच्छी तरह समझते हैं. यह लोग अपने संबंधी या आपने आसपास के लोगों को हमेशा सुखी देखना चाहते हैं और उनके सुख दुख में हमेशा साथ रहते हैं वह कभी भी अपने संबंधियों के वह हमेशा वह हमेशा अपने संबंधियों और अपने दोस्तों की आवश्यकता के समय उपलब्ध रहते हैं.
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भगवान में विशेष अनुरक्ति
पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक भगवान में अत्यधिक विश्वास करने वाले होते हैं और उनका ऐसा मान्यता है कि ईश्वर हमेशा उनके लिए उपलब्ध रहते हैं. ईश्वर की भक्ति और पूजा-पाठ उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होती है और उनका यह मान्यता है की ईश्वर होता है जो किसी भी संकट या कष्ट में वह मदद करता है. ऐसे विश्वास का कारण भी होता क्योंकि ये लोग अपने कार्यो को अंजाम तक पहुंचाने के दौरान भी ईश्वर को नहीं भूल सकते हैं.
गुरु/पिता का विशेष स्थान:
पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों में अपने गुरु और पिता के प्रति विशेष अनुरक्ति देखी जाती है. जीवन में किसी भी उपलब्धि या विशेष अवसरों पर ऐसे लोग अपने पिता और अपने गुरु को विशेष तौर पर याद करना हैं और सारा श्रेय उन्हें हीं देना पसंद करते हैं. उनका ऐसा मान्यता है कि जीवन में पिता और टीचर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और जीवन में वाे इनके प्रति वे काफी अनुराग दिखाते हैं और अपना पथ प्रदर्शक और मोटीवेटर मानते हैं.
वचन के पक्के:
पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह वचन के काफी पक्के होते हैं. उनके लिए उनके द्वारा किया गया कोई भी वादा या वचन अपने जीवन से काफी जरूरी है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं. उनके लिए अपने द्वारा दिया गया कोई भी वचन या किया गया वादा को हर हाल में पूरा किया जाना और ऐसे लोग ईमानदारी के साथ उसे पूरा करने की कोशिश भी करते हैं.
यशस्वी और प्रभावशाली:
पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक काफी यशस्वी और प्रभावशाली होते हैं जो जीवन में काफी प्रभाव छोड़ने में सफल रहते हैं. ऐसे लोग अपने कर्मों और अपने सोच की वजह से जीवन में काफी आगे बढ़ते हैं साथ ही दुनिया को रोशनी भी दिखाने का काम करते हैं. उन्हें जो भी काम जीवन में मिलती है वे लोग उसे काफी तल्लीनता के साथ करना पसंद करते हैं.
ईमानदारी:
ईमानदारी पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले लोगों का सबसे प्रमुख विशेषता होती है जीवन जीने के लिए ऐसे लोग ईमानदारी को काफी तवज्जो देते हैं और जीवन में आगे बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण यही होती है कि वे अपने जीवन के हर क्षेत्र में चाहे वह इनके निजी जीवन हो या परिवारिक जीवन हो सामाजिक जीवन हो या प्रोफेशनल फ्रंट, हर जगह वह इमानदारी से अपने काम को अंजाम देते हैं.
पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वालों में अक्सर समाज और दुनिया के महापुरुषों और धार्मिक हस्तियों का नाम आता है. पूर्णिमा के दिन जिन महापुरुषों और धार्मिक हस्तियों का जन्म हुआ था उनमे शामिल हैं-
गौतम बुद्ध: बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व), और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए थे। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
महर्षि वेदव्यास: जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की, उनका जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। इस दिन को भारत में गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म पारंपरिक रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है।
संत कबीर दास: कई ऐतिहासिक स्रोतों और मान्यताओं के अनुसार, संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था।
चैतन्य महाप्रभु: गौड़ीय वैष्णव धर्म के एक प्रमुख संत और समाज सुधारक चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन फाल्गुन पूर्णिमा को 'गौरा पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है।
नजरिया जीने का: भगवान राम के जीवन से सीखें, जीवन की चुनौतियों का सामना करना
भगवान राम का जीवन एक आदर्श जीवन के रूप में माना जाता है, जहाँ उन्होंने जीवन की अनेक चुनौतियों का सामना धैर्य, साहस और समर्पण के साथ किया। उनके जीवन से कई महत्वपूर्ण सीखें ली जा सकती हैं जो हमें जीवन में सही दृष्टिकोण अपनाने में मदद करती हैं। भगवान राम के जीवन से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि जब जीवन कठिन हो, तब शिकायत के बजाय धैर्य और विश्वास बनाए रखें। अगर आप भगवन राम के जीवन पर गौर करेंगे तो पाएंगे की वनवास पर गए और इसके लिए उन्होंने राज्य, सुख-सुविधा और परिवार को त्याग दिया, उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। कहते हैं न की परिस्थितियों देने से अच्छा है कि या तो हम उन्हें बदलें या फिर उन्हें ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार कर लें।
धैर्य और सहनशीलता: भगवान राम ने वनवास के दौरान और रावण के साथ युद्ध में अत्यधिक धैर्य और सहनशीलता का परिचय दिया। जीवन में जब कठिनाइयाँ आती हैं, तो धैर्य रखना और अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना आवश्यक होता है।
कर्तव्यपरायणता: भगवान राम ने अपने पिता के वचन को निभाने के लिए राजसुख को त्याग कर वनवास स्वीकार किया। यह हमें सिखाता है कि जीवन में कर्तव्य का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
सच्चाई और न्याय: राम ने हमेशा सत्य और न्याय का पालन किया, चाहे परिणाम कुछ भी हो। यह हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलने से हमें जीवन में अंततः सफलता और सम्मान मिलता है।भले ही हालात विपरीत हों, भगवान राम ने कभी धर्म का त्याग नहीं किया। रावण से युद्ध भी धर्म की रक्षा के लिए लड़ा गया था।
संबंधों का सम्मान: भगवान राम ने हमेशा इस वास्तविकता को साबित किया कि रिश्तों की नींव सम्मान, त्याग और सच्चाई पर टिकती है और उनके जीवन पर अगर करें तो पाएंगे किभगवान् राम ने न केवल इंसानों के साथ बल्कि जटायु, हनुमान, सुग्रीव, जैसों के साथ भी रिश्तों की मर्यादा को निभाया।
राम ने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने के साथ हीं भ्राता लक्ष्मण और भरत के प्रति कर्तव्य निभाया। उन्होंने हर रिश्ते की मर्यादा का आदर किया।
विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मक दृष्टिकोण: रावण के साथ युद्ध के समय भी, भगवान राम ने कभी नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं अपनाया। उन्होंने सदा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कठिनाइयों का सामना किया। जीवन में विपरीत परिस्थितियों का आना स्वाभाविक है और इससे कोई भी बच नहीं सकता. भगवान् राम का जीवन भी इसका अपवाद नहीं था. आप देखेंगे तो भगवान् राम ने भी अपने जीवन में अनगिनत विपरीत परिस्थितियों का सामना किया खासतौर पर वनवास के समय. इस दौरान भगवान राम ने हनुमान, सुग्रीव और विभीषण जैसे सच्चे मित्र बनाए और एक नई शक्ति का निर्माण किया।
कहने का तात्पर्य यह है जीवन की मुश्किलें हमें नए अनुभव और नए साथी देती हैं लेकिन भगवन राम के तरह उन्हें अवसर की तरह अपनाइए।
इन सबक से हमें यह समझ में आता है कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए। भगवान राम का जीवन एक प्रेरणा है, जो हमें सिखाता है कि कैसे हर परिस्थिति में सही नजरिया अपनाकर आगे बढ़ा जा सकता है।
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प्रधानमंत्री मोदी हुए रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस से सम्मनित: देखें अब तक मिले 32 पुरस्कारों की लिस्ट
एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम हुआ जब उन्हें 'द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया गया. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम ने आज ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में 'द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार नॉर्वे का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान नॉर्वे तथा मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में इस सम्मान के लिए नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम और नॉर्वे की जनता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने इस पुरस्कार को भारत और नॉर्वे के बीच ऐतिहासिक मित्रता को समर्पित करते हुए इसे भारत और नॉर्वे की जनता के बीच साझा की गई अटूट गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह के प्रति श्रद्धांजलि बताया।
यह सम्मान भारत और नॉर्वे के बीच मौजूद सद्भावना के गहरे बंधन का प्रतीक है और भविष्य में उनकी मित्रता तथा सहयोग की यात्रा का मार्गदर्शन करेगा।
अब तक 32वां सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है. एक दिन पहले ही स्वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.
| Order of Abdulaziz Al Saud | ऑर्डर ऑफ अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद | Saudi Arabia / सऊदी अरब | 2016 |
| State Order of Ghazi Amir Amanullah Khan | गाज़ी अमीर अमानुल्लाह खान सम्मान | Afghanistan / अफगानिस्तान | 2016 |
| Grand Collar of the State of Palestine | ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन | Palestine / फिलिस्तीन | 2018 |
| Champions of the Earth Award | चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड | United Nations / संयुक्त राष्ट्र | 2018 |
| Seoul Peace Prize | सियोल शांति पुरस्कार | South Korea / दक्षिण कोरिया | 2018 |
| Order of Zayed | ऑर्डर ऑफ ज़ायेद | United Arab Emirates / यूएई | 2019 |
| Order of St. Andrew the Apostle | ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू | Russia / रूस | 2019 |
| Order of the Distinguished Rule of Nishan Izzuddin | निशान इज़्ज़ुद्दीन सम्मान | Maldives / मालदीव | 2019 |
| King Hamad Order of the Renaissance | किंग हमाद ऑर्डर ऑफ रेनैसांस | Bahrain / बहरीन | 2019 |
| Global Goalkeeper Award | ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड | Bill & Melinda Gates Foundation | 2019 |
| Legion of Merit | लीजन ऑफ मेरिट | United States / अमेरिका | 2020 |
| Ig Nobel Prize (Parody) | इग नोबेल पुरस्कार | International / अंतरराष्ट्रीय | 2020 |
| Order of the Druk Gyalpo | ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो | Bhutan / भूटान | 2021 |
| Companion of the Order of Fiji | कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी | Fiji / फिजी | 2023 |
| Grand Companion of the Order of Logohu | ग्रैंड कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू | Papua New Guinea / पापुआ न्यू गिनी | 2023 |
| Ebakl Award | एबाक्ल अवॉर्ड | Palau / पलाऊ | 2023 |
| Order of the Nile | ऑर्डर ऑफ द नाइल | Egypt / मिस्र | 2023 |
| Grand Cross of the Legion of Honour | ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर | France / फ्रांस | 2023 |
| Grand Cross of the Order of Honour | ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर | Greece / ग्रीस | 2023 |
| Dominica Award of Honour | डोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनर | Dominica / डोमिनिका | 2024 |
| Grand Commander of the Order of the Niger | ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर | Nigeria / नाइजीरिया | 2024 |
| The Order of Excellence | द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस | Guyana / गुयाना | 2024 |
| Honorary Order of Freedom of Barbados | ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस | Barbados / बारबाडोस | 2024 |
| Order of Mubarak Al-Kabeer | ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर | Kuwait / कुवैत | 2024 |
| Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Ocean | स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन सम्मान | Mauritius / मॉरीशस | 2025 |
| Sri Lanka Mitra Vibhushana | श्रीलंका मित्र विभूषण | Sri Lanka / श्रीलंका | 2025 |
| Grand Cross of the Order of Makarios III | ऑर्डर ऑफ माकारियोस तृतीय | Cyprus / साइप्रस | 2025 |
| Officer of the Order of the Star of Ghana | स्टार ऑफ घाना सम्मान | Ghana / घाना | 2025 |
| Grand Collar of the National Order of the Southern Cross | नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस | Brazil / ब्राज़ील | 2025 |
| Grand Cross of the Royal Norwegian Order of Merit | रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट | Norway / नॉर्वे | 2026 |
| Sweden’s Highest Civilian Honour | स्वीडन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान | Sweden / स्वीडन | 2026 |
| Additional International Diplomatic Honours & City Keys | अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं सिटी कीज़ | Various Countries / विभिन्न देश | Various |
Top 20 Daily Current Affairs वन लाइनर May 19 , 2026
- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री महामहिम श्री जोनास गहर स्टोर ने कब भारत और नॉर्वे के बीच वर्तमान व्यापार के मूल्य को दोगुना करने के लक्ष्य रखा है-वर्ष 2030 तक
- प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नॉर्वे को जून 2026 में फ्रांस में आयोजित होने वाले 'भारत इनोवेट्स 2026' में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
- दोनों नेताओं ने पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी तौर-तरीकों की पुष्टि करते हुए, आर्कटिक में ध्रुवीय अनुसंधान और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस से सम्मनित किया गया.
- श्री वीडी सतीशन को केरलम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई.
दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।
अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय
अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।
इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।
जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।
सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।
पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।
31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।
योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।
इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण
2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।
लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय
इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:
• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।
• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।
• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।
• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।
• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।
• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।
• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।
ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया
- आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
- अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
- चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
- यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
- यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
- यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
- यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
- राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
- जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।
नजरिया जीने का : अपनों की कीमत को पहचाने, घृणा, लालच और उपेक्षा से नहीं करें संबंधों की हत्या
नजरिया जीने का : हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम कुछ अपने गलत आदतों या मानवीय दुष्कृतियों जैसे लोभ, लालच, द्वेष आदि के कारण उन अपनों से मुँह मोड़ लेना जिनके बगैर कभी हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे. आये दिन आप यह पढ़ते हैं कि छोटे-छोटे विवादों में भाई न भाई पर आघात किया, क्या इसे प्रासंगिक कही ना सकती है. वही दोनों भाई जब छोटे होते हैं तो एक के बगैर दूसरा नहीं रह पाता लेकिन घृणा, लालच और उपेक्षा जब दोनों के बीच में आ जाती है तो एक दूसरे के वे शत्रु बन जाते हैं वह भी तब जब वे समझदार हो जाते हैं. क्या यही है हमारी शिक्षा और नैतिकता की चरम स्थिति.
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रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से
जाने क्या कहते हैं ये हस्तियां नागरिक विश्वास और समावेशी विकास के सन्दर्भ में
इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें
स्व-अनुशासन के महत्त्व :को समझे और जीवन को बनाएं सार्थक
रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती
नजरिया जीने का: प्रेम में समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है
स्पर्श की कोमलता को, हम जानते हैं बाद में,
हृदय के गहरे संबंधों को पहले जानना भी जरूरी है।हाँ, नि: शब्द तो होता है प्रेम, लेकिनसमर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है।यह विश्वास हीं तो है, जो लाती है करीब हमें,फिर भी, सहमति की हद भी जानना जरूरी है।हाँ, सच्चा प्रेम बिल्कुल निःस्वार्थ हीं होता है।पर अपेक्षा की सीमा का जानना भी जरूरी है।भावनाओं की गहराई में उतरना तो प्रेम है, पर,मौन वार्तालाप की संवेदना को जानना भी जरूरी है।












